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'सूखे खेत में भी लहलहाएगी धान की फसल'.. बस अपनाएं ये क्रांतिकारी तकनीक, उपज से घर हो जाएगा फुल

कम बारिश के चलते धान की फसल लगाना आसान नहीं रहा, ऐसे में जीरो टिलेज विधि एक अच्छा विकल्प बनकर उभरा है. रिपोर्ट- रत्नेश कुमार

अलनीनो की चुनौती के बीच किसानों के लिए नई राह
अलनीनो की चुनौती के बीच किसानों के लिए नई राह (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : July 5, 2026 at 8:54 PM IST

6 Min Read
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गया : देश में बदलते मौसम और अलनीनो की आशंका और लगातार कम होती बारिश ने धान की खेती के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. ऐसे समय में आधुनिक कृषि तकनीक 'जीरो टिलेज' किसानों के लिए बड़ी उम्मीद बनकर उभरी है. इस विधि में न धान की मोरी (बिचड़ा) तैयार करना पड़ता है और न ही पानी से लबालब खेत की जरूरत होती है. कम पानी, कम लागत और कम समय में धान की सफल खेती संभव होने के कारण बिहार के कई किसान अब इस तकनीक को तेजी से अपना रहे हैं.

अलनीनो की चुनौती के बीच किसानों के लिए नई राह : मौसम वैज्ञानिक लगातार अलनीनो और सामान्य से कम बारिश की आशंका जता रहे हैं. ऐसे में धान जैसी अधिक पानी वाली फसल किसानों की चिंता बढ़ा रही है. लेकिन जीरो टिलेज तकनीक इस चुनौती का व्यवहारिक समाधान बन रही है. सूखे खेत में भी धान की बुआई संभव होने से किसानों की बारिश पर निर्भरता काफी कम हो जाती है.

देखें गया से रिपोर्ट- (ETV Bharat)

क्या है जीरो टिलेज खेती? : जीरो टिलेज ऐसी आधुनिक कृषि तकनीक है, जिसमें एक विशेष मशीन की मदद से खेत की जुताई और धान की बुआई एक साथ होती है. मशीन के एक बॉक्स में बीज और दूसरे में खाद डाली जाती है, जो तय दूरी पर एक साथ जमीन में पहुंचते हैं. इस विधि में धान की मोरी तैयार करने, रोपाई करने और खेत में लगातार पानी भरकर रखने की जरूरत नहीं होती. इसे धान की सीधी बुआई यानी 'डायरेक्ट सीडिंग' भी कहा जाता है.

सूखे खेत में भी संभव है धान की खेती : जीरो टिलेज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसान सूखे खेत में भी धान की बुआई कर सकते हैं. खेत में केवल एक बार हल-बैल या ट्रैक्टर से सामान्य जुताई करने के बाद जीरो टिलेज मशीन चलाकर जुताई और बुआई एक साथ पूरी हो जाती है. बाद में केवल नमी बनाए रखने के लिए जरूरत के अनुसार सिंचाई करनी होती है.

जीरो टिलेज विधि से खेती
जीरो टिलेज विधि से खेती (ETV Bharat)

''इस मशीन से आठ नौ लाइन की धान की फसल की सीधी बुआई हो जाती है. सूखे खेत में भी जीरो टिलेज विधि से खेती की जाती है. पानी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है. मोरी की जरूरत नहीं होती है. सूखे खेत में भी जीरो टिलेज विधि से धान की खेती लगाई जा सकती है. यदि उसके बाद बारिश हुआ, तो ठीक, नहीं तो कोई चिंता की बात नहीं है, सिर्फ नमी के लायक पानी का पटवन कर दिया जाता है.''- आशीष कुमार, किसान

40 प्रतिशत तक कम पानी और आधी लागत : विशेषज्ञों और किसानों के मुताबिक इस तकनीक से सामान्य खेती की तुलना में करीब 30 से 40 प्रतिशत कम पानी की जरूरत पड़ती है. वहीं प्रति एकड़ खेती की लागत भी लगभग 3 से 5 हजार रुपये तक सीमित रहती है, जबकि पारंपरिक धान की खेती में यही खर्च करीब 10 हजार रुपये तक पहुंच जाता है. मजदूरों की आवश्यकता भी काफी कम हो जाती है.

जीरो टिलेज विधि से खेती
जीरो टिलेज विधि से खेती (ETV Bharat)

मोरी और रोपाई के झंझट से मिलेगी राहत : पारंपरिक धान की खेती में पहले बिचड़ा तैयार करना, फिर खेत में पानी भरना और उसके बाद रोपाई करना पड़ता है. इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय, श्रम और खर्च लगता है. जीरो टिलेज तकनीक इन सभी चरणों को खत्म कर सीधे खेत में धान की बुआई कर देती है. इससे किसानों का समय भी बचता है और मेहनत भी कम होती है.

गया के किसान आशीष बने मिसाल : गया जिले के टिकारी प्रखंड के गुलरियाचक गांव के उन्नत किसान आशीष कुमार सिंह पिछले दो वर्षों से जीरो टिलेज तकनीक से धान की खेती कर रहे हैं. इस वर्ष भी उन्होंने करीब 40 एकड़ में इसी तकनीक से धान की बुआई की है. उनका कहना है कि इस विधि से खेती करने पर बारिश का इंतजार नहीं करना पड़ता, लागत घटती है और फसल भी बेहतर मिलती है.

जीरो टिलेज विधि से खेती
जीरो टिलेज विधि से खेती (ETV Bharat)

सरकार भी दे रही है तकनीक अपनाने की सलाह : केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही जीरो टिलेज तकनीक को बढ़ावा दे रही हैं. इस मशीन की खरीद पर करीब 40 प्रतिशत तक सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जा रही है. जीरो टिलेज मशीन की शुरुआती कीमत लगभग 25 हजार रुपये से शुरू होती है. कृषि विभाग भी किसानों को प्रशिक्षण देकर इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है.

''इस विधि से 30 से 40% पानी कम खपत होता है. यह क्रांतिकारी और नई टेक्नोलॉजी है. मौसम विभाग भी चेतावनी दे रहा है कि इस बार पानी कम बरसेगा. इससे धान की पैदावार प्रभावित होगी. बिहार में कई उन्नत किसान अब इस विधि को आजमा रहे हैं. 40 एकड़ में धान मेरे द्वारा लगाया जा रहा है. बिहार में भी जीरो टिलेज विधि से खेती होनी शुरू हो गई है.''- आशीष कुमार, टिकारी क्षेत्र के किसान

जीरो टिलेज से धान की खेती करता किसान
जीरो टिलेज से धान की खेती करता किसान (ETV Bharat)

केंद्रीय मंत्री शिवराज भी हुए थे प्रभावित : हाल ही में बिहार दौरे के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जीरो टिलेज तकनीक से हो रही धान की खेती का निरीक्षण किया था. उन्होंने इस आधुनिक तकनीक की सराहना करते हुए इसे जल संकट और बदलते मौसम के दौर में किसानों के लिए उपयोगी विकल्प बताया था.

भविष्य की खेती की दिशा बदल सकती है यह तकनीक : जलवायु परिवर्तन, गिरते भूजल स्तर और अनिश्चित मानसून को देखते हुए विशेषज्ञ जीरो टिलेज तकनीक को भविष्य की खेती का मजबूत विकल्प मान रहे हैं. कम पानी, कम लागत, कम समय और बेहतर उत्पादन जैसी खूबियों के कारण आने वाले वर्षों में यह तकनीक धान ही नहीं, बल्कि गेहूं समेत कई अन्य फसलों की खेती में भी किसानों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है.

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