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युद्ध, नशे के विरुद्ध! नशे से दूरी बनाने की पहल, स्कूली बच्चों में जागरुकता के लिए महाअभियान

रांची में नौनिहालों-युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए पुलिस भरसक प्रयास कर रहा है. प्रशांत कुमार की रिपोर्ट.

Special police awareness campaign to protect youth and students from harmful effects of drug abuse in Ranchi
ग्राफिक्स इमेज (Etv Bharat)

By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : June 21, 2026 at 4:24 PM IST

रांचीः राजधानी रांची में युवाओं और स्कूली बच्चों को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए पुलिस ने एक विशेष जागरुकता अभियान शुरू किया है.

इस अभियान के तहत पुलिस अधिकारी विभिन्न स्कूलों में जाकर छात्रों से सीधे संवाद कर रहे हैं और उन्हें नशे के दुष्प्रभाव के बारे में जानकारी दे रहे हैं. साथ ही साथ समाज में फैल रहे इस बड़ी बुराई के खिलाफ लड़ाई में उनका सहयोग भी मांग रहे हैं.

बड़ा एजेंडा है रांची पुलिस का ये अभियान

रांची सीनियर एसपी राकेश रंजन ने बताया कि नशे के खिलाफ जागरुकता अभियान रांची पुलिस का फिलहाल सबसे बड़ा एजेंडा है. हमारे पुलिस अफसर स्कूलों तक पहुंच रहे हैं और मादक पदार्थ से जुड़े हर एंगल के बारे में बच्चों और शिक्षकों को जानकारी दे रहे हैं.

नशे के खिलाफ जागरुकता अभियान (ETV Bharat)

इस बात की जानकारी- क्या है मादक पदार्थ और लाइफ पर असर

रांची ग्रामीण एसपी गौरव गोस्वामी ने बताया कि हम चार बिंदुओं पर बच्चों से बात करते हैं. सबसे पहले ड्रग्स क्या है यह बच्चों को बताया जाता है. साथ ही साथ ड्रग्स के कौन कौन से प्रकार हैं यह भी बताया जाता है. रूरल एसपी के अनुसार नशामुक्त समाज के निर्माण की दिशा में चलाए जा रहे जागरुकता अभियान के तहत पुलिस अधिकारियों ने स्कूलों में पहुंचकर बच्चों को सबसे पहले यह समझाया कि आखिर ड्रग्स क्या है और यह किस तरह युवाओं के जीवन को बर्बाद कर सकता है.

बेहद सरल भाषा में छात्रों को बताया जाता है ड्रग्स ऐसे मादक पदार्थ होते हैं, जो व्यक्ति के दिमाग और शरीर पर बुरा प्रभाव डालते हैं. शुरुआत में यह आकर्षक या तनाव दूर करने वाला साधन लग सकता है पर धीरे-धीरे इसकी लत व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से कमजोर बना देती है.

नशे से युवाओं को दूर रखने की कवायद (ETV Bharat)

नशे की गिरफ्त में आने के बाद पढ़ाई, करियर, पारिवारिक रिश्ते और सामाजिक जीवन पर नकारात्मक असर पड़ता है. साथ ही कई बार युवा दोस्तों के दबाव, जिज्ञासा या गलत संगत में पड़कर नशे की शुरुआत कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर समस्या बन जाती है. बाजार में किस तरह से ड्रग्स बेचे जाते हैं उसके बारे में भी बच्चों को यह पूरी जानकारी दी जाती है ताकि अगर उन्हें किसी ड्रग्स पैडलर्स के बारे में जानकारी मिले तो वह पुलिस तक यह बातें पहुंच सके.

कैसे करते हैं टारगेट

रांची के रूरल एसपी गौरव गोस्वामी ने बताया कि जागरुकता अभियान के दौरान बच्चों को यह अभी बताया जाता है कि उन्हें नशे के तस्कर कैसे टारगेट करते हैं. स्कूली बच्चों को बताया जा रहा है कि ड्रग्स तस्कर किस तरह युवाओं और किशोरों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं. तस्करों के चंगुल से बचने के लिए बच्चों को इन तरीकों की जानकारी होना जरूरी है, ताकि वे किसी भी तरह के प्रलोभन या दबाव से बच सके.

