बकरी के गोबर से पैरालिसिस का इलाज, महज ₹1500 की दवा से रिकवरी की गारंटी!

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Published : May 24, 2023, 7:35 PM IST

Updated : May 25, 2023, 6:10 AM IST

Dr Soni Kumar Vaidya treats paralyzed patient

हमीरपुर के डॉ. सोनी कुमार वैद्य पैरालिसिस मरीजों का इलाज बकरी के गोबर और चिकनी मिट्टी की लेप से करते हैं. उनका दावा है कि महज 1500 रुपये की दवा से और बकरी के गोबर और चिकनी मिट्टी के लेप लगाने से मरीज दो महीने के भीतर रिकवर हो जाता है. पढ़िए पूरी खबर...

हमीरपुर के डॉ. सोनी कुमार वैद्य पैरालिसिस के मरीजों का इलाज बकरी के मल और चिकनी मिट्टी से करते हैं.

हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला के भोरंज क्षेत्र में बीईएमएस डॉक्टर सोनी कुमार वैद्य पारंपरिक तरीके से पैरालिसिस मरीजों का इलाज कर रहे हैं. डॉक्टर पारंपरिक देसी तरीके से बकरी के गोबर से तैयार लेप से कई मरीजों को स्वस्थ कर चुके हैं. मरीज के जिन हिस्सों में पैरालिसिस अटैक के कारण प्रभाव होता है, उन पर लेप लगाकर और मालिश के जरिए मरीजों को ठीक किया जा रहा है. डॉक्टर सोनी कुमार वैद्य का तो यह दावा है कि वह पैरालिसिस के उन तमाम मरीजों को ठीक कर सकते हैं, जो कोमा में नहीं है.

'बकरी के गोबर और चिकनी मिट्टी की लेप से इलाज': डॉक्टर सोनी कुमार के इन दावों को बल यहां इलाज करा रहे मरीजों की रिकवरी से मिलता है. डॉ. सोनी के इस पद्धति से इलाज के बाद मरीज रिकवर हो रहे हैं. देश के कई राज्यों से मरीज उनके क्लीनिक में उपचार के लिए भोरंज के कैहरवीं में पहुंचते हैं. डॉ. सोनी कुमार वैद्य कहते हैं कि बकरी के गोबर (स्थानीय भाषा में मिंगन) और चिकनी मिट्टी के लेप लगाने मात्र से लकवे के मरीजों के उन अंगों को हरकत में लाया जा सकता है, जिन्हें हिलाने में मरीजों दिक्कत आ रही है.

'बकरी के गोबर में औषधि मिलाकर उपचार': डॉ. सोनी ने बताया कि यह लेप दिन मे महज आधे से एक घंटे तक लगाकर मरीज को धूप में बैठाया जाता है. यह कार्य दिन में दो दफा किया जाता है और मालिश भी सुबह की जाती है. वैद्य का कहना है कि घर में रहकर मरीज खुद भी चिकनी मिट्टी और बकरी के गोबर का इस्तेमाल कर इस उपचार को कर सकते हैं. हालांकि इसमें दो से तीन औषधि और भी मिलाई जाती हैं, लेकिन महज इस लेप मात्र से ही लकवे के मरीजों को काफी राहत मिलती है.

'महज 1500 रुपए में दो महीने में मरीज रिकवर': डॉ. सोनी कुमार वैद्य का कहना है कि महज 1500 रुपए की लागत की औषधि से 1 महीने तक मरीज का उपचार किया जा सकता है. कई दफा मरीज उनके पास नहीं पहुंच पाते हैं तो, वह डाक के माध्यम से भी दवाई भेजते हैं. मरीज यदि उन्हें बुलाते हैं तो वह घर पर जाकर भी देश के कई हिस्सों में मरीजों का उपचार कर चुके हैं. उनका कहना है कि यदि कोई मरीज भोरंज में आकर उपचार करवाना चाहता है तो, उसे रहने और खाने का अपना खर्च करना पड़ता है, लेकिन अन्य इलाज का खर्च महज 1500 है. यदि कोई मरीज इतना खर्च करने में भी सक्षम नहीं है तो वहां सिर्फ चिकनी मिट्टी और बकरी के गोबर का लेप लगाकर खुद को लकवा की बीमारी से ठीक कर सकता है.

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'15 दिनों में 45 प्रतिशत रिकवरी': लखनऊ निवासी ए नियाजी खान ने बताया कि साढ़े 3 साल पहले उन्हें मुंबई में पैरालिसिस का अटैक आया था. बीमार होने पर वह मुंबई से लखनऊ लौट आए और कई जगह उपचार कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. वह चलने में बिल्कुल असमर्थ हो गए थे और हालात यह थी कि वह बिस्तर से उठ भी नहीं पाते थे, लेकिन जब उन्होंने डॉ. सोनी के यहां अपना इलाज कराया तो वह रिकवर करने लगे. इतना ही नहीं अब उन्होंने चलना फिरना भी शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा 15 दिन के उपचार में वह बीमारी से 40 से 45% तक रिकवर कर चुके हैं.

'दूर-दूर से इलाज के लिए पहुंचते मरीज': बीकानेर निवासी तीमारदार कमलजीत ने कहा उनकी मरीज शाकुंतला देवी को 6 साल से पहले हुए पैरालिसिस के कारण बिस्तर पर रहना पड़ रहा है. पिछले कुछ दिनों से वह डॉक्टर सोनी कुमार के उपचार करवा रहे हैं और काफी अंतर देखने को मिला है. लेप और मालिश से ही मरीज में 40% सुधार देखने को मिला है.

'घर पर भी बकरी के गोबर से इलाज संभव': डॉक्टर सोनी कुमार वैद्य का कहना है कि उनके पिता और दादा भी पारंपरिक तरीके से उपचार करते थे. उन्होंने बैचलर ऑफ इलेक्ट्रो-होम्योपैथी एवं चिकित्सा और योग विज्ञान में डिप्लोमा भी किया. वह पैरालिसिस के साथ बवासीर का भी इलाज करते हैं. उन्होंने कहा पैरालिसिस का इलाज महज बकरी के गोबर के लेप और कुछ औषधियों को मिलाकर संभव है. यह बेहद ही सस्ता इलाज है और जो मरीज भारी-भरकम खर्च नहीं उठा सकते हैं, उनके लिए यह बड़ा फायदेमंद है. यदि कोई डॉक्टर के पास जाकर उपचार नहीं करवा सकता है तो वह घर में रहकर ही आसानी से उपलब्ध होने वाले बकरी के गोबर और चिकनी मिट्टी के लिए से अपना उपचार कर सकता है.

Last Updated :May 25, 2023, 6:10 AM IST
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