नशा मुक्त झारखंड राज्यव्यापी जागरुकता अभियान की शुुरुआत, सीएम ने प्रचार वाहनों को किया रवाना
रांची में सीएम हेमंत सोरेन ने नशा मुक्ति को लेकर राज्यव्यापी जागरुकता अभियान की शुरुआत की.

Published : June 15, 2026 at 9:11 PM IST
रांची: राज्य सरकार द्वारा नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर सख्ती से अंकुश लगाने के लिए निरंतर अभियान चलाया जा रहा है. नशा मुक्त झारखंड बनने के उद्देश्य से निषिद्ध मादक पदार्थ के सेवन, तस्करी एवं इसके दुष्प्रभावों के प्रति जन सामान्य को जागरूक करने के लिए राज्यव्यापी जागरुकता अभियान का आज सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुभारंभ किया.
मुख्यमंत्री ने झारखंड मंत्रालय परिसर में जागरूकता प्रचार-प्रसार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर राज्य के विभिन्न जिलों के लिए रवाना किया. इन प्रचार-प्रसार वाहनों के माध्यम से नशे की लत के खिलाफ जन जागरुकता फैलाने के साथ-साथ इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाना है. नशा मनुष्य को न केवल बीमार बनाता है, बल्कि परिवार एवं समाज को भी गहरे संकट में डाल देता है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि नशीले एवं प्रतिबंधित मादक पदार्थ के सेवन से मनुष्य के स्वास्थ्य में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. सभी के सहयोग से राज्य को नशा मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इस दिशा में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा किसी भी व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और सामाजिक जीवन को पूरी तरह से नष्ट कर देता है. यह न केवल नशा करने वाले व्यक्ति को बीमार बनाता है, बल्कि उसके पूरे परिवार और समाज को भी गहरे संकट में डाल देता है. इसके लिए समाज को भी आगे आना होगा.

मुख्यमंत्री ने लोगों से की अपील
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को नशे के गिरफ्त से बचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है. मादक पदार्थ का सेवन परिवार, समाज और राज्य की प्रगति के लिए गंभीर चुनौती उत्पन्न करते हैं. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर सख्ती से अंकुश लगाने के लिए निरंतर अभियान चलाए जा रहे हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की समस्त जनमानस के साथ-साथ विशेष रूप से युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराने और उन्हें स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करने के लिए व्यापक जन जागरुकता कार्यक्रम की शुरुआत की गई है. मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की है कि वह नशे से दूर रहे तथा अपने परिजन, समाज एवं करीबियों को इसके प्रति जागरूक करें.
मीडियाकर्मियों से बात करते हुए सीएम ने कहा कि आप लोगों के मन में सवाल उठ रहा होगा कि यहां तो मदिरा पान का भी चलन है. ऐसे में मैं यह बताना चाहता हूं कि हर चीज के दो पहलू होते हैं, हमें उसके सही और गलत पहलुओं को पहचानने की क्षमता होनी चाहिये.

मुख्यमंत्री ने कहा कि क्या सही है और क्या गलत है, इसे लोग पहचाने, इसके लिए हमने यह मुहिम शुरू किया है. कई बार कानून होने के बावजूद लोग जाने अनजाने गलतियां कर बैठते हैं और विपक्ष इसको मुद्दा बना देते हैे. इसलिए हमारी कोशिश है कि नशे के दुष्प्रभाव को लोगों में जागरुकता आये.
वहीं राज्यसभा चुनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने मीडियाकर्मियों की ओर इंगित करते हुए कहा कि आप लोग हैं न, आपके रहते क्या मजाल कि परिंदा पर मार ले. इस मौके अवसर पर स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव गृह विभाग वंदना दादेल, डीजीपी तदाशा मिश्रा सहित अन्य वरीय पदाधिकारीगण उपस्थित रहे.
गढ़वा में नशा मुक्ति जागरुकता अभियान
गढ़वा में निषिद्ध मादक पदार्थों के दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी के विरुद्ध जन-जागरूकता को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन द्वारा 15 जून से 26 जून 2026 तक जिलाव्यापी नशा मुक्ति जागरूकता अभियान चलाया जाएगा.
इस अभियान के तहत जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों, विद्यालयों, महाविद्यालयों, पंचायतों, सार्वजनिक स्थलों तथा सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से आमजनों, विशेषकर युवाओं एवं विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाएगा. इस संबंध में सोमवार को समाहरणालय सभागार में एक बैठक एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी पशुपति नाथ मिश्रा ने की.
इस बैठक को संबोधित करते हुए उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी पशुपति नाथ मिश्रा ने कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करता है. उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है.
उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि नशा मुक्ति को जन-आंदोलन का स्वरूप देना है. विद्यालयों, महाविद्यालयों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, पंचायत प्रतिनिधियों तथा आम नागरिकों की सहभागिता से ही इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है.
डीसी ने अभियान की अवधि के दौरान विशेष रूप से किशोरों एवं युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने तथा उन्हें सकारात्मक एवं रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर बल दिया. साथ ही सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों, अंचल अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारियों को अपने-अपने स्तर पर व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने का निर्देश दिया.
उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी अनुमंडल पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं अंचल अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में मादक पदार्थों की खेती, भंडारण, तस्करी अथवा अवैध कारोबार से संबंधित गतिविधियों पर सतत निगरानी रखें तथा किसी भी प्रकार की शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें.
पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर ने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी एवं अवैध कारोबार के विरुद्ध जिला पुलिस लगातार प्रभावी एवं कठोर कार्रवाई कर रही है तथा आगे भी यह अभियान और अधिक सख्ती एवं प्रभावशीलता के साथ जारी रहेगा.
इसे भी पढ़ें- रांची में नशा मुक्ति अभियानः युवाओं ने दौड़ लगाकर नशे के खिलाफ फैलाई जागरुकता
इसे भी पढ़ें- नशा मुक्ति को लेकर जामताड़ा में न्यायिक पदाधिकारी सड़क पर उतरे, निकाली जागरूकता रैली
इसे भी पढ़ें- धनबाद में हैप्पी स्ट्रीट का आयोजन, कार्यक्रम के माध्यम से फिटनेस और नशा मुक्ति का दिया गया संदेश