स्कूली बच्चों के बीच पुलिस अधिकारी (ETV Bharat)

पुलिस द्वारा छात्रों को बताया जा रहा है कि ड्रग्स तस्कर अक्सर ऐसे बच्चों और युवाओं की पहचान करने की कोशिश करते हैं जो जिज्ञासु हों, दोस्तों के प्रभाव में जल्दी आ जाते हों या किसी मानसिक तनाव से गुजर रहे हों. वे पहले दोस्ती बढ़ाने, भरोसा जीतने और खुद को मददगार दिखाने का प्रयास करते हैं और पहले फ्री में ड्रग्स देते है. जब सामने वाला ड्रग्स का आदी हो जाता है तब उससे पैसे की डिमांड की जाती है.

बच्चों को यह भी बताया गया कि कई मामलों में तस्कर सोशल मीडिया, ऑनलाइन चैट, स्थानीय संपर्कों या मित्रों के माध्यम से युवाओं तक पहुंचने की कोशिश करते हैं. शुरुआत में वे मुफ्त में या कम कीमत पर नशीले पदार्थ उपलब्ध कराकर लत लगाने का प्रयास करते हैं, बाद में यही लत बच्चों को उनके जाल में फंसा देती है. इसलिए यह भी जरूरी है की किसी अनजान व्यक्ति से दोस्ती करते समय सावधानी बरती जाए. सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत अपने अभिभावक को जरूर दें.

नशे के खिलाफ लड़ाई (ETV Bharat)

हेल्पलाइन पर दें तस्करों की जानकारी, मानस पोर्टल के बारे भी दी जा रही जानकारी

रांची के ग्रामीण एसपी गौरव गोस्वामी ने बताया कि नशा विरोधी जागरुकता अभियान के दौरान शिक्षकों और स्कूली बच्चों को झारखंड सरकार की इनाम नीति और मानस पोर्टल के बारे में विस्तार से जानकारी दी है. अभियान के दौरान यह बताया जा रहा है की यदि किसी को नशीले पदार्थों की खरीद-बिक्री, तस्करी या उससे जुड़ी किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलती है, तो वह मानस पोर्टल के माध्यम से इसकी शिकायत दर्ज करा सकता है.

इसके साथ ही साथ पुलिस अधिकारियों के नंबर पर भी इसकी जानकारी दे सकते हैं. खास बात यह है कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है, जिससे लोग बिना किसी डर के सूचना साझा कर सकते हैं. पुलिस के अनुसार बच्चे भी जागरूक नागरिक के रूप में अपनी भूमिका निभा सकते हैं.

अगर उनके आसपास नशे से जुड़ी कोई गतिविधि दिखाई दे, तो वे अपने अभिभावकों, शिक्षकों या सीधे मानस पोर्टल के माध्यम से इसकी जानकारी दे सकते हैं. छात्रों को यह भी बताया कि झारखंड सरकार ने नशा तस्करों के खिलाफ उपयोगी और सटीक सूचना देने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए इनाम नीति लागू की है. इसका उद्देश्य लोगों को नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ आगे आने के लिए प्रेरित करना है.

नशे से युवाओं को दूर रखने की कवायद (ETV Bharat)

परमिटेड नशे को लेकर भी जागरुकता

रांची के सिटी एसपी पारस राणा ने बताया कि हमारे यहां कुछ परमिटेड नशे के साधन भी हैं लेकिन वह बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है. स्कूली बच्चों को केवल ड्रग्स ही नहीं, बल्कि शराब और सिगरेट के सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी जा रही है. कई बार नशे की शुरुआत सिगरेट और शराब से होती है, जो आगे चलकर गंभीर लत का रूप ले लेती है.

सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद फेफड़ों, हृदय और शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं. वहीं शराब का अत्यधिक सेवन शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है तथा व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करता है. किशोरावस्था में किसी भी प्रकार का नशा पढ़ाई, खेलकूद और व्यक्तित्व विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. इसलिए बच्चों को शुरुआत से ही इन आदतों से दूर रहने की जरूरत है.

सबसे खतरनाक है ब्राउन शुगर

पिछले दो साल के दौरान राजधानी रांची में ब्राउन शुगर का कारोबार तेजी के साथ पनपा है. जानकारों की मानें तो ब्राउन शुगर का नशा सबसे ज्यादा घातक है. रिनपास के वरीय मनोचिकित्सक डॉ. सिद्धार्थ सिन्हा के अनुसार रिनपास में आने वाले 30% युवा ब्राउन शुगर की लत के शिकार हैं. उनके परिजन उन्हें ब्राउन शुगर की लत को छुड़ाने के लिए रिनपास ला रहे हैं. डॉक्टरों के अनुसार सूखे नशे में पहले सिर्फ गांजा का इस्तेमाल किया जाता था लेकिन अब गांजा पुरानी बात हो चुकी है. अब सबसे ज्यादा प्रचलन में ब्राउन शुगर है. ब्राउन शुगर बेहद घातक नशा है.

