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Special - ईरान से जयपुर तक का सफर: ब्लू पॉटरी की रंगीन विरासत को बचाने की जंग, 9वीं पीढ़ी संभाल रही कला की कमान

आधुनिक दौर में जयपुर की पारंपरिक ब्लू पॉटरी कला कहीं धुंधली होती नजर आ रही है. पढ़िए फिरोज सैफी की रिपोर्ट...

ब्लू पॉटरी कला
ब्लू पॉटरी कला (ETV Bharat GFX)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : May 31, 2026 at 4:23 PM IST

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जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर अपने ऐतिहासिक धरोहरों, महलों और पारंपरिक हस्तशिल्प कलाओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. इन्हीं कलाओं में से एक है ब्लू पॉटरी, जिसने जयपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई है. नीले और आसमानी चमकदार कलाकृतियों के लिए मशहूर यह कला आज भी शहर के कुछ परिवारों की ओर से पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित रखी जा रही है.

हालांकि, आधुनिक दौर में बढ़ती चुनौतियों और नए कारीगरों की कमी ने इस विरासत के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है. जयपुर के प्रसिद्ध ब्लू पॉटरी शिल्पकार और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अनिल दोराया का परिवार 9 पीढ़ियों से इस कला को जीवित रखे हुए है. उनके हाथों में केवल रंग और ब्रश नहीं, बल्कि सदियों पुरानी विरासत की जिम्मेदारी भी है.

ब्लू पॉटरी की कला के बारे में जानें (ETV Bharat Jaipur)

ईरान से जयपुर आई कला : ब्लू पॉटरी की कला मुगल काल में बादशाह अकबर के समय ईरान से भारत आई थी. इसे फारसी कला भी कहते हैं. आमेर के राजा मानसिंह प्रथम इस कला को पहले आमेर लेकर आए थे, लेकिन जब जयपुर की स्थापना हुई तब इस कला को सबसे ज्यादा बढ़ावा दिया गया. जयपुर के कला प्रेमी शासक रहे सवाई राम सिंह द्वितीय ने इस कला को बढ़ावा दिया. ब्लू पॉटरी के शिल्पकार अनिल दौराया का कहना है कि यह कला मुगल काल में जयपुर आई. उन्होंने कुम्हार जाति को इस कला के लिए संरक्षण दिया और प्रोत्साहित किया. धीरे-धीरे यह कला जयपुर की सांस्कृतिक पहचान बन गई, आज दुनिया भर में ब्लू पॉटरी का नाम लिया जाता है तो उसके साथ जयपुर का नाम स्वत: ही जुड़ जाता है.

ब्लू पॉटरी कला और जयपुर का रिश्ता
ब्लू पॉटरी कला और जयपुर का रिश्ता (ETV Bharat GFX)

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पूर्वजों को कला सीखने ईरान भेजा : अनिल दोराया ने बताया कि पूर्वजों से सुना है कि महाराजा राम सिंह द्वितीय को पतंगबाजी का बेहद शौक था. जल महल पर पतंगबाजी का दंगल होता था. महाराज राम सिंह द्वितीय की पतंग कोई भी पतंगबाज नहीं काट पाता था, क्योंकि वो एक विशेष प्रकार से निर्मित मांझे का इस्तेमाल करते थे. अनिल बताते हैं कि उस समय उनके परदादा के दादा ने उनकी पतंग काट दी थी. इसपर महाराजा राम सिंह ने प्रसन्न होकर उनके पूर्वज कालूराम कुम्हार और भुरामल कुम्हार को ब्लू पॉटरी की कला सीखने ईरान भेजा था. तत्कालीन ईरान के महाराजा भी सवाई राम सिंह द्वितीय के मित्र थे. ऐसे में उनके पूर्वजों ने ईरान में इस कला को सीखा और जयपुर में इसकी शुरुआत की. तब से ही यह कला जयपुर में एक प्रमुख हस्तशिल्प कला बन गई.

हाथों से की जाती हैं कलाकृतियां
हाथों से की जाती हैं कलाकृतियां (ETV Bharat Jaipur)

कई पदार्थ से मिलकर तैयार होता है मिश्रण : अनिल दोराया ने बताया कि ब्लू पॉटरी से पहले भी यहां के कुम्हार जाति पॉटरी निर्माण का काम करती थी, लेकिन वो केवल भूरे रंग का इस्तेमाल करते थे. ईरान में ब्लू पॉटरी का काम सीखने के बाद उसमें वनीला और आसमानी रंग का इस्तेमाल होने लगा. ब्लू पॉटरी में सामान्य मिट्टी या चिकनी मिट्टी का उपयोग नहीं किया जाता है. इसमें कई पदार्थ से मिश्रण तैयार होता है. इनमें प्रमुख तौर पर क्वार्ट्ज, ग्लास, मुल्तानी मिट्टी, गोंद कतीरा और रॉक साल्ट का मिश्रण करके इसे हाथ वाली चक्की में बारीक पीसा जाता है. फिर इस मिश्रण की लुगदी बनाकर इसे चपाती की तरह बेलकर विभिन्न सांचों (डाई) में ढाला जाता है. फिर इसे कई दिनों तक धूप में सुखाया जाता है. सूखने के बाद यह बिल्कुल हल्के हो जाते हैं. इनमें ज्यादा वजन नहीं होता है.

