आदिवासी छात्र संघ का विरोध प्रदर्शन जारी, साथी की तबीयत खराब, कॉलेज प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी के कॉमर्स डिपार्टमेंट में सेमेस्टर फीस की नई पॉलिसी के खिलाफ आदिवासी छात्र का विरोध प्रदर्शन जारी है.

Published : November 24, 2025 at 5:46 PM IST
रांचीः डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) के कॉमर्स विभाग में सेमेस्टर शुल्क वसूली की नई नीति के खिलाफ आदिवासी छात्र संघ का विरोध प्रदर्शन छठवें दिन भी जारी रहा. आंदोलन के बीच स्थिति तब गंभीर हो गई जब प्रदर्शन में शामिल आदिवासी छात्र संघ के एक छात्र की अचानक तबीयत खराब हो गई. साथी छात्रों ने तुरंत उन्हें उठाकर RPS अस्पताल में भर्ती कराया.
छात्रों का कहना है कि इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन का कोई प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचा और न ही छात्र का हालचाल लेने कोई कॉलेज अधिकारी अस्पताल गए. इससे छात्रों का आक्रोश और बढ़ गया है.
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि विश्वविद्यालय परिसर में एंबुलेंस तक की व्यवस्था नहीं है. आकस्मिक चिकित्सा सुविधा के अभाव में छात्रों को अपने साथी को निजी साधन से अस्पताल ले जाना पड़ा. छात्रों ने कहा कि जब विश्वविद्यालय की स्थिति इतनी जर्जर हो तो स्टूडेंट्स अपनी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करे.
आंदोलन जारी रहेगाः आदिवासी छात्र
आदिवासी छात्र संघ के साथी बादल भोक्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन प्रति सेमेस्टर में शुल्क वसूली की नीति को तत्काल वापस ले. यह नीति गरीब और आदिवासी छात्रों के हित में नहीं है. हम हार मानने वाले नहीं हैं, आंदोलन जारी रहेगा.
छात्रों का आरोप है कि कॉमर्स विभाग में बिना छात्र हितों का ध्यान रखे शुल्क संरचना में अचानक बदलाव किया गया है. कई आर्थिक रूप से कमजोर छात्र इसे सहन करने की स्थिति में नहीं हैं, इसलिए मजबूर होकर उन्हें आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा.
विश्वविद्यालय परिसर में हुई नारेबाजी
आंदोलनकारी छात्रों ने बताया कि इस विरोध प्रदर्शन की वजह से एक विद्यार्थी की तबीयत बिगड़ना प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है. फिर भी विश्वविद्यालय प्रशासन न तो वार्ता के लिए आगे आया और न ही छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर कोई स्पष्टीकरण दिया.
इस दौरान विश्वविद्यालय परिसर में जमकर नारेबाजी हुई. छात्रों ने आरोप लगाया कि DSPMU की वर्तमान व्यवस्था छात्रों के हितों को दरकिनार कर रही है. कई प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक शुल्क वसूली की नई नीति वापस नहीं ली जाती, तब तक यह आंदोलन लगातार जारी रहेगा.
हमारी चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया गयाः छात्र संघ
उधर, आंदोलन के बीच विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और कुलपति के खिलाफ भी कई गंभीर आरोप लगाए गए. छात्रों का कहना है कि उन्होंने बार-बार ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याएं बताईं, लेकिन प्रशासन ने हमारी चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया. छात्र संघ ने साफ कहा है कि जब तक विश्वविद्यालय सुचारू व्यवस्था, चिकित्सा सुविधा और फीस नीति पर स्पष्ट समाधान नहीं देता, तब तक उनका संघर्ष रुकने वाला नहीं है.
लगातार छठवें दिन जारी इस विरोध ने विश्वविद्यालय की प्रशासनिक प्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. छात्रों का कहना है कि अगर DSPMU जैसे प्रमुख विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य सुविधाओं से लेकर फीस नीति तक में अव्यवस्था है तो स्टूडेंट्स खुद को कैसे सुरक्षित और समर्थ महसूस करें?
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