Bharat Tiwari Encounter: भरत तिवारी की कहानी.. जिसके एनकाउंटर पर सवालों के घेरे में पुलिस और सरकार
बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर में क्या सम्राट चौधरी की सरकार फंस गई है? क्योंकि सहयोगी भी सवाल उठा रहे हैं. रंजीत की रिपोर्ट..

Published : June 22, 2026 at 8:31 PM IST
पटना: सम्राट चौधरी ने 15 अप्रैल 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. सब कुछ ठीक चला रहा था लेकिन ठीक 2 महीने बाद 17 जून को भोजपुर में एक एनकाउंटर हुआ और उसके बाद तस्वीर बदल गई. शाहपुर पुलिस ने एनकाउंटर के नाम पर भरत भूषण तिवारी को मार गिराया. इसको लेकर न केवल आम जनता और विपक्ष बल्कि, अपने भी सवाल उठाने लगे हैं. राजनीतिक जानकार भी कहते हैं कि सम्राट सरकार बुरी तरह घिरती नजर आ रही है.
एनकाउंटर पर घिरी सरकार: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास ही गृह विभाग का भी जिम्मा है. ऐसे में कानून-व्यवस्था और एनकाउंटर के लिए विपक्ष सीधे तौर पर उनको ही जिम्मेदार ठहराता है. भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद बीजेपी नेताओं की तल्ख टिप्पणी ने सरकार को असहज कर दिया है. घटना को लेकर केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे, राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिंन्हा, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी और मंत्री विजय सिन्हा ने भी इस कथित एनकाउंटर की निंदा की है.
सत्ता पक्ष भी कार्रवाई से नाराज: विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष भी आखिर क्यों पुलिसिया एक्शन पर सवाल उठा रहा है? इसे समझने के लिए भरत तिवारी एनकाउंटर पर विस्तार से बात करने की जरूरत है. ऐसा नहीं है कि पिछले कुछ महीनों के एनकाउंटर पर प्रश्नचिह्न नहीं उठ रहे थे. तेजस्वी यादव तो जाति विशेष की मुठभेड़ का आरोप लगा चुके हैं लेकिन बवाल भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर के बाद ही शुरू हुआ है.
भरत तिवारी एनकाउंटर की इनसाइड स्टोरी: भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बेलौटी गांव के रहने वाले युवक भरत भूषण तिवारी को एनकाउंटर के नाम पर 17 जून को पुलिस ने मार दिया था. उसकी पहचान गांव और आसपास में एक ऐसे शख्स की रही है, जो लगातार स्थानीय मुद्दों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता था.

ज्वाइनया क्षेत्र में गंगा कटाव के कारण जो लोग विस्थापित हो रहे थे, उनकी पुनर्विस्थापन के लिए भी वह काफी सक्रियता से काम कर रहा था. युवाओं में उसकी अच्छी खासी पकड़ भी थी. खुद को क्रांतिकारी बताने वाले भरत हथियार भी रखता था. इस वजह से भी उसकी पुलिस के साथ अदावत होनी शुरू हो गई.
15 जून को फेसबुक पर पोस्ट: 17 जून के एनकाउंटर से दो दिन पहले ही पुलिस के साथ उसकी ठन गई. हुआ ये कि 15 जून को भरत तिवारी ने फेसबुक पर एक पोस्ट किया. जिसमें उसके कहा कि देश में 'क्रांतिकारी युद्ध' की जरूरत है. इस दौरान आरोप है कि उसने जगदीशपुर एसडीएम को जान से मारने की भी धमकी दी. जिस वजह से पुलिस उसके घर पहुंची लेकिन वह नहीं मिला.

