ग्रीन बेल्ट में अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त, वन विभाग की मिलीभगत की आशंका, सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस
ग्रीन बेल्ट में कथित अंधाधुंध-अवैध निर्माण के मामले में अदालत ने स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी किए हैं.
By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 21, 2026 at 9:36 AM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के ग्रीन बेल्ट में कथित अंधाधुंध और अवैध निर्माण के मामले में कड़ा रुख अपनाया है. चक्कर निवासी वाई.आर. डडवाल ने पत्र लिखकर शिमला के बालूगंज और चक्कर-टूटू क्षेत्र के बीच अवैध निर्माण के आरोप