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जयपुर में बेशकीमती पत्थरों में बसती है 'आस्था', तराशी जा रही देवी-देवताओं की प्रतिमाएं, वास्तु और ज्योतिष ने बढ़ाई मांग

जयपुर में बेशकीमती और सेमी प्रीशियस पत्थरों से देवी-देवताओं सहित कई तरह की कलाकृतियां बनाई जाती हैं. पढ़िए फिरोज सैफी की रिपोर्ट....

बेशकीमती पत्थरों में बसती है आस्था
बेशकीमती पत्थरों में बसती है आस्था (ETV Bharat GFX)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : July 30, 2026 at 8:54 PM IST

6 Min Read
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जयपुर : राजधानी जयपुर केवल गुलाबी नगरी के तौर पर ही नहीं बल्कि जवाहरात नगरी के तौर पर भी दुनिया भर में अपनी खास पहचान रखता है. यहां से बेशकीमती और सेमी प्रीशियस पत्थरों का बड़े पैमाने पर आयात निर्यात होता है. आमतौर पर इन पत्थरों से बने आभूषणों की चर्चा तो होती रहती है, लेकिन जयपुर में इन्हीं कीमती पत्थरों से देवी देवताओं की अद्भुत प्रतिमाएं भी तैयार की जाती हैं. ये अपनी कलात्मकता, दुर्लभता और आध्यात्मिक महत्व के कारण देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी खास पहचान बना चुकी है.

सेमी प्रीशियस पत्थरों में रोज क्वार्ट्ज, लेपिस, मरगज, क्रिस्टल टाइगर आई, फिरोजा, कटेला जैसे पत्थरों से भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, भगवान महावीर, भगवान पार्श्वनाथ, भगवान बुद्ध, भगवान विष्णु, शिवलिंग, श्री यंत्र सहित अन्य धार्मिक प्रतिमाएं बनाई जाती हैं. इसके अलावा क्रिस्टल से बनी बॉल, कमल, कछुए, शिवलिंग जैसे सजावटी और वास्तु संबंधी कलाकृतियां भी यहां लोगों की पहली पसंद बन चुकी है. जयपुर के सांगानेर कस्बे में आज भी कुछ परिवार इस दुर्लभ कला को जीवित रखे हुए हैं, यहां इन बेशकीमती पत्थरों को तराशकर देवी देवताओं के प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं.

जयपुर के कारीगर से खास बातचीत (ETV Bharat Jaipur)

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वास्तु और ज्योतिष ने बढ़ाई मांग : कारीगरों का कहना है कि आजकल लोगों का रुझान वास्तु और ज्योतिष की और बढ़ा है. कई वास्तु विशेषज्ञ और ज्योतिष आचार्य घरों में सकारात्मक ऊर्जा और दोष निवारण के लिए क्रिस्टल, लेपिस, टाइगर आई, मरकज और रोज क्वार्ट्ज जैसे पत्थरों से बनी देवी देवताओं के प्रतिमा रखने की सलाह देते हैं. यही वजह है कि इन मूर्तियों की मांग में लगातार इजाफा हो रहा है.

कैसे बनती हैं प्रतिमाएं
कैसे बनती हैं प्रतिमाएं (ETV Bharat GFX)

वजन के हिसाब से तय होती है कीमत : बेशकीमती पत्थरों से बनी इन प्रतिमाओं की कीमत सामान्य संगमरमर की मूर्तियों की तुलना में कई गुना अधिक होती है. कारण यह है कि सेमी प्रीशियस पत्थरों का मूल्य उनके वजन के आधार पर तय किया जाता है. इनका वजन कैरेट में मापा जाता है और उसके अनुसार इनकी कीमत निर्धारित होती है. यह वजह है कि यह प्रतिमाएं साधारण संगमरमर मूर्तियों से 10 गुना तक महंगी होती हैं.

बड़े मरगज पत्थरों से तैयार तीन पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमाएं
बड़े मरगज पत्थरों से तैयार तीन पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमाएं (ETV Bharat Jaipur)

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इन प्रतिमाओं की सबसे अधिक मांग : सांगानेर कस्बे में पूरणमल अजमेर पिछले 50 सालों से बेशकीमती पत्थरों से देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के साथ ही अन्य कलात्मक आकृतियां तैयार कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि क्रिस्टल से बने शिवलिंग, श्री यंत्र, भगवान गणेश, भगवान पार्श्वनाथ और महावीर स्वामी की प्रतिमाओं की सबसे अधिक मांग रहती है. उनके पास दुर्लभ काले रोज़ क्वार्ट्ज से बने शिवलिंग भी तैयार हैं, जो दुर्लभ पत्थर माना जाता है.

