कहानी धनंजय सर की, गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देकर बना रहे IAS-IPS
धनंजय लंदन में करोड़ों की नौकरी छोड़कर बिहार लौटे और आज गरीब छात्रों को मुफ्त सिविल सेवा कोचिंग दे रहे हैं. रिपोर्ट- रंजीत कुमार

Published : August 4, 2026 at 5:10 PM IST
पटना: बिहार युवा आबादी वाला राज्य है और युवाओं के अंदर प्रतिभा की कमी भी नहीं है. बिहार के युवा धनंजय कुमार शिक्षा जगत में अलख जगह रहे हैं. युवाओं को शिक्षित करने और पलायन को रोकने के लिए धनंजय कुमार बिहार लौटे और फिर सरकारी नौकरी में आए, संतुष्टि नहीं मिली तो अध्यापन के काम में जुट गए.
युवाओं को शिक्षित करने में जुटे धनंजय: समाज में बदलाव लाने के लिए कई लोग अपनी अच्छी-खासी नौकरी और सुविधाओं को छोड़कर शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं. ऐसे ही लोगों में एक नाम धनंजय का है, जो गरीब और जरूरतमंद छात्रों को सिविल सर्विसेज की तैयारी मुफ्त में करा रहे हैं.
लंदन में ली मास्टर्स की डिग्री: धनंजय लंदन में भी रह चुके हैं. उन्होंने करोड़ों रुपये के पैकेज को छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया और शिक्षा के जरिए समाज के लिए काम करने का रास्ता चुना है. धनंजय को ब्रिटेन के सरकार से एक करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप मिली थी. वहां जाकर धनंजय ने लंदन के मशहूर किंग्स कॉलेज से मास्टर्स इन पब्लिक पॉलिसी की डिग्री हासिल की और उसके बाद नौकरी भी की. लंदन में धनंजय का पैकेज करोड़ों में था लेकिन बिहार के लिए प्रेम ने उन्हें लौटने लिए मजबूर कर दिया.
सिविल सर्विसेज की नौकरी छोड़ी: धनंजय पेशे से शिक्षक हैं. उन्होंने बिहार लौटने के बाद BPSC की परीक्षा में हिस्सा लिया. उनका चयन BPSC में हो गया और वे एसडीएम नियुक्त हुए लेकिन नौकरी से उन्हें वह संतुष्टि नहीं मिली जिसकी उन्हें तलाश थी. इसके बाद उन्होंने समाज निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का फैसला किया.

200 से अधिक छात्रों को मुफ्त में शिक्षा: धनंजय अब 200 से अधिक छात्रों को मुफ्त में सिविल सर्विसेज की तैयारी करा रहे हैं. उनका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को बेहतर शिक्षा और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है, ताकि पैसे की कमी किसी प्रतिभाशाली छात्र की सफलता में बाधा न बने. गरीब छात्रों को धनंजय पठन-पाठन सामग्री देने के अलावा आर्थिक मदद भी करते हैं. अब तक सैकड़ो गरीब छात्रों को धनंजय अपने स्तर से मदद कर चुके हैं. जिन्हें मदद मिली वह आज उंचे मुकाम पर भी हैं.
धनंजय अपने गांव के हैं पहले ग्रेजुएट: धनंजय संघर्ष के कोख से निकले हैं. अपने गांव और परिवार में वो पहले ग्रेजुएट हैं. पटना जिले के दियारा इलाके के हैवसपुर गांव के रहने वाले धनंजय कहते हैं कि आज भी हमारे गांव में पानी और बिजली नहीं है. माता-पिता की इच्छा थी कि बेटा बड़ा होकर सरकारी नौकरी में जाए. मैं सरकारी नौकरी में भी गया और सीओ के पद पर काम किया.

कराते हैं बीपीएससी और यूपीएससी की तैयारी: ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान धनंजय कुमार ने कहा कि बीपीएससी और यूपीएससी की तैयारी के लिए बिहार के छात्र दिल्ली जाते थे और वहां लाखों की फीस भरते थे. अब दिल्ली से एक तिहाई फीस पर वो यहां सामान्य बच्चों को पढ़ा रहे हैं, जो गरीब छात्र हैं. उनसे वो फीस भी नहीं लेते हैं. जहां तक हो सकता है गरीब छात्रों को आर्थिक तौर पर या फिर संसाधनों से मदद भी करते हैं.
"जो भी गरीब बच्चे आते हैं उन्हें हम ऑनलाइन और ऑफलाइन क्लास की सुविधा देते हैं. इसके अलावा उन्हें सामग्री भी उपलब्ध कराते हैं. हमारी कोशिश यह रहती है कि पैसों के अभाव के चलते गरीब छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो. बिहार सरकार में रहकर अंचल अधिकारी के पद पर काम करना भी सुखद रहा और काफी कुछ सीखने का मौका मिला."-धनंजय कुमार, शिक्षक

क्या कहते हैं धनंजय के छात्र: छात्र राहुल कहते हैं कि अब सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए उन लोगों को दिल्ली जाने की जरूरत नहीं है. धनंजय सर के मार्गदर्शन में उन्हें बेहतर शिक्षा मिल रही है और यहां से बड़ी संख्या में छात्र सफल हो रहे हैं. इम्तियाज कहते हैं कि अब हम लोगों को दिल्ली जाने की जरूरत नहीं है, बिहार में ही दिल्ली से आधे से भी कम खर्च पर उनकी पढ़ाई हो जाती है.

"जो भी गरीब छात्र हैं उनसे फीस नहीं ली जाती है, वहीं जो भी संभव मदद है की जाती है. दिल्ली में जो पढ़ाई ₹100000 में होती थी वह कोर्स अब पटना में 25 या 30 हजार में हो रहा है."-राहुल कुमार, छात्र
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