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संथाली भाषा में बनी फिल्म 'आंगेन' ने रचा इतिहास, जमशेदपुर के रवि राज मुर्मू को मिला नेशनल अवार्ड, सीएम ने दी बधाई

संथाली भाषा में बनी 'आंगेन' फिल्म को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में 'बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर' के लिए चुना गया है.

72TH NATIONAL FILM AWARD
फिल्म आंगेन का दृश्य (ईटीवी भारत)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : July 19, 2026 at 12:33 PM IST

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रांची: दादा-दादी की सुनाई लोककथाएं, गांव की मिट्टी की खुशबू और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश. इन्हीं भावनाओं को पर्दे पर उतारने वाली झारखंड की संथाली लघु फिल्म 'आंगेन' ने राष्ट्रीय स्तर पर इतिहास रच दिया है. पहली बार किसी संथाली फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सम्मान मिला है. शनिवार को दिल्ली में 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की घोषणा के दौरान गैर फीचर फिल्म की श्रेणी में लघु फिल्म 'आंगेन' को 'बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर' के लिए चुना गया है.

'आंगेन' फिल्म के निर्माता रवि राज से खास बातचीत

इस खास उपलब्धि के बाद ईटीवी भारत के ब्यूरो चीफ राजेश कुमार सिंह ने फिल्म के निर्माता-निर्देशक रवि राज मुर्मू से फोन पर विशेष बातचीत की. इस बातचीत में रवि राज ने बताया कि आखिर कैसे बचपन की लोककथाओं से 'आंगेन' की परिकल्पना हुई और क्यों यह फिल्म आज के युवाओं को अपनी मिट्टी, अपनी भाषा और अपनी संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश देती है. उनका कहना है कि गांव की मिट्टी, जंगल, नदी और आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत ने इस फिल्म की कहानी को आकार दिया.

72TH NATIONAL FILM AWARD
फिल्म आंगन को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए चुना गया (सौ. IPRD Jharkhand)

रवि राज ने बताया इस फिल्म का मूल उद्देश्य

रवि राज मुर्मू ने बताया कि फिल्म का मूल उद्देश्य आज के सामाजिक बदलाव को सामने लाना था. उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा रोजगार और बेहतर भविष्य की तलाश में गांव छोड़कर महानगरों की ओर जा रहे हैं. इस पलायन की वजह से वे अपनी भाषा, संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक पहचान से दूर होते जा रहे हैं. यही चिंता इस फिल्म की कहानी का केंद्र है.

उन्होंने कहा कि 'आंगेन' यह संदेश देती है कि आधुनिकता जरूरी है, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़ाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है. अगर युवा अपनी मिट्टी और सांस्कृतिक विरासत से रिश्ता बनाए रखेंगे, तभी उनकी पहचान भी सुरक्षित रहेगी. रवि राज मुर्मू ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मिला यह सम्मान सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरी संथाली भाषा, झारखंड की लोकसंस्कृति और उन अनगिनत लोककथाओं का सम्मान है, जो पीढ़ियों से लोगों की स्मृतियों में जीवित हैं.

72th national film award
फिल्म आंगेन की शूटिंग करते हुए (ईटीवी भारत)

क्या दिखाया गया है इस लघु फिल्म के जरिए

लगभग 12 मिनट 10 सेकंड की यह फिल्म संथाली भाषा में बनाई गई है. फिल्म की कहानी एक रहस्यमयी लोककथा पर आधारित है. इसमें एक देवी स्वर्गीय आकर्षण के प्रभाव में एक साधारण चरवाहे युवक के प्रेम में पड़ जाती है. देवी अपने सम्मोहन से युवक को दिव्य लोक में ले जाती है. समय बीतने के बाद युवक को जब अपनी वास्तविक पहचान और धरती पर बसे अपने गांव की याद आती है, तो वह वापस लौटने की यात्रा शुरू करता है. लेकिन उसे यह कड़वी सच्चाई पता चलती है कि उसका प्रिय गांव अब उसे कहीं नहीं मिलता. इस तरह वह देवलोक और मानव लोक के बीच एक ऐसे संसार में भटकने को विवश हो जाता है, जहां उसकी पहचान और अस्तित्व दोनों सवालों के घेरे में हैं.

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फिल्म आंगेन में दिखाई गई गांव की तस्वीर (ईटीवी भारत)

कौन हैं रवि राज

रवि राज मुर्मू झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के कुमीरमुंडी गांव के रहने वाले हैं. रवि राज मुर्मू के पिता महेश्वर मुर्मू एक साधारण किसान है. बचपन में ही उनकी मां कन्या मुर्मू का निधन हो गया था. इसके बाद उनकी दूसरी मां मीनू मुर्मू ने उनका पालन-पोषण किया और उनके फिल्म बनाने के सपने को हमेशा प्रोत्साहित किया.

उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा गांव में पूरी की. इसके बाद जमशेदपुर के पास स्थित सिटी कॉलेज से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की. वर्ष 2016 में उन्होंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे से एडिटिंग में पीजी डिप्लोमा किया, जहां उन्होंने फिल्म निर्देशन और संपादन की बारीकियां सीखीं.

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फिल्म में दिखाए गए कैरेक्टर की तस्वीर (ईटीवी भारत)

फिल्म के प्रमुख किरदारों का ब्यौरा

इस लघु फिल्म में जीतराय हांसद ने 'ओल्ड सुकु' की मुख्य भूमिका निभाई है. उनके अभिनय के माध्यम से कहानी के अनुभवी और जीवन संघर्षों से जुड़े पात्र को दर्शाया गया है. रामचंद्र मार्डी 'यंग सुकु' यानी युवा सुकु के किरदार में नजर आए हैं. उन्होंने मुख्य पात्र के युवावस्था के जीवन, संघर्ष और भावनाओं को पर्दे पर उतारा है. सलोनी मुर्मू ने फिल्म में देवी की भूमिका निभाई है. उनका किरदार लोकआस्था और आध्यात्मिक विश्वास का प्रतीक है. फुलमुनी हेंब्रम ने मां की भूमिका निभाते हुए परिवार, ममता और संस्कारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दी शुभकामनाएं

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में संथाली फिल्म 'आंगेन' के निर्देशक रवि राज मुर्मू को 'बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर' का राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें बधाई दी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि केवल रवि राज मुर्मू की व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पूरे झारखंड और संथाली भाषा के लिए गर्व का क्षण है.

सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि फिल्म 'आंगेन' के माध्यम से संथाली भाषा, संस्कृति और लोककथाओं की समृद्ध विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है. उन्होंने इसे झारखंड की उभरती रचनात्मक प्रतिभाओं का प्रतीक बताते हुए विश्वास जताया कि रवि राज मुर्मू की सफलता राज्य के युवा फिल्मकारों और कलाकारों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को सिनेमा के माध्यम से संरक्षित और आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगी.

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