भरत तिवारी एनकाउंटर पर HC में PIL, याचिका में दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और परिवार को सुरक्षा की मांग
भोजपुर के भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में निष्पक्ष जांच, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार की सुरक्षा को लेकर PIL दायर हुई.

Published : June 22, 2026 at 2:13 PM IST
पटना : बिहार की पटना हाईकोर्ट में भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामले को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है. अधिवक्ता मुकेश कुमार ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है.
त्वरित सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश से गुहार : अधिवक्ता ने जनहित याचिका पर शीघ्र सुनवाई के लिए पटना हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश मीनाक्षी मदन राय की खंडपीठ के समक्ष आग्रह किया है. याचिका में घटना की स्वतंत्र जांच कराने की मांग रखी गई है.

वीडियो को लेकर उठाए सवाल : याचिकाकर्ता के अनुसार, घटना से पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें भरत भूषण तिवारी के हाथ में कथित तौर पर पिस्तौल दिखाई देने की बात कही गई. अधिवक्ता ने सवाल उठाया कि यदि युवक के पास हथियार था, तो उस समय गिरफ्तारी या हथियार जब्ती की कार्रवाई क्यों नहीं हुई.
परिजनों ने एनकाउंटर को बताया फर्जी : भरत भूषण तिवारी के परिजनों का आरोप है कि यह फर्जी एनकाउंटर था. उनका कहना है कि घटना के समय युवक के पास कोई हथियार नहीं था. उनके बेटे ने सरेंडर कर दिया था. परिजनों के विरोध के बाद पुलिस ने मृतक के पिता, भाई और कुछ स्थानीय लोगों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की थी.

पुलिस का आत्मरक्षा में गोली चलाने का दावा : वहीं, पुलिस का कहना है कि भरत भूषण तिवारी की ओर से कथित तौर पर 10 से 12 राउंड फायरिंग की गई थी. पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी गोलीबारी करने की बात कही, जिसमें युवक की मौत हो गई.
17 जून को हुई थी घटना : यह घटना 17 जून 2026 को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौती गांव में हुई थी. पुलिस कार्रवाई के दौरान भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद से मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठ रहे हैं.

चार पुलिसकर्मी और शाहपुर SHO निलंबित : घटना के बाद प्रारंभिक कार्रवाई के तौर पर चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है. शाहपुर थाना के SHO को भी निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है.
न्यायिक जांच की घोषणा, अधिसूचना का इंतजार : राज्य सरकार ने मामले की जांच किसी सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश से कराने की बात कही है. याचिकाकर्ता का कहना है कि शनिवार को न्यायिक जांच की घोषणा के बावजूद अब तक औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है.
पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने की मांग : जनहित याचिका में भरत भूषण तिवारी के परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है. अधिवक्ता मुकेश कुमार ने कहा कि निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई से ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी.
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