16 जून को हथियार के साथ तस्वीर: अगले रोज यानी 16 जून को हथियार के साथ भरत की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई. जिसको लेकर पुलिस उसके घर पहुंची. अधिकारियों से बातचीत के दौरान उसने फेसबुक लाइव शुरू कर दिया. जिसमें उसने पुलिस-प्रशासन पर एनकाउंटर में उसे मारने की कोशिश का आरोप लगाया. हालांकि बाद में पुलिस ने भरत को 'मानसिक रूप से विक्षिप्त' करार दिया.
17 जून को एनकाउंटर: 17 जून की सुबह-सुबह भरत फेसबुक पर लाइव आया और अपनी तुलना स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह से करते हुए क्रांति की बात दोहरायी. इस दौरान उसने पुलिसवालों को अपने अंदाज में धमकी भी दी. बाद में पुलिस को ये सूचना मिली की भरत तिवारी के पास अवैध हथियार है और वह किसी घटना को अंजाम दे सकता है. जिसके बाद पुलिस कार्रवाई करने के लिए बिलौटी गांव पहुंची.
दिनांक-17.06.2026 को पुलिस द्वारा की कार्रवाई की अद्यतन स्थिति :-#HainTaiyaarHum #BiharPolice @bihar_police @IPRDBihar pic.twitter.com/nOyzWoxyNV
— Bhojpur Police (@bhojpur_police) June 17, 2026
वहीं, जब पुलिस की टीम गांव पहुंची तो उसकी भरत भूषण तिवारी से ठन गई. पुलिस का दावा है कि भरत ने उसकी टीम पर हमला कर दिया. बातचीत कर स्थिति को संभालने की कोशिश की गई लेकिन वह नहीं माना और फायरिंग करता रहा. ऐसे में आत्मरक्षा के लिए पुलिस को भी गोली चलानी पड़ी. गंभीर हालत में उसे पहले आरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, फिर वहां से पीएमसीएच रेफर कर दिया गया. जहां उसकी मौत हो गई.
एनकाउंटर पर सवाल क्यों?: पुलिस भले ही इसे आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई बता रही हो लेकिन परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि भरत ने अपना हथियार फेंक दिया था. इसके बावजूद पुलिस ने उसे कई गोली मारी. जिस वजह से उसकी मौत हुई. पिता उसकी मौत को हत्या बता रहे हैं.

वीडियो से खुली पुलिस की पोल: एनकाउंटर से जुड़े कई वीडियो सामने आए हैं, जिसमें पुलिस के दावों से इतर तस्वीर नजर आ रही है. वीडियो में साफ दिख रहा है कि पुलिस से बातचीत के बाद भरत तिवारी ने अपना पिस्टल पुलिस की तरफ फेंक दिया है. ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जब युवक ने हथियार डाल दिया था, फिर गोलियां क्यों मारी गई?
शिक्षा मंत्री ने उठाए सवाल: बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने एनकाउंटर के कुछ ही देर बाद तल्ख लहजे में बयान दिया. उन्होंने कहा, 'युवक का व्यवहार और हथियार लहराना गलत था लेकिन पुलिस को पहले उसके आपराधिक इतिहास और पूरे मामले की जांच करनी चाहिए थी.' मंत्री ने इसकी निष्पक्ष जांच की भी मांग कर दी.

विजय सिन्हा ने जतायी नाराजगी: एनकाउंटर की घटना को लेकर पूर्व डिप्टी सीएम और कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने भी नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है. पुलिस की तरफ से लापरवाही हुई है. हमारी सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है.
"प्रशासन के पास स्थिति को संभालने के विकल्प थे लेकिन कहीं न कहीं लापरवाही हुई है. बिहार को अपराध और भ्रष्टाचार से मुक्त करना सरकार का लक्ष्य है, महर किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशानी नहीं होनी चाहिए."- विजय कुमार सिन्हा, मंत्री, बिहार सरकार
केंद्रीय मंत्री ने दी सरकार को दी नसीहत: केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने भी घटना पर चिंता जाहिर की और मृतक के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की. उन्होंने कहा कि घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि दिखाई भी देना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने जांच रिपोर्ट आने तक अंतिम निष्कर्ष से बचने की सलाह दी.

अश्विनी चौबे ने खोला मोर्चा: पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने तो इस मामले को लेकर मोर्चा ही खोल दिया है. उन्होंने घटनास्थल का दौरा किया उच्च स्तरीय जांच की मांग की. साथ ही कहा कि यदि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था तो उसे गोली मारना गलत है. बीजेपी नेता ने पुलिस प्रशासन को 'हत्यारा' तक बता दिया.
"मैंने संकल्प लिया है कि यदि निर्धारित समयावधि के भीतर पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता है, तो मैं उनके साथ मजबूती से खड़ा रहूंगा और न्याय की इस लड़ाई को हर स्तर पर लड़ूंगा. स्वर्गीय भरत तिवारी को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब उनके परिवार को न्याय मिले और दोषियों को कानून के कठघरे में खड़ा किया जाए."- अश्विनी चौबे, पूर्व केंद्रीय मंत्री

