टिन के डिब्बे कमर में बांध शिप्रा की लहरों से दोस्ताना मुकाबला, तैराकी में चैंपियन बनने का जुनून
देसी जुगाड़ के दम पर नेशनल चैंपियन बनने के सपने. ये है जुनून और जज्बे की कहानी. उज्जैन से राहुल सिंह राठौड़ की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : April 21, 2026 at 2:28 PM IST
|Updated : April 21, 2026 at 4:01 PM IST
उज्जैन : ये कई बार साबित हो गया है कि अगर इंसान में किसी काम में सफल होने के लिए जुनून और जज्बा हो और उसमें अगर लगन और मेहनत का तड़का लग जाए तो संसाधन कोई मायने नहीं रखते. ऐसे ही सपनों को साकार करने में जुटे हैं उज्जैन के बच्चों से लेकर युवा. शिप्रा नदी में बगैर संसाधन के तैराकी में नेशनल चैंपियन बनने के लिए ये लोग घंटों तैराकी की ट्रेनिंग कर रहे हैं.
खास बात ये है कि यहां चैंपियन बनने के लिए कई बच्चे जीरो से शुरूआत करते हैं. जीरो से शुरू करके कई बच्चे नेशनल चैंपियन बन चुके हैं. इसके अलावा ये तैराक शिप्रा में कई लोगों को डूबने से भी बचा चुके हैं.
शिप्रा की लहरों से कर ली दोस्ती
गर्मी के मौसम में उज्जैन की पावन नदी शिप्रा इन दिनों सिर्फ आस्था का केंद्र ही नहीं है, बल्कि लहरों से घंटों अठखेलियां करने पहुंच रहे बच्चों के जुनून और जज्बे की गवाह है. स्कूली बच्चों के समर हॉलीडे हैं. शिप्रा नदी में 5 से 17 वर्ष तक के बच्चे ही नहीं, 60 वर्ष तक के लोग इन दिनों तैराकी के लिए पहुंच रहे हैं. खास बात यह है कि बच्चों की तैराकी की ट्रेनिंग घी-तेल के खाली टिन के डिब्बों की मदद से की जा रही है.
शिप्रा तैराक दल के सचिव संतोष सोलंकी ने ETV भारत को बताया "वह पिछले 10 साल से बच्चों को तैराकी सिखा रहे हैं. मैंने कई बच्चों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता में शामिल कराया है. कई बच्चे राज्यस्तरीय मेडल ला चुके हैं. शिप्रा तैराक दल के माध्यम से बच्चों को हर साल तैयार किया जाता है."
तैराकी में इनके सपने आसमां से ऊंचे
सपना माली की उम्र 21 वर्ष है. वह 3 बार आल इंडिया यूनिवर्सिटी लेवल पर भाग ले चुकी हैं और SGFI में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं वर्ष 2018 में. सपना माली के सपने अभी पूरे नहीं हुए. वह अभी लगातार अभ्यास कर रही हैं. उनका टारगेट पहले नेशनल चैंपियन बनना और इसके बाद एशिया लेवल और फिर ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना है.

ऐसे ही 15 साल के पर्व साहू भी है. पर्व ने राज्य स्तरीय 3 गोल्ड मेडल जीते हैं. तैराकी में भोपाल में आयोजित स्कूल गेम्स में पर्व ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. पर्व का सपना भी देश के लिए ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतना है. भारती कहार की उम्र 14 वर्ष. वह खेलो एमपी युथ गेम्स में इंदौर में 2026 जनवरी में पार्टिसिपेट कर चुकी हैं. वैष्णवी बारोड की उम्र 18 वर्ष है, वह इंदौर में SGFI स्विमिंग कॉम्पिटिशन 2025 में अंडर 19 गर्ल्स टीम चैंपियनशिप विजेता हैं. इनके सपने भी देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है.

ट्रेनिंग पूरी मुफ्त, गरीब बच्चों को प्राथमिकता
शिप्रा तैराक दल व सामाजिक एवं सांस्कृतिक कल्याण समिति उज्जैन के सचिव संतोष सोलंकी ने बताया "वर्ष 2013 में संगठन का रजिस्ट्रेशन हुआ. इसके अध्यक्ष पं. हिमांशु व्यास हैं. उपाध्यक्ष जितेंद्र कहार हैं. कोषाध्यक्ष हिमांशु जोशी और प्रचार सचिव तेजा कहार हैं. हम सभी वर्ष 2016 से तैराकी सिखा रहे हैं. 10 साल से आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चो को हम चुनते हैं, जो तैराकी के इच्छुक हैं. घी और तेल के खाली टिन के डिब्बे कमर पर बांधते हैं और सिखाते हैं."
टिन के डिब्बे ही क्यों इस्तेमाल करते हैं
शिप्रा तैराक दल के सचिव संतोष सोलंकी का कहना है "टिन के डिब्बे को पहले छोटी व पतली रस्सी से कमर पर बांधा जाता है. चूंकि डिब्बो में ढक्कन लगा दिया जाता है, इससे डिब्बों के अंदर हवा होने से, वे डूबते नहीं. हवा का घनत्व पानी से बहुत कम होता है. इसलिए डिब्बे डूबने के बजाए तैरते हैं. वहीं, बच्चों की सुरक्षा के लिए तैराक दल की टीम नदी में साथ रहती है. टीम के पास इमरजेंसी के लिए ट्यूब, लाइफ जैकेट भी होती है."

सरकार की ओर से कोई अनुदान नहीं
संतोष सोलंकी बताते हैं "संगठन में कुल 35 सदस्य हैं, जो सिर्फ तैराकी ही नहीं सिखाते, शिप्रा नदी पर आने वाले दर्शनार्थियों की डूबने से भी बचाते हैं. घाट की साफ सफाई भी करते हैं. संगठन के अध्यक्ष हिमांशु व्यास ने बताया "सरकार की और से हमे कोई अनुदान नहीं मिलता. ये सिर्फ हम 35 सदस्यो की टीम अपने ख़र्चे पर ही करती है, लेकिन दो बार प्रशासन से सम्मान जरूर मिला है. जल संवर्धन के नाम पर वर्ष 2025 में संतोष सोलंकी को और एक 2024 मे दीपक कहार को सम्मान मिला है. बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए इन्हें अत्याधुनिक उपकरण व शहर के स्विमिंग पूल में ट्रेनिंग के लिए जगह मिल जाए तो बढ़िया रहेगा."

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शासन से सुविधाएं दिलाने की मांग करेंगे

जिला खेल अधिकारी ओ.पी हारोड का कहना है "नो डाउट शिप्रा तैराक दल बहुत अच्छा कार्य कर रहा है, लेकिन बच्चों को तैराकी का सही तरीका बेहतर उपकरण और स्विमिंग पूल है, तालाब और नदियों में तैराकी सीखनाऔर वह भी कमर में टिन के डिब्बे बांधकर, यह रिस्की है. बच्चों को मदद के लिए शासन से मांग की जाएगी. अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध करवा कर स्विमिंग पूल में जगह देने की कोशिश करेंगे."

