यूपीएससी में 17 वीं रैंक लाने वाली स्वाति ने बताया रिजल्ट जानकर कैसा लगा, जानिए कैसे हासिल की उन्होंने ये सफलता - UPSC Topper Swati Sharma
UPSC Topper Swati Sharma. यूपीएससी में 17वीं रैंक लाने वाली स्वाती झारखंड के जमशेदपुर में रहती हैं. उन्होंने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि रिजल्ट देखने के बाद उन्हें कैसा लगा. उन्होंने अपनी सफलता का राज भी बताया.

Published : April 16, 2024 at 10:52 PM IST
जमशेदपुर: यूपीएससी में झारखंड का परचम लहराने वाली स्वाति शर्मा मानगो के उलीडीह में रहती हैं. कालीकानगर में उनका घर है. पूर्व थल सैनिक संजय शर्मा की बेटी स्वाति शर्मा ने यूपीएससी में 17वां स्थान लाकर जमशेदपुर ही नहीं बल्कि पूरे झारखंड का नाम रोशन किया है.
स्वाति ने अपना IAS बनने का सपना पूरा कर लिया है. उन्होंने इसका श्रेय अपने माता-पिता और भाई को दिया है. उनके पिता संजय शर्मा थल सेना से रिटायर्ड होकर टाटा कंपनी में निजी सिक्योरिटी गार्ड की कंपनी में अच्छे पद पर हैं. जबकि उनके भाई संजीव शर्मा टाटा स्टील में ही इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं, वहीं स्वाती की मां एक गृहणी हैं.
सेल्फ स्टडी पहुंचाया इस मुकाम पर
ईटीवी भारत से बातचीत मे स्वाति ने बताया कि उसका सपना IAS बनने का था और अब वह पूरा हो गया, स्वाति ने बताया कि उन्होंने तीसरी बार में इस सफलता को प्राप्त किया. उन्होंने बताया कि आज रिजल्ट आने वाला था और सुबह से ही उन्हें डर लग रहा था. उन्होंने बताया कि रिजल्ट आने के बाद जब उन्होंने देखा कि उन्हें 17वां स्थान मिला है तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ. फिर ठीक से देखा और फिर मां को पकड़कर खूब रोई, उनकी मम्मी भी खूब रोई.
उनकी रिजल्ट के बारे में जैसे ही लोगों को पता चला, सबके फोन आने लगे और बधाई और शुभकामनाओं का तांता लग गया. स्वाति बताती हैं कि उन्हें विश्वास था कि वे यूपीएससी पास कर लेंगी, लेकिन इतना बेहतर प्रदर्शन करेंगी ऐसी उम्मीद नहीं थीं. उन्होंने बताया कि माता और पिता के अलावा भाई संजीव शर्मा ने भी उनकी काफी मदद की.
कोलकाता से मैट्रिक और स्नातक जमशेदपुर से
स्वाति ने बताया कि उनके पिता आर्मी में थे इस कारण उनका ट्रांसफर हर तीन साल मे होता रहता था. उन्होंने कोलकाता से आर्मी पब्लिक स्कूल से मैट्रिक, जमशेदपुर के रविन्द्र नाथ टैगोर स्कूल से इंटर और जमशेदपुर वीमेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है. उन्होंने बताया कि 2019 में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने तैयारी के लिए दिल्ली जरूर गई थी, लेकिन कोरोना के कारण लॉक डाउन लग गया. उसके बाद वे जमशेदपुर आ गईं. जमशेदपुर में आकर सेल्फ स्टडी करना शुरू किया और शिक्षकों के साथ-साथ दोस्तों से मदद ली और आज इस मुकाम तक पहुंच पाई.
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