'हमें दिनभर थाना में बंद रखा उधर बेटे का मर्डर..' भरत तिवारी एनकाउंटर पर बोले पिता- 'न्याय के लिए महापंचायत होगी'
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिलौटी महापंचायत की तैयारी, पांच पुलिसकर्मी निलंबित, दो एफआईआर दर्ज और मानवाधिकार आयोग ने भी थमाया नोटिस. पढ़ें खबर-

Published : June 22, 2026 at 9:00 PM IST
पटना/भोजपुर: भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में न्याय की मांग तेज होती जा रही है. एक ओर बिलौटी गांव में 24 जून को महापंचायत सम्मेलन बुलाने की तैयारी चल रही है, वहीं बिहार पुलिस ने जांच के बाद पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं. दूसरी ओर बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव, डीजीपी और भोजपुर एसपी से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
महापंचायत की तैयारी जोर शोर से जारी : शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 24 जून को प्रस्तावित महापंचायत सम्मेलन की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं. आयोजन समिति का दावा है कि सम्मेलन में बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान समेत देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे. गांव की ओर से करीब एक लाख लोगों के आने की व्यवस्था किए जाने की बात कही जा रही है.
सरकार पर पीड़ित परिवार की अनदेखी का आरोप : स्थानीय निवासी पंकज त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि जिस मामले में बिहार सरकार को गंभीरता से पहल करनी चाहिए थी, उसमें अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है. उनका कहना है कि सरकार के किसी अधिकारी या कर्मचारी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात तक नहीं की है. इसी के बाद ग्रामीणों और समर्थकों ने महापंचायत के माध्यम से आगे की रणनीति तय करने का निर्णय लिया है.
'मुझे थाने में बंद करके मेरे बेटे का मर्डर' : वहीं भरत भूषण तिवारी के पिता भोजपुर पुलिस पर संगीन आरोप शुरू से ही लगाते आ रहे हैं. उन्होंने फिर कहा कि ''जिस दिन एनकाउंटर हुआ उन्हें पुलिस ने दिनभर थाने में बंद करके रखा और दूसरी तरफ उनके बेटे का मर्डर कर दिया. ये अपराध है. अपराध की सजा कानून जरूर देगा. लोग मेरे दिवंगत बेटे के साथ हैं. मुझे न्याय मिलकर रहेगा.''
जवईनिया के विस्थापितों को न्याय दिलाने पर चर्चा : उन्होंने कहा कि सम्मेलन में न्याय की लड़ाई को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने और जवईनिया गांव से विस्थापित होकर रह रहे लोगों को न्याय दिलाने के उपायों पर चर्चा होगी. आयोजकों के अनुसार महापंचायत किसी जाति, धर्म या समुदाय विशेष तक सीमित नहीं है. इसमें सभी वर्गों के लोगों का स्वागत है, जो मामले में कथित अन्याय के खिलाफ न्याय की मांग का समर्थन करते हैं.

राजनीतिक प्रतिनिधि आ सकेंगे, झंडे बैनर पर रोक : आयोजन समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं, लेकिन सम्मेलन स्थल पर किसी राजनीतिक दल का झंडा या बैनर प्रदर्शित नहीं किया जाएगा. यह आयोजन गांव के लोगों, पीड़ित परिवार के परिजनों और देशभर के शुभचिंतकों के सहयोग से किया जा रहा है.
जांच के बाद पांच पुलिसकर्मी निलंबित : इधर, भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच के बाद बिहार पुलिस ने बड़ी विभागीय कार्रवाई की है. लॉ एंड ऑर्डर एडीजी सुधांशु कुमार ने बताया कि जांच में पुलिस अधिकारियों की गंभीर लापरवाही सामने आई है. इसके आधार पर एक थाना प्रभारी, दो सब इंस्पेक्टर, एक एएसआई और एक कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.

अभियुक्त की निगरानी में चूक का दावा : एडीजी के अनुसार, 16 जून को अभियुक्त की निगरानी और प्रबंधन में संबंधित पुलिसकर्मियों ने अपेक्षित सतर्कता नहीं बरती. सुरक्षा व्यवस्था में कई स्तरों पर चूक पाई गई, जिसके बाद विभागीय कार्रवाई की गई. मामले में दो अलग अलग प्राथमिकी भी दर्ज की गई हैं, ताकि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष और व्यापक जांच हो सके.
''जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि घटनाक्रम के दौरान किस स्तर पर चूक हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है. जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे भी कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी. पुलिस मुख्यालय पूरे मामले की निगरानी कर रहा है.''- सुधांशु कुमार, एडीजी, लॉ एंड ऑर्डर, बिहार

मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान : वहीं, भोजपुर जिले में हुए कथित एनकाउंटर मामले में बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया है. मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता एस.के. झा की याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग ने बिहार के मुख्य सचिव, डीजीपी और भोजपुर एसपी को नोटिस जारी किया है. आयोग ने चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
13 जुलाई को होगी मामले की अगली समीक्षा : आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनंत मनोहर बदर ने मामले की अगली समीक्षा के लिए 13 जुलाई 2026 की तिथि निर्धारित की है. बताया जा रहा है कि बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की मौत पुलिस एनकाउंटर में हुई थी.
रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच की मांग : अधिवक्ता एस.के. झा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली और बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग, पटना में अलग अलग याचिकाएं दायर की हैं. याचिका में एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने, मामले की जांच रिटायर्ड जज की निगरानी में कराने, दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की गई है.

महापंचायत और आयोग की सुनवाई पर टिकी नजर : फिलहाल महापंचायत की तैयारी, पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद भरत तिवारी एनकाउंटर मामला और अधिक गंभीर हो गया है. अब सबकी नजर 24 जून की महापंचायत और 13 जुलाई को मानवाधिकार आयोग की अगली सुनवाई पर टिकी है.
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