सेमी प्रीशियस पत्थर
सेमी प्रीशियस पत्थर (ETV Bharat GFX)

काम में धैर्य की जरूरत : उनका कहना है कि कई व्यापारी उन्हें विशेष ऑर्डर देकर मूर्तियां बनवाते हैं, जबकि कई बार ग्राहकों के दिए गए सैंपल के आधार पर ही प्रतिमा तैयार की जाती हैं. बेशकीमती पत्थर होने के चलते आम लोग क्रिस्टल से बनी मूर्तियां ज्यादा खरीदते हैं, जबकि संपन्न लोग लेपिस, मरगज, कटेला जैसे पत्थरों से बनी मूर्तियां ज्यादा खरीदते हैं. सेमी प्रीशियस पत्थरों पर मूर्तियां तराशने में काफी समय लगता है. यह काम जितना मुश्किल होता है, उतना धैर्य भी रखना पड़ता है.

क्रिस्टल से तैयार शिवलिंग
क्रिस्टल से तैयार शिवलिंग (ETV Bharat Jaipur)

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प्रतिमाएं तैयार करने में लगता है समय : कई बार जरा सी गलती से पत्थर टूट जाता है. उन्होंने कहा कि सबसे पहले मशीन से पत्थर को काटा जाता है फिर उसकी नक्काशी की जाती है और उसे मूर्त रूप दिया जाता है. उन्होंने बताया कि विशेष मशीनों से इस पर उच्च गुणवत्ता की मंजाई होती है और उसके बाद इस पर पॉलिश की जाती है. एक प्रतिमा तैयार करने में तकरीबन 1 महीने का समय लग जाता है. इस कला में मशीनें और हाथ दोनों ही इस्तेमाल होते हैं. मरगज पत्थर से 5 और 3 किलो वजन की भगवान पार्श्वनाथ की भव्य प्रतिमा तैयार की गई है. बड़े आकार के प्रतिमा की मांग विशेष रूप से जैन समाज और विदेशी ग्राहकों में अधिक रहती है. आम लोग इतने वजन के पत्थर की मूर्तियां नहीं खरीदते हैं.

जवाहरात नगरी जयपुर
जवाहरात नगरी जयपुर (ETV Bharat GFX)

नई पीढ़ी की बेरुखी से कला पर संकट : पूरणमल का कहना है कि इस अनोखी शिल्प कला के सामने सबसे बड़ी चुनौती कारीगरों की घटती संख्या है, क्योंकि सेमी प्रीशियस पत्थरों पर काम करना बेहद कठिन और खर्चीला है. इसकी खरड़ बहुत महंगी आती है, जबकि मेहनत के आगे मजदूरी नहीं मिल पाती है. इसी कारण नई पीढ़ी इस काम से दूर होती जा रही है, पुराने कारीगर भी दूसरे व्यवसाय अपना रहे हैं. वर्तमान में सांगानेर कस्बे में केवल 3 से 4 परिवार ही इस कला को जीवित रखे हुए हैं. उन्होंने कहा कि आर्थिक मंदी के कारण भी पहले की तुलना में बाजार से कम आर्डर मिल रहे हैं.

लेपिस, मरगज और रोज क्वार्ट्ज से तैयार भगवान गणेश की प्रतिमाएं
लेपिस, मरगज और रोज क्वार्ट्ज से तैयार भगवान गणेश की प्रतिमाएं (ETV Bharat Jaipur)

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हर पत्थर का किसी न किसी ग्रह से संबंध : ज्योतिषाचार्य अमित व्यास का कहना है कि प्रीशियस पत्थर हो या सेमी प्रीशियस पत्थर हो, सभी का किसी न किसी ग्रह से संबंध है. लोगों को प्रीशियस और सेमी प्रीशियस पत्थर पहनने की सलाह दी जाती है. टाइगर आई, फिरोजा, कटेला, जरकन और टोपाज में शुक्र और चंद्रमा का समावेश होता है. कछुआ दीर्घायु का प्रतीक होता है, इसीलिए घरों में लोगों को क्रिस्टल से बने कछुए और क्रिस्टल बॉल रखने का सुझाव दिया जाता है.

टाइगर आई पत्थर से तैयार तोते की आकृति की कलाकृति
टाइगर आई पत्थर से तैयार तोते की आकृति की कलाकृति (ETV Bharat Jaipur)

घरों के वास्तु दोष दूर करने और आर्थिक संपन्नता के लिए घरों में क्रिस्टल से बने हाथी, टाइगर आई से बने अन्य चीज रखने को कहा जाता है. बेश कीमती पत्थरों से भी कई प्रतिमाएं बनती है लेकिन मध्यम वर्गीय परिवार उन्हें नहीं खरीद पाते हैं, इसलिए उन्हें क्रिस्टल, फिरोजा, कटेला जैसे पत्थरों से बने प्रतिमाएं और पिरामिड रखने की सलाह दी जाती है. घरों में लोग अब इन पत्थरों से बने देवी देवताओं के प्रतिमाएं, कछुए,क्रिस्टल बॉल पिरामिड रखते हैं.

क्रिस्टल से तैयार जग और गिलास
क्रिस्टल से तैयार जग और गिलास (ETV Bharat Jaipur)