बिहार में EV क्रांति : 2030 तक 30% इलेक्ट्रिक व्हीकल का लक्ष्य! सरकार की राह में कितने रोड़े?
बिहार सरकार ने EV पॉलिसी 2026 लागू कर दी है, लेकिन सवाल ये है कि राज्य सरकार कितनी तैयार है? पढ़ें बृजम पांडेय की रिपोर्ट

Published : May 15, 2026 at 9:06 PM IST
पटना : पीएम नरेंद्र मोदी की अपील के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रिन्युअल एनर्जी पर फोकस करते हुए बिहार में EV पर बड़ी सब्सिडी देने का एलान किया है. बिहार में नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2026 को मंजूरी देकर साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले वर्षों में राज्य की सड़कों पर पेट्रोल-डीजल नहीं, बल्कि बैटरी से चलने वाले वाहन ज्यादा दिखेंगे.
महिलाओं को EV व्हीकल खरीद पर छूट : अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए महिलाओं को इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर 1 लाख रुपये तक का अनुदान, ई-स्कूटर पर सब्सिडी और टैक्स में भारी छूट देकर बिहार सरकार ने 'EV30@30' का बड़ा लक्ष्य तय किया है.
सरकार का महिलाओं पर फोकस : नई नीति के तहत महिलाओं को इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर 1 लाख रुपये का सीधा अनुदान मिलेगा. ईवी टू-व्हीलर पर सामान्य वर्ग को 10 हजार रुपये और SC/ST वर्ग को 12 हजार रुपये की सब्सिडी दी जाएगी.

माल ढोने वाले EV गुड्स पर भी छूट : माल ढोने वाले इलेक्ट्रिक ऑटो यानी ईवी गुड्स व्हीलर पर सामान्य वर्ग को 50 हजार और SC/ST वर्ग को 60 हजार रुपये का अनुदान मिलेगा. बिहार में रजिस्टर्ड सभी इलेक्ट्रिक वाहनों को मोटर वाहन टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट भी दी जाएगी. सरकार को लगता है कि अनुदान देने से आम पब्लिक में EV की तरफ इंटरेस्ट बढ़ेगा.
करोड़ों लीटर ईंधन बचाने का दावा : बिहार सरकार का दावा है कि इस नीति से 2030 तक हर साल करीब 10 करोड़ लीटर पेट्रोल और डीजल की बचत होगी. इससे विदेशी मुद्रा की बचत के साथ वायु और ध्वनि प्रदूषण में भी कमी आएगी.
बिहार सरकार का 'मिशन 30@30' : सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक हर 100 नए वाहनों में से 30 वाहन इलेक्ट्रिक हों. परिवहन मंत्री दामोदर रावत ने कहा कि 2028 तक 15 फीसदी और उसके बाद 2030 तक कुल 30 फीसदी ईवी का लक्ष्य रखा गया है.

"सरकार EV को प्रोत्साहित कर रही थी अब उसमें कुछ सहूलियत बढ़ा दी है. 2030 तक 30 फीसदी इलेक्ट्रिक व्हीकल बढ़ाने का टार्गेट है. महिलाओं को चार पहिया EV कार लेने पर 1 लाख तक का अनुदान देने का प्रावधान है. ऐसे ही मालवहक वाहनों के साथ दो पहिया व्हीकल पर भी अलग-अलग अनुदान है."- दामोदर रावत, परिवहन मंत्री
आंकड़े बताते हैं—बिहार अभी बहुत पीछे : भारत में कुल 13,34,385 इलेक्ट्रिक वाहन और 27,81,69,631 गैर-इलेक्ट्रिक वाहन चल रहे हैं. वहीं बिहार में सिर्फ 3530 ईवी चार पहिया वाहन दर्ज हैं. दोपहिया ईवी की संख्या 23,096 है. यानी अन्य प्रदेशों की तुलना में बिहार अभी बहुत पीछे है.
बिहार के इन जिलों में सबसे ज्यादा EV वाहन : पटना, बेगूसराय और मुजफ्फरपुर में सबसे अधिक ईवी फोर व्हीलर खरीदे गए हैं. यह आंकड़े बताते हैं कि बिहार में अभी ईवी संस्कृति शुरुआती दौर में ही है. जबकि सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक बिहार में 30 फीसदी नए इलेक्ट्रिक वाहन होंगे. लेकिन सवाल यह है कि क्या बिहार इस बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार है?

