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100 से ज्यादा देसी लोक वाद्य यंत्रों का अनूठा संग्रह, QR कोड स्कैन कर जान सकेंगे वाद्य यंत्रों की आवाज, निर्माण और इतिहास

जाजम फाउंडेशन के संयोजक विनोद जोशी के मुताबिक इस संग्रह को तैयार करने में 20 से 25 साल का समय लगा है.

देसी लोक वाद्य यंत्रों का अनूठा संग्रह
देसी लोक वाद्य यंत्रों का अनूठा संग्रह (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : September 22, 2026 at 6:56 AM IST

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जयपुर : राजस्थान की लोककला और लोकसंगीत की समृद्ध परंपरा को सहेजने और इसे पर्यटन से जोड़ने की दिशा में जयपुर में एक अनूठी पहल की गई है. झालाना डूंगरी इलाके में लोककला के क्षेत्र में काम करने वाली जाजम फाउंडेशन ने 100 से ज्यादा पारंपरिक लोक वाद्य यंत्रों का संग्रह तैयार किया है. इन वाद्य यंत्रों को एक जगह प्रदर्शित करने के लिए फोक आर्ट इंस्ट्रूमेंट गैलरी शुरू की गई है. प्रौढ़ शिक्षा केन्द्र के परिसर में शुरू हुई इस गैलरी को लोकसंगीत और राजस्थान की पारंपरिक कला को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के तौर पर देखा जा रहा है.

20 से 25 साल में तैयार हुआ वाद्य यंत्रों का संग्रह : जाजम फाउंडेशन के संयोजक विनोद जोशी के मुताबिक इस संग्रह को तैयार करने में 20 से 25 साल का समय लगा है. राजस्थान के अलग-अलग इलाकों, समुदायों और लोक परंपराओं से जुड़े वाद्य यंत्रों को एक छत के नीचे लाने का प्रयास किया गया है. उनका कहना है कि राजस्थान भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से काफी विशाल है. प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न समुदायों की अपनी लोककला और संगीत परंपराएं रही हैं. इसी विविधता को एक स्थान पर प्रदर्शित करने के उद्देश्य से यह गैलरी तैयार की गई है. इसका मकसद सिर्फ वाद्य यंत्रों को प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि लोकसंगीत से जुड़ी उस परंपरा को नई पीढ़ी और आम लोगों तक पहुंचाना भी है, जो धीरे-धीरे कम होती जा रही है.

देसी लोक वाद्य यंत्रों का अनूठा संग्रह (ETV Bharat Jaipur)

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QR कोड से सुन सकेंगे वाद्य यंत्रों की आवाज : गैलरी की खास बात यह है कि यहां रखे गए वाद्य यंत्रों से जुड़ी जानकारी तकनीक के जरिए भी उपलब्ध कराई गई है. संबंधित वाद्य यंत्र के साथ दिए गए QR कोड को स्कैन कर लोग उसकी आवाज सुन सकते हैं. इसके अलावा वाद्य यंत्र के निर्माण, उसके इस्तेमाल और उससे जुड़े इतिहास की जानकारी भी हासिल की जा सकती है. इस पहल से गैलरी केवल देखने की जगह नहीं रह जाती, बल्कि लोकसंगीत को समझने और उसके बारे में जानकारी हासिल करने का माध्यम भी बनती है. विनोद जोशी के अनुसार जयपुर में संगीत सीखने वाले युवाओं और लोकसंगीत से जुड़े लोगों का भी इस गैलरी की ओर रुझान बढ़ रहा है.

जाजम फाउंडेशन की संगीतमय पहल
जाजम फाउंडेशन की संगीतमय पहल (ETV Bharat Jaipur)

शोधार्थियों और लोकसंगीत प्रेमियों के लिए उपयोगी मंच : जाजम फाउंडेशन का प्रयास है कि राजस्थान की लोकसंस्कृति पर शोध करने वाले देश-विदेश के लोगों के साथ-साथ लोकसंगीत में रुचि रखने वाले लोगों को भी एक ऐसा स्थान मिले, जहां वे अलग-अलग पारंपरिक वाद्य यंत्रों को एक साथ देख और उनके बारे में जानकारी हासिल कर सकें. राजस्थान की लोक परंपराओं में वाद्य यंत्रों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है. अलग-अलग लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक आयोजनों में इनका इस्तेमाल होता रहा है. ऐसे में इन वाद्य यंत्रों का संरक्षण राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने से भी जुड़ा हुआ है.