ऋतुराज सिन्हा ने गुस्से को बताया जायज: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिंन्हा ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि रक्षक ही भक्षक न बन जाए. उन्होंने शाहाबाद क्षेत्र में लोगों के गुस्से को जायज बताया और पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की.
"भरत भूषण तिवारी की मौत दुखद और चिंताजनक है. प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि एनकाउंटर से जुड़े दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया होगा. सच सामने आने के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है."- ऋतुराज सिन्हा, राष्ट्रीय मंत्री, बीजेपी
विरोध में चिराग पासवान भी: एलजेपीआर चीफ और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी एनकाउंटर की घटना की तीखी भर्त्सना की है. उन्होंने कहा, 'सभ्य समाज में ऐसी घटना की कोई जगह नहीं है. एनकाउंटर किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता.'
जीतनराम मांझी ने एनकाउंटर को सही बताया: पूरे घटनाक्रम में दो ही ऐसे नेता हैं, जिनका समर्थन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को मिला है. केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी और बिहार सरकार में मंत्री रामकृपाल यादव ने इसे सही ठहराया है. मांझी ने कहा कि कानून-व्यवस्था के लिए यह जरूरी था. वहीं रामकृपाल यादव ने कहा, 'जो पुलिस को चुनौती देगा, उसे कानून के मुताबिक जवाब मिलेगा.'
अवैध पिस्टल दिखाकर पुलिस या कहें पूरे सिस्टम को चुनौती दोगे तो सही और अब जब पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ठोक दिया तो गलत।
— Jitan Ram Manjhi (@jitanrmanjhi) June 18, 2026
ई ना चलतो …
करारा जवाब मिलेगा…
Well Done Bhojpur Police…@samrat4bjp @bihar_police @bhojpur_police
"कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ती है. अवैध पिस्टल दिखाकर पुलिस या कहें पूरे सिस्टम को चुनौती दोगे तो सही और अब जब पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ठोक दिया तो गलत. ई ना चलतो, करारा जवाब मिलेगा."- जीतनराम मांझी, केंद्रीय मंत्री सह संरक्षक, हम पार्टी
हालांकि आम लोगों के बढ़ते दबाव और विरोध के बाद बिहार सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश से जांच कराने का ऐलान किया है. इस मामले में एक थानेदार समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया गया है लेकिन इसके बावजूद आम लोगों का आक्रोश थमता नहीं दिख रही है.
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में दिनांक 17.06.2026 को हुई पुलिस मुठभेड़ की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच हेतु उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया गया है। न्यायिक जांच का उद्देश्य घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्षता एवं…
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) June 20, 2026
क्या फंस गए हैं सम्राट चौधरी?: मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी की प्राथमिकताओं में भ्रष्टाचार और अपराध नियंत्रण शामिल है. कहा जाता है कि वह बिहार में 'योगी मॉडल' लाने की कोशिश कर रहे हैं. कुख्यात अपराधियों को ठिकाना लगाया जा रहा है. इसीलिए बिहार पुलिस को पूरी छूट दी गई है लेकिन भरत तिवारी एनकाउंटर ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है. गठबंधन के नेता और सहयोगी भी सवाल उठाने लगे हैं. हालांकि बीजेपी प्रवक्ता कहते हैं कि कहीं कोई दबाव नहीं है.
"आरा की घटना दुखद है. सरकार ने न्यायिक जांच की घोषणा भी कर दी है. जहां तक सवाल पार्टी नेताओं के बयान का है तो नेता अपनी अपनी बात रख रहे हैं और सरकार को रास्ता भी दिख रहे हैं. पार्टी के अंदर कोई गुट नहीं है. हमारे नेता सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सभी काम कर रहे हैं. बयान के जरिए नेताओं ने सरकार को सुझाव दिया है."- भूपेंद्र यादव, प्रवक्ता, बीजेपी
क्या कहते हैं जानकार?: वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक कौशलेंद्र प्रियदर्शी कहते हैं कि एनकाउंटर की घटना वाकई दुखद है. पूरे घटनाक्रम पर भाजपा के अंदर अलग तरह की सियासत देखने को मिली है. पार्टी के कई बड़े नेताओं ने सरकार के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया. बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर कुछ नेताओं के अंदर नाराजगी पहले से ही थी लेकिन जब मौका मिला तो सभी नेता मुखर हो गए.

सवर्ण सियासत भी वजह: कौशलेंद्र प्रियदर्शी कहते हैं कि एनकाउंटर सम्राट चौधरी के लिए गले की फांस बन गया है. भरत तिवारी चूकि सवर्ण समाज से आते हैं तो ऐसे में सियासत भी उसी हिसाब से हो रही है. वे कहते हैं कि अगर चिराग पासवान को छोड़ दिया जाए तो एनकाउंटर के बहाने सवाल उठाने वालों में ज्यादातर नेता सवर्ण समाज से आते हैं.
"सम्राट चौधरी को लेकर भाजपा के अंदर नेताओं की नाराजगी तो पहले से ही थी. जाति देखकर पार्टी ने उनको मुख्यमंत्री बनाया लेकिन भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर ने नाराज नेताओं को मौका दे दिया है. इसमें कोई शक नहीं कि कई नेता चाहते हैं कि सम्राट चौधरी को अलग-थलग कर दिया जाए."- कौशलेंद्र प्रियदर्शी, वरिष्ठ पत्रकार
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