भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर; मांझी बोले- पुलिस को मार देता तो ठीक रहता?, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
भरत तिवारी एनकाउंटर पर पर जीतन राम मांझी ने किया पुलिस का बचाव. सीबीआई जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका. पढ़ें

Published : June 22, 2026 at 11:55 AM IST
|Updated : June 22, 2026 at 4:45 PM IST
पटना: बिहार के भोजपुर मे हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट मे याचिका दाखिल कर सीबीआई जांच की मांग की है. वहीं इस मामले में केन्द्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सही ठहराया है, उन्होंने पूछा कि अगर वो किसी पुलिसवाले को मार देता तो क्या वो ठीक रहता?.
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर, SC में जनहित याचिका: सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अगुवाई में स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग की गई है. भरत भूषण तिवारी की मौत को कथित 'फर्जी एनकाउंटर' बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील विषाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है.
एनकाउंटर की CBI जांच की मांग: याचिका में मांग की गई है कि एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए. इसके अलावा, कानून के शासन की रक्षा के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने का भी अनुरोध किया गया है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज द्वारा की जाए. याचिकाकर्ता का आरोप है कि भारत भूषण तिवारी की मौत एक हत्या का मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है.
पुलिस को मार देता तो ठीक रहता?- मांझी: वहीं केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को पूरी तरह जायज ठहराया है और कहा कि इस एनकाउंटर पर सवाल उठाना गलत है. केंद्रीय मंत्री ने पूछा कि अगर वह व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार था, तो उसके पास हथियार कहां से आया?.
''अगर वहां दो पुलिसकर्मी मारे जाते तो क्या वो ठीक होता? पुलिस मरे तो ठीक, और पुलिस एनकाउंटर करे तो खराब?. अगर कोई पुलिस पर पिस्टल तानेगा, तो पुलिस एनकाउंटर करेगी ही और इसमें कुछ भी गलत नहीं है.'' - जीतन राम मांझी, केंद्रीय मंत्री
'भरत समाज के लिए संघर्ष..' - पवन सिंह: दूसरी तरफ बीजेपी के विधान पार्षद और भोजपुरी सिनेमा स्टार पवन सिंह ने इस घटना पर संवेदना व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि ग्राम बेलौटी, भोजपुर निवासी स्वर्गीय भरत भूषण तिवारी केवल इतना चाहते थे कि जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी जनता की समस्याओं का समाधान करें तथा गरीब, वंचित एवं बाढ़ पीड़ित परिवारों को उनके अधिकारों से वंचित न रखा जाए. भरत समाज के लिए संघर्ष करने वाले एक जागरूक एवं संवेदनशील व्यक्ति थे.
''आज उनकी मृत्यु की घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है. इस घटना को लेकर अनेक प्रश्न उठ रहे हैं. यदि विभिन्न माध्यमों से प्रसारित जानकारी एवं वीडियो में दिखाई गई परिस्थितियां सही हैं तो यह आवश्यक है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं न्यायसंगत जांच कराई जाए, ताकि सत्य जनता के सामने आ सके.'' - पवन सिंह, बीजेपी के विधान पार्षद
एनकाउंटर केस की पूरी टाइमलाइन: 15 जून को बिहार के भोजपुर जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें भरत भूषण तिवारी हाथ में पिस्टल लेकर पुलिस प्रशासन को चुनौती देता हुआ नजर आया. 17 जून को जिले के शाहपुर थाना प्रभारी जांच के लिए बिलौटी गांव पहुंचे तो भरत तिवारी के हाथ में पिस्टल थी और वो सरकार और प्रशासन की नाकामियों से नाराज दिखा.

भरत तिवारी का सरेंडर, फिर एनकाउंटर: इस दौरान थाना प्रभारी राजेशा मालाकर और भरत भूषण तिवारी में काफी बातचीत हुई. 18 जून को पुलिस और एसटीएफ की टीम ने भरत भूषण तिवारी के घर को चारो तरफ से घेर लिया. इस बीच भरत तिवारी फेसबुक लाइव कर रहा था, जिसमें देखा गया कि उसने पिस्टल फेंक दिया था और सरेंडर कर दिया.

एनकाउंटर पर सवाल, सरेंडर फिर गोली क्यों मारी?: स्थानीय लोगों के मुताबिक, सरेंडर करने के बाद उसे गोली मारी गई, उसे अस्पताल पहुंचाया गया. लेकिन पटना में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. 19 जून में ग्रामीणों ने एनएच पर शव रखकर हंगामा किया. लोगों की पुलिस से नोकझोंक भी हुई. इस दौरान पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा. इसके बाद से एनकाउंटर पर सवाल उठ रहे है, नेताओं का बिलौटी गांव पहुंचने के सिलसिला जारी है.

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