बिहार में सीट शेयरिंग का क्या होगा? अब तक नहीं हो सका फैसला, चिंता में डूबे हैं RJD-JDU के नेता

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By ETV Bharat Bihar Desk

Published : Jan 14, 2024, 10:17 PM IST

गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर संशय

Bihar Seat Sharing: बिहार में इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर संशय है. पांचवीं बैठक हो चुकी है, लेकिन अब तक इसको लेकर कोई फैसला नहीं हो सका है. ऐसे में बिहार की बड़ी पार्टी राजद, जदयू और राजनीतिक विशेषज्ञ का क्या मानना है, आईये जानते हैं. पढ़ें पूरी खबर.

गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर संशय

पटनाः लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी को हराने के लिए विपक्षी दलों ने इंडिया गठबंधन बनाया है. अब तक पांच बैठक हो चुकी है. शनिवार को अध्यक्ष पद के लिए तो मल्लिकार्जुन खरगे का प्रस्ताव हो गया, लेकिन सीट शेयरिंग पर फैसला नहीं हो पाया है. पांचवीं वर्चुअल बैठक में 27 में से केवल 10 दल ही शामिल हुए. ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, उद्धव ठाकरे और हेमंत सोरेन जैसे विपक्षी दल के प्रमुख नेता गायब रहे.

सीट शेयरिंग में विलंब से परेशानीः जदयू के नेता लगातार कह रहे हैं कि सीट शेयरिंग में विलंब हो रहा है. इसके कारण कठिनाई बढ़ रही है. उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, पंजाब, बिहार जैसे राज्यों में सीट शेयरिंग आसान नहीं है. सभी दल अधिक सीट चाहते हैं और कांग्रेस को उदार होने के लिए कह रहे हैं. पेच फंसने का यही कारण है.

5 बैठक के बाद भी फैसला नहींः विपक्षी दलों को एकजुट करने का अभियान नीतीश कुमार ने शुरू किया था. 23 जून को पिछले साल बैठक हुई. इसके बाद से बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली में बैठक हुई. 13 जनवरी को वर्चुअल बैठक हुई. पांच बैठकों में सीट शेयरिंग पर कभी चर्चा नहीं हुई, जबकि सबसे विवाद का मुद्दा सीट शेयरिंग ही है.

"मुख्यमंत्री लगातार कहते रहे हैं की सीट शेयरिंग जल्द से जल्द हो जाए. जितना जल्दी होगा, उतना अच्छा होगा. लोकसभा चुनाव में अब बहुत ज्यादा समय नहीं है. सीट शेयरिंग में हो रही देरी के कारण कठिनाई बढ़ रही है. जितना देर होगा, उतना ही नुकसान होगा." - संजय गांधी, एमएलसी जदयू

बिहार में कांग्रेस से फंसेगा मुद्दाः सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस की ओर से कमेटी बनाई गई है और कमेटी आप, समाजवादी पार्टी, शिवसेना से बातचीत की है लेकिन फैसला कुछ भी नहीं हुआ है. ममता बनर्जी ने तो साफ कह दिया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ही बीजेपी को चुनौती देगी. बिहार में नीतीश कुमार साफ कह रहे हैं कि कांग्रेस से कोई बातचीत नहीं होगी.

"16 सीटिंग सीट है, इसलिए उसपर तो हम लोग चुनाव लड़ेंगे ही. इसके अलावा हमारे नेता दूसरे सीटों पर बात करेंगे. इंडिया गठबंधन मजबूत है यदि मजबूत नहीं होता है तो बीजेपी जदयू को लेकर इंतजार क्यों करती?" -मदन सहनी, जदयू मंत्री

राजद गोल मटोल दे रहे हैं जबावः इधर, राजद की बात करें तो बिहार में यह पार्टी भी कम सीट में मानने वाली नहीं है. हालांकि अभी पार्टी की ओर से स्पष्ट नहीं किया गया है कि राजद कितनी सीट पर चुनाव लड़ेगी. माना जा रहा है कि राजद और जदयू अपने मुताबिक सीट की मांग कर रही है, लेकिन कांग्रेस कम में संतुष्ट नहीं होने वाली है, एसे में इंडिया गठबंधन में समस्या आ सकती है. राजद प्रवक्ता का दावा है कि बहुत जल्द इसका फैसला हो जाएगा.

"भाजपा के खिलाफ सभी एक साथ चुनाव लड़ेंगे. इसके लिए सभी दल सहमत है. आधिकारिक रूप से अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन सब कुछ सही समय पर हो जाएगा तो बहुत जल्द पता चल जाएगा." -एजाज अहमद, प्रवक्ता आरजेडी

बीजेपी से तो मुकाबला चुनौतीः भाजपा नेताओं का कहना है इंडिया गठबंधन का कोई भविष्य नहीं है. मोदी को हराने के लिए सभी इकट्ठा हुए हैं, लेकिन सबकी अपनी महत्वाकांक्षा है. बैठकों में भी अब 27 में से 10 दल शामिल हो रहे हैं. बड़े नेता बैठक से गायब रह रहे हैं. सीट शेयरिंग जैसे मुद्दे पर चर्चा ही नहीं हो रही है. ऐसे में बीजेपी से तो मुकाबला करना दूर यह लोग एक साथ लड़ ले वही बहुत है.

"27 दल इंडिया गठबंधन में है, लेकिन उसमें से 17 दल के पास एक भी सांसद नहीं है. 303 सांसदों वाले दल को चुनौती देने की बात कर रहे हैं. कैसे चुनौती देंगे यह साफ साफ दिख रहा है." -संतोष पाठक, भाजपा प्रवक्ता

क्या कहते हैं राजनीतिक विशेषज्ञः राजनीतिक विशेषज्ञ का मानना है कि इंडिया गठबंधन के घटक दलों में कोई एक दूसरे के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार नहीं है. सभी क्षेत्रीय दलों की समस्या कांग्रेस से है. कांग्रेस की समस्या भी इन्हीं दलों से है. क्षेत्रीय दलों को कांग्रेस जितना सीट देना चाह रही है, उन्हें स्वीकार नहीं है. कांग्रेस को क्षेत्रीय दल जितना सीट दे रही है कांग्रेस उस पर मान नहीं रही है.

"बंगाल उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की तरह बिहार की भी स्थिति कमोबेश वही है. नीतीश कुमार को लेकर जिस प्रकार से चर्चा थी खुद नीतीश कुमार प्रयास कर रहे थे. तबज्जो नहीं मिलने के कारण अब आने वाले समय में किनारा होते दिखेंगे."-प्रोफेसर अजय झा, राजनीतिक विशेषज्ञ

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