हरीश चौधरी ने लगाए भाजपा पर गंभीर आरोप, बोले- मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा
हरीश चौधरी ने भाजपा पर अल्पसंख्यक-अनुसूचित वर्ग को निशाना बनाने का गंभीर आरोप लगाया.

Published : January 18, 2026 at 8:50 PM IST
बाड़मेर: मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी एवं बायतु विधायक हरीश चौधरी ने रविवार शाम बाड़मेर जिला मुख्यालय पर पत्रकारों से बातचीत की. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने के गंभीर आरोप लगाए. चौधरी ने कहा कि प्रत्येक भारतीय नागरिक को संविधान द्वारा प्रदत्त मताधिकार प्राप्त है. इसे किसी भी स्थिति में छीना नहीं जा सकता. उन्होंने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची में हो रही अनियमितताएं लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ हैं.
बीएलए-2 फॉर्म्स में फर्जीवाड़े के दावे: हरीश चौधरी ने बताया कि भाजपा के बीएलए-2 (बूथ लेवल एजेंट-2) से संबंधित कई फॉर्म संदिग्ध पाए गए हैं. स्वयं बीएलए-2 द्वारा यह स्वीकार किया गया है कि उनके नाम से प्रस्तुत फॉर्म फर्जी हैं और उन पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों के अनुसार एक बीएलए-2 एक दिन में अधिकतम 10 नामों के लिए ही फॉर्म-7 प्रस्तुत कर सकता है, लेकिन यहां सैकड़ों की संख्या में फॉर्म दिए गए हैं, जो स्पष्ट रूप से अवैधानिक है. ऐसे मामलों में प्रशासन को स्वत: संज्ञान लेकर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए.
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अल्पसंख्यक एवं पिछड़े वर्गों को निशाना बनाने का आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि जिले भर में बल्क वोट हटाने की कोशिश की जा रही है. उदाहरण देते हुए चौधरी ने कहा कि अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के मतदाताओं को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है. चौधरी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी देश के हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. इस मुद्दे पर सभी स्तरों पर संघर्ष किया जाएगा. जिला प्रशासन के समक्ष सभी तथ्यों को प्रस्तुत कर न्यायसंगत कार्रवाई की मांग की जाएगी. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन राजनीतिक दबाव में कार्य करता है तो उसकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होंगे. आखिर में उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर सदन तक लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करेगी.
मतदाता सूची में अन्य गंभीर अनियमितताएं: हरीश चौधरी ने बताया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में कई गंभीर और आपत्तिजनक मामले सामने आए हैं. सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त कर्मचारियों के मताधिकार को भी हटाने की कोशिश की गई है, जो पूरी तरह अनुचित और असंवैधानिक है. इसके अलावा, निरक्षर महिलाओं के कथित तौर पर झूठे हस्ताक्षर कर उनके नाम मतदाता सूची से काटे जाने के मामले भी प्रकाश में आए हैं. चौधरी ने कहा कि इस तरह की घटनाएं मतदाता सूची की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं. इनकी निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है.
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