ब्लू पॉटरी के बर्तन
ब्लू पॉटरी के बर्तन (ETV Bharat Jaipur)

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हाथ से होती है कलाकृति : उनका कहना है कि ब्लू पॉटरी के बर्तनों पर पूरी कलाकृति हाथ से होती है. इसमें मशीन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. ब्लू पॉटरी के बर्तन पर पहले व्हाइट कोटिंग होती है. फिर इस पर हाथ से ही अलग-अलग कलाकृति और पेंटिंग बनाई जाती है. इसके बाद उस बर्तन पर ग्लेज (पिघले हुए शीशे की परत) चढ़ाई जाती है और फिर भट्टी में पकाया जाता है. भट्टी में पकने के बाद उस पर ब्लू और स्काई ब्लू कलर चढ़ जाता है. यह कलर इतने पक्के होते हैं की कई सदियों तक भी नहीं हटते हैं और कलाकृति भी ऐसे ही रहती है. कलाकृति में फूल पत्तियां, बेल बूटे, पक्षी, राजस्थानी आकृतियों और पारंपरिक डिजाइन हाथों से उकेरे जाते हैं. रंगों के लिए स्टोन कलर का इस्तेमाल किया जाता है. कई कलर पहाड़ी क्षेत्र से भी लाए जाते हैं.

इन चीजों से बनती है ब्लू पॉटरी
इन चीजों से बनती है ब्लू पॉटरी (ETV Bharat Jaipur)

45 देशों के राजदूत भी पहुंचे निर्माण देखने : उन्होंने बताया कि रामगढ़ मोड़ स्थित उनकी ब्लू पॉटरी के कारखाने में ब्लू पॉटरी के बर्तन कैसे तैयार होते हैं, यह देखने के लिए अब तक 45 देशों के राजदूतों के साथ ही कई बड़े उद्योगपति भी आ चुके हैं. साथ ही यहां से ब्लू पॉटरी की खरीदारी भी कर चुके हैं. दोराया ने बताया कि ब्लू पॉटरी में मुख्य तौर पर बाउल, प्लेट कटोरी, परात और गमले तैयार होते हैं. इसके अलावा घरों में लगने वाले टाइल्स भी तैयार किए जाते हैं. सबसे ज्यादा खरीदारी इन्हीं चीजों की होती है.

अलग-अलग कलाकृति और पेंटिंग बनाई गई
अलग-अलग कलाकृति और पेंटिंग बनाई गई (ETV Bharat Jaipur)

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2016 के बाद ज्यादा प्रोत्साहन मिला : उनका कहना है कि 2016 के बाद केंद्र सरकार ने ब्लू पॉटरी हस्तशिकला को काफी बढ़ावा दिया है, लेकिन प्रॉपर मैसेज केंद्र सरकार तक नहीं जा पा रहा है. इसके चलते इस हस्तशील कला पर संकट के बादल छाए हुए हैं. भले ही पूरी दुनिया में इसकी मांग बढ़ रही हो, लेकिन इस कला को आगे बढ़ाने वाले हाथ काम होते जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनकी 9वीं पीढ़ी अपनी विरासत को संजोए हुए है, लेकिन उनका एक ही बेटा है और उसके बाद वो अपनी विरासत को कैसे संभालेंगे? यह बड़ा सवाल है. दुनिया के कई देशों के लोग ब्लू पॉटरी के बारे में समझते हैं, लेकिन जयपुर के लोग ही इसे नहीं समझ पाते हैं. कोई इसे चाइनीज तो कोई खुर्जा पॉटरी समझता है.

ब्लू पॉटरी करने वाले कारीगर
ब्लू पॉटरी करने वाले कारीगर (ETV Bharat Jaipur)

सरकार कला सीखने के लिए प्रोत्साहित करें : उनका कहना है कि कुछ ही परिवार हैं, जिन्होंने इस कला को अभी तक बचाया हुआ है. अगर इस कला को जिंदा रखना है तो सरकार को चाहिए कि वो विद्यार्थियों को यह कला सीखने के लिए प्रोत्साहित करें. अगर सरकार हमें 30-35 विद्यार्थी दे, जो फाइन आर्ट या अन्य कला से जुड़े हों तो हम ऐसे विद्यार्थियों को ब्लू पॉटरी कला में प्रशिक्षण देने के साथ ही ब्लू पॉटरी की शॉप भी खुलवाएंगे. समस्या तब आती है जब उन बच्चों के रहने- खाने की व्यवस्था नहीं हो पाती है, इसीलिए सरकार को चाहिए कि वो ऐसे विद्यार्थियों के रहने और खाने का प्रबंध करें. अगर सरकार इस कला को प्रोत्साहित करती है तो यह कला 80 से 100 साल तक जीवित रह सकती है, वरना 10-20 साल में यह कला पूरी तरह से विलुप्त हो जाएगी.

ब्लू पॉटरी की रंगीन विरासत
ब्लू पॉटरी की रंगीन विरासत (ETV Bharat Jaipur)

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उनका कहना है कि जयपुर की ब्लू पॉटरी एक हस्तशिल्प नहीं बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक आत्मा का हिस्सा है. इसके हर रंग में इतिहास बसता है. हर डिजाइन में परंपरा झलकती है और हर कलाकृति में पीढ़ियों का संघर्ष दिखाई देता है. आज जब पूरी दुनिया इस कला की खूबसूरती की दीवानी है तब जरूरत इस बात की है कि हम भी अपनी इस अनमोल विरासत को बचाने और उसे सहेजने की जिम्मेदारी निभाएं, क्योंकि अगर यह कला खो गई तो केवल कुछ बर्तन नहीं बल्कि इतिहास का एक चमकदार अध्याय भी हमेशा के लिए खो जाएगा.