उत्तराखंड में सीटी है आपदा से अलर्ट करने का साधन, धराली में भी किया था सावधान
उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में साइरन नहीं सीटी करती है लोगों को सचेत, उत्तरकाशी के धराली में देखी तस्वीर.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 6, 2025 at 10:21 AM IST
देहरादून (उत्तराखंड): आप ने युद्ध के दौरान शहरों में साइरन बजते तो सुना होगा, लेकिन उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा के दौरान सीटी साइरन का काम करती है. क्योंकि प्रदेश में अधिकतर गांव बिखरे हुए भौगोलिक स्थिति में होते हैं और पहाड़ियों के आसपास ही गांव बसे होते हैं. जहां भी आपदा आती हैं, फंसे लोगों को बचाने के लिए आसपास के गांव के लोग सीटी बजाकर सचेत करते हैं. बीते दिन उत्तरकाशी के धराली में भी सीटी बजाकर लोगों को सावधान करने का काम किया था, लेकिन आपदा के शोर में सीटी सुनाई नहीं दी.
सीटी करती है लोगों को अलर्ट: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में खड़ी चढ़ाई और ढलान होने के कारण जल्द एक गांव से दूसरे गांव तक पहुंचता काफी मुश्किल होता है. यहां तक कि कभी इंसानी आबादी के बीच जंगली जानवर आ जाते हैं तो सीटी बजाकर ही अलर्ट किया जाता है. जिसके बाद लोग सतर्क हो जाते हैं. वहीं बीते दिन कुछ ऐसी ही तस्वीर उत्तरकाशी जिले के धराली में देखने को मिली, जहां कुछ लोग घटना का वीडियो बना रहे थे तो कुछ लोग सीटी बजाकर लोगों को सचेत कर रहे थे. लेकिन पल भर में ही आपदा से धराली कस्बे का नामोनिशान मिट गया और कई जिंदगियां मलबे में दफन हो गई.
पल भर में मिट गया धराली का वजूद: उत्तरकाशी जिले के धराली में मंगलवार को आई प्राकृतिक देश और प्रदेश को हिलाकर रख दिया है. आधे मिनट में ही कई जिंदगियां काल के गाल में समा गई. घटना का जो वीडियो सामने आया वो काफी भयावह था, खीर गंगा ने धराली कस्बे को ऐसे जख्म दिए हैं, जो ताउम्र नहीं भर पाएंगे. लोगों के आंखों में अपनों के खोने का गम और इस भयावह घटना का खौफ साफ दिखाई दे रहा है. लोग समझ ही नहीं पा रहे हैं, अचानक से ये क्या हो गया. उत्तरकाशी के धराली गांव में आई आपदा शासन- प्रशासन के लिए बड़ी चुनौंती बन गई है. आपदा के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.

धराली में रेस्क्यू अभियान तेज: आपदा वाले स्थान पर सेना के साथ ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस रेस्क्यू कार्य में जुटी हुई है. खीर गंगा में आए मलबे और बोल्डर से धराली के कई घर दब चुके हैं. हादसे वाले स्थान पर दलदल बन गया है. जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में टीमों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकत है. उत्तरकाशी के धराली अभी तक आपदा में 5 लोगों की मौत हो चुकी है. बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में लोग लापता हैं. जबकि बचाव राहत टीम ने 190 लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया है.
हर साल आपदा देती है जख्म: गौर हो कि हर साल उत्तराखंड में मानसूनी बारिश कहर बनकर टूटती है. भारी बारिश से आई आपदा लोगों को गहरा जख्म देती है. पूर्व में आई आपदा से कई गांव जमींदोज हो गए हैं. वहीं उत्तरकाशी के धराली की ताजा घटना ने प्रदेश के भयंकर आपदा के जख्मों को फिर हरा कर दिया है.
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