'सिर्फ EV से नहीं रुकेगा प्रदूषण' : पर्यावरणविद शुभम कुमार का मानना है कि योजना अच्छी है, लेकिन बिहार में प्रदूषण की असली वजह सिर्फ वाहन नहीं, बल्कि लगातार हो रहा निर्माण कार्य भी है. ऐसे में केवल ईवी से बहुत बड़ा बदलाव नहीं आएगा.
''प्रदूषण के दृष्टिकोण से यदि दिल्ली मुम्बई में इसको लाया जाता तो वहां प्रदूषण को कंट्रोल किया जा सकता था, क्योंकि वहां लाखों गाड़ियां प्रदूषण छोड़ती है. लेकिन बिहार में कई जिलों में तो ईवी है ही नहीं. ऐसे में इसपर एक बड़े कैम्पेन की जरूरत है.''- शुभम कुमार, पर्यावरणविद्
बैटरी का कचरा बनेगा अगला संकट? : पर्यावरण कार्यकर्ता मृत्युंजय मणि ने ईवी नीति का स्वागत किया, लेकिन बैटरी निस्तारण को सबसे बड़ी चुनौती बताया. उन्होंने कहा कि अगर बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट की स्पष्ट नीति नहीं बनी तो आने वाले समय में जगह-जगह बैटरियों का कचरा दिखाई देगा.
'जमीन कर देगा बंजर' : पर्यावरण विद मृत्युंजय मणि ने कहा कि बैटरी में मौजूद रासायनिक तत्व जमीन को बंजर बना सकते हैं. सरकार को अभी से बैटरी रीसाइक्लिंग और डिस्पोजल पर मजबूत नीति बनानी होगी. ताकि फ्यूचर में होने वाली समस्या से निजात मिल सके.
''बैटरी का कचरा आने वाले समय में जगह-जगह देखने को मिलेंगे. बैटरी का जो कचरा होता है उसमें भी बड़ी मात्रा में कार्बन होते हैं और यह जमीन को बंजारा बनाते हैं. अभी तक भारत सरकार और ना ही राज्य सरकार ने इसके निस्तारण की कोई ठोस पॉलिसी बनाई है.''- मृत्युंजय, पर्यावरणविद्
कम चार्जिंग स्टेशन से चिंता : पटना के सुमन धारी सिन्हा कहते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहन अच्छा विकल्प है, लेकिन इसकी कीमत बहुत अधिक है. सबसे बड़ी समस्या चार्जिंग और बैटरी की है. 300 से 350 किलोमीटर चलने के बाद चार्ज करना पड़ता है और इसमें काफी समय लगता है.
महंगी बैटरी जेब पर चोट : इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन कम हैं और बैटरी बदलने का खर्च बहुत ज्यादा है. कई बार नई बैटरी की कीमत गाड़ी की कुल कीमत का 70 प्रतिशत तक पहुंच जाती है. महंगी होने के कारण लोग इससे बेहतर विकल्प पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की गाड़ियों को मानते हैं.
लंबी दूरी के सफर में भरोसा पेट्रोल-डीजल पर : छपरा के सूरज कुमार का कहना है कि पर्यावरण के लिए ईवी बेहतर है, लेकिन लंबी दूरी की यात्रा के लिए अभी पेट्रोल-डीजल गाड़ियां ज्यादा भरोसेमंद हैं. उन्होंने कहा कि पटना से दिल्ली जैसे सफर ईवी से आसान नहीं हैं.
''पेट्रोल पंप हर जगह हैं, मैकेनिक तुरंत मिल जाते हैं, लेकिन EV में तकनीकी खराबी आने पर परेशानी बढ़ जाती है. चार्जिंग स्टेशन कम होने से हाइवे पर लंबी कतारें भी भविष्य के लिए चुनौती बन जाएगी. इसलिए चार्जिंग स्टेशन बढ़ाना भी एक चुनौती है.''- सूरज कुमार, छपरा
'सब्सिडी से पहले चार्जिंग नेटवर्क जरूरी' : ईवी सेक्टर से जुड़े अभिषेक कुमार झा का कहना है कि सरकार कि नई नीति शानदार पहल है, लेकिन अगर चार्जिंग नेटवर्क मजबूत नहीं हुआ तो सब्सिडी का पूरा लाभ नहीं मिलेगा. उन्होंने कहा कि जैसे CNG स्टेशनों पर लंबी लाइन लगती है, वैसे ही EV बढ़ने पर चार्जिंग पॉइंट पर भी भीड़ बढ़ेगी.
''सरकार से अपील करेंगे कि जितने पेट्रोल पंप बनाए गए हैं वहां पर इलेक्ट्रिक व्हीकल के रिचार्जिंग पॉइंट को लेकर टेंडर डालकर उसे शुरू किया जाए. बैटरी के रीसायकल को लेकर समस्याएं आने वाले दिनों में और आएगी और इन सब पर सरकार को भी प्लानिंग करनी होगी. बैटरी बैकअप बढ़ाना होगा.''- अभिषेक कुमार झा, EV वाहनों के व्यवसाई
सिर्फ सब्सिडी देने से काम नहीं चलने वाला : बिहार की EV पॉलिसी 2026 सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि भविष्य की परिवहन क्रांति की शुरुआत है. लेकिन यह क्रांति तभी सफल होगी जब सब्सिडी के साथ चार्जिंग स्टेशन, बैटरी रीसायकल, तकनीकी सहायता और जन-जागरूकता भी समान गति से बढ़े.
कन्फ्यूजन दूर करना जरूरी : यह सबकुछ नहीं हुआ तो सरकार की एक अच्छी पहल वाली योजना डिरेल हो जाएगी. क्योंकि 30 प्रतिशत का लक्ष्य तय करने के बीच जमीनी हिचक के कारण लोगों की दूरी बनी रहेगी. फिलहाल बिहार सरकार ने शुरुआत कर दी है, अब असली परीक्षा प्रिसिशन के साथ EV योजना के क्रियान्वयन की है.
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