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पर्यटन से जोड़ने की मांग : पर्यटन कारोबारी संजय कौशिक का कहना है कि राजस्थान अपनी संस्कृति, खान-पान और पहनावे के साथ लोकसंगीत के लिए भी देश-दुनिया में पहचान रखता है. ऐसे में लोक वाद्य यंत्रों की यह गैलरी राजस्थान की मूल लोकसंस्कृति को करीब से समझने का अवसर दे सकती है. उनका कहना है कि गैलरी में ऐसे वाद्य यंत्र भी शामिल किए गए हैं, जिनका प्रचलन अब काफी कम हो चुका है.

क्यू आर कोड से जान सकेंगे वाद्य यंत्रों का इतिहास
क्यू आर कोड से जान सकेंगे वाद्य यंत्रों का इतिहास (ETV Bharat Jaipur)

ऐसे में जयपुर आने वाले पर्यटकों के लिए यह जगह राजस्थान की पारंपरिक संस्कृति को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है. संजय कौशिक ने राजस्थान सरकार से भी मांग की है कि पर्यटन से जुड़ी प्रचार सामग्री में इस तरह की जगहों को शामिल किया जाए, ताकि देश-दुनिया से जयपुर आने वाले पर्यटकों तक इसकी जानकारी पहुंच सके और लोकसंगीत को पर्यटन से जोड़ने की संभावनाओं को बढ़ाया जा सके.

वाद्य यंत्रों की गैलरी देगी लोकसंगीत की सीख
वाद्य यंत्रों की गैलरी देगी लोकसंगीत की सीख (ETV Bharat Jaipur)

कलाकारों को भी मिलेगा फायदा : पद्मश्री सम्मानित गायिका बतूल बेगम ने भी 100 से ज्यादा लोक वाद्य यंत्रों के इस संग्रह को सराहनीय पहल बताया है. उनका कहना है कि इस तरह के प्रयासों से लोककला के साथ उससे जुड़े कलाकारों का सम्मान भी बढ़ेगा. बतूल बेगम के अनुसार विनोद जोशी जाजम फाउंडेशन के मंच के जरिए लोककला से जुड़े छोटे-छोटे कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देते हैं. उन्होंने आम लोगों से ऐसी जगहों पर पहुंचने और लोककला को समझने की अपील की है.

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पूंगी, अलगोजा और भपंग जैसे वाद्य यंत्रों के संरक्षण पर जोर : ध्रुपद गायिका मधु भट्ट तैलंग ने कहा कि समाज में कई पारंपरिक वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल लगातार कम हुआ है. इसके साथ ही इन वाद्य यंत्रों को बजाने वाले कलाकारों की संख्या भी घट रही है. ऐसे में वाद्य यंत्रों के संरक्षण के साथ उनसे जुड़ी जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना जरूरी है. उन्होंने पूंगी का उदाहरण देते हुए कहा कि सपेरों की सामाजिक मौजूदगी के कम होने के साथ इस तरह के वाद्य यंत्र भी अब आम तौर पर देखने को नहीं मिलते. इसी तरह कई पारंपरिक ढोल अब प्रचलित कार्यक्रमों से दूर होते जा रहे हैं. अलगोजा और भपंग जैसे वाद्य यंत्रों से जुड़े कलाकारों की संख्या भी कम हुई है.

100 से ज्यादा लोक वाद्य यंत्रों का है संग्रह
100 से ज्यादा लोक वाद्य यंत्रों का है संग्रह (ETV Bharat Jaipur)

मधु भट्ट तैलंग का मानना है कि इस तरह की गैलरी पारंपरिक वाद्य यंत्रों को संरक्षित करने के साथ ही लोगों को उनके बारे में जानने का एक तय स्थान उपलब्ध कराती है. इससे लोकसंगीत की जानकारी नई पीढ़ी तक पहुंचाने और इस कला से जुड़े कलाकारों को बचाए रखने में भी मदद मिल सकती है. जयपुर में शुरू की गई यह फोक आर्ट इंस्ट्रूमेंट गैलरी राजस्थान के पारंपरिक लोकवाद्यों को एक जगह देखने और समझने का अवसर दे रही है. 100 से ज्यादा वाद्य यंत्रों के संग्रह, QR कोड के जरिए उपलब्ध जानकारी और लोक कलाकारों के मंच के साथ यह पहल लोककला के संरक्षण के साथ पर्यटन की संभावनाओं को भी जोड़ती नजर आ रही है.