मानसून रूठा, अब कैसे होगी धान की बुआई.. बिहार के किसान ने खोजा तगड़ा 'नाले वाला जुगाड़'
बारिश की कमी से जमुई के किसानों को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें, ऐसे में किसानों ने जुगाड़ ढूंढा. रिपोर्ट- राजेश

Published : August 6, 2026 at 1:23 PM IST
जमुई: ''हर साल इस उम्मीद में धान का बिचड़ा तैयार कर लेते हैं कि समय पर अच्छी बारिश होगी तो खेतों में धान की रोपाई करेंगे, फिर अच्छी फसल होगी तो साल भर परिवार का पेट भरने के लिए अनाज मिल जाएगा. इस साल अच्छी पैदावार हुई तो कुछ अनाज बेचकर महाजन का कर्जा भी चुका देंगे. महाजन का कर्ज चुकाने के बाद कुछ पैसे बच गए तो आगे के लिए काम आएंगे.''
यह दर्द कहने को तो महिसौडी गांव के किसान गिरीश पासवान का है. लेकिन इसमें कई अन्नदाताओं की तकलीफ छुपी हुई है. गिरीश कहते हैं कि, ''पिछले कई वर्षो से समय पर अच्छी बारिश नहीं हुई. इस साल मानसून की बारिश सही अनुपात में नहीं होने से लग रहा है कि सारी मेहनत बेकार चली जाएगी. हर साल कर्ज लेकर खेती करते है. कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा हैं. 5-6 वर्ष से तैयार बिचड़ा को बचाने के लिए अब नाले का पानी को जमा कर खेती कर रहे है.''

रूठे मेघों ने बढ़ायी किसान की चिंता : धान की अच्छी उपज के लिए खेत में बिचड़ा डालने से लेकर रोपाई तक का सही समय एक जून से 31 जुलाई तक होता है. लेकिन जून-जुलाई बीत गया. अगस्त का पहला सप्ताह चल रहा है. ऐसे में बारिश की किल्लत के कारण जमुई जिले के किसानों ने अच्छे फसल की उम्मीद छोड़ दी है. जिले की हजारों एकड़ खेत परती (बिना रोपाई के) है.
कैसे होगी धान की रोपाई? : वहीं दूसरी तरफ जमुई जिला मुख्यालय के वार्ड नंबर 12 (महिसौडी), हरनाहा, कल्याणपुर, नीमारंग, भछियार, हांसडीह, उझंडी समेत कई स्थानों पर कुछ किसान कहीं कुछ कट्ठा तो कहीं कुछ बीघा खेतों में शहर भर के कचरे और गंदगी से भरे बदबूदार पानी को जमा कर खेतों में धान के बिचड़ों की रोपाई कर रहे है.

'आसमान को निहारते आंखे थक गई' : नाले के पानी से खेत में रोपनी कर रहे किसान 60 वर्षीय धर्म मांझी ने कहा, इस बार पानी नहीं पड़ा नहीं है. 15 दिन की मेहनत के बाद नाले का पानी खेत में जमा कर रोपनी कर पा रहे हैं. नाले का पानी खेतों में साल भर बहता रहता है. हम हर साल नाले के पानी को खेत में आने से रोकने की कोशिश करते रहते है. लेकिन इस बार कम बारिश हुई तो उसी नाले के पानी धान की बुआई कर रहे है.
''हमारे खेत के आसपास कोई बोरिंग नहीं है. मानसून पहले जैसा नहीं रहा. सारी जमा पूंजी अच्छी फसल की उम्मीद में लगा दी. जब आसमान को निहारते आंखे थक गई, तब मजबूरन नाले के पानी के खेती करनी पड़ रही है.'' - धर्म मांझी, महिसौडी गांव, जमुई
'नाले का पानी भी पर्याप्त नहीं' : खेतों की तरफ इशारा करते हुए गौतम मांझी कहते है, इस साल भी बारिश ठीक से नहीं हो पाई. धान की रोपाई का समय निकला जा रहा है. अब तो मजबूरन नाले के पानी से ही धान की रोपाई करनी पड़ी रही है.

''नाले का पानी भी पर्याप्त नहीं है, धान के फसल तैयार होने तक दो-तीन पानी तो लगता ही है. अगर आगे भी बारिश नहीं हुई तो सारी मेहनत और पूंजी सब बर्बाद हो जाएगा. पांच साल से नाले के सहारे ही खेती कर रहे है.'' - गौतम मांझी, किसान
'पानी निकासी की कोी व्यवस्था नहीं' : ग्रामीणों की माने तो, नाले के पानी से खेती हर जगह संभव नहीं है. जमुई मुख्यालय अंतर्गत वार्ड नंबर 30 में नाले का पानी सीधे खेतों में जाता है. पानी की निकासी के लिए आज तक शासन-प्रशासन की ओर से कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई.

क्या बोले जिला क़ृषि पदाधिकारी? : जमुई जिला क़ृषि पदाधिकारी हरि मोहन मिश्रा ने बताया कि, पूरे जमुई जिला की बात करें तो अबतक 30-35 प्रतिशत ही धान की बुआई हो पाई है, उसमें भी मात्र 10 प्रतिशत बारिश के पानी से और 20-25 प्रतिशत धान की बुआई नाले के पानी और बोरिंग इत्यादि के पानी से, जहां जो सुविधा है, किसान को उससे धान की बुआई हो पाई है.
''जब बारिश ही माकूल नहीं होगी तो जमीन में पानी का लेयर नहीं उठेगा. आहर, पोखर, तालाब, नहर जो जोरिया और डैम (जमुई के दक्षिण इलाके में गरही डैम है, उत्तर इलाके में कुकुरझप डैम है, पश्चिम इलाके में कुण्डधाट जलाशय का निर्माण हो रहा है) में पानी जमा होगा जिसका फायदा कम बारिश के समय किसानों को मिलेगा.'' - हरि मोहन मिश्रा, जमुई जिला क़ृषि पदाधिकारी
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