तीन डोज के बाद आदी हो जाता है इंसान

नशे के तस्कर ब्राउन शुगर को 10 ग्राम का पुड़िया बनाकर बाजार में बेचते हैं. नशे के आदी युवाओं को हर दिन 30 ग्राम की जरूरत होती है अगर इतना ब्राउन शुगर उन्हें एक दिन नहीं मिलेगा तो वे बेचैन हो जाते हैं. नशे के आदी दिन भर में 30 ब्राउन शुगर को एक डोज का नाम देते है.

डॉक्टर बताते है कि अगर कोई भी इंसान लगतार पांच डोज ब्राउन शुगर का ले लेता है तो वह इस नशे का आदी हो जाता है. इसके बाद हर दिन ब्राउन शुगर का डोज उस इंसान को हर कीमत पर चाहिए ही. दरअसल ब्राउन शुगर को अफीम से बनाया जाता है. इसे बनाने के लिए अफीम, हीरोइन और स्मैक तीनों का इस्तेमाल किया जाता है इसलिए इसका नशा बेहद घातक होता है. कई बार इसके हैवी डोज से इंसान की जान भी चली जाती है.

नशे का दुष्प्रभाव (ETV Bharat)

काउंसिलिंग में चौंकाने वाले खुलासे

रांची के रिनपास में ब्राउन शुगर के आदी युवा जब अपना इलाज के लिए आते हैं तब उनकी काउंसलिंग के साथ साथ उन्हें दवा भी उपलब्ध करवाया जाता है. काउंसलिंग में आने वाले ड्रग्स एडिक्ट युवाओं ने कई चौकाने वाले खुलासे किए हैं. रिनपास में हुई काउंसलिंग में ड्रग एडिक्ट युवाओं ने बताया है कि राजधानी में ब्राउन शुगर का इस्तेमाल ग्रुप में होता है. कई ऐसे ग्रुप बने हुए हैं जिसमें एक दर्जन से ज्यादा युवा शामिल है और वह सभी ब्राउन शुगर का इस्तेमाल करते हैं. नए लड़के और लड़कियां भी शौकिया तौर पर पहले ब्राउन शुगर का इस्तेमाल करते हैं लेकिन तीन-चार दिन के बाद ही वह इसके एडिक्ट हो जाते हैं.

काम पर लगी है बड़ी टीम

मादक पदार्थ युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रहे हैं अपराधों के पीछे भी कहीं ना कहीं से मादक पदार्थ ही कारण बनते हैं. यही वजह है कि रांची पुलिस के द्वारा देश के भविष्य को नशे से बचाने के लिए एक महा अभियान शुरू किया गया है. इस अभियान में कई आईपीएस, डीएसपी सहित कई थाना प्रभारी और मनोचिकित्सकों को भी शामिल किया गया है.

स्कूली बच्चों के बीच पुलिस अधिकारी, नशे के खिलाफ जागरुकता अभियान (ETV Bharat)

इस अभियान के लिए राजधानी रांची के सभी शिक्षण संस्थान चाहे वह सरकारी हो या फिर गैर सरकारी सभी को टारगेट ग्रुप में रखा गया है. रांची के सीनियर एसपी राकेश रंजन, सिटी एसपी पारस राणा, ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह और ग्रामीण एसपी गौरव गोस्वामी हर दिन समय निकालकर स्कूलों में जाकर बच्चों को मादक पदार्थ किस तरह से लाइफ को बर्बाद करते हैं और उसका असर क्या होता है इसके बारे में विस्तार से बता रहे हैं.

इस अभियान के दौरान पुलिस टीम बच्चों को यह समझा रही है कि नशा न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह उनके भविष्य, शिक्षा और सामाजिक जीवन को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है. अधिकारी हर बच्चे प्रेरित करते हैं कि वे अपने लक्ष्य पर ध्यान दें और किसी भी तरह के नशे या गलत संगत से दूर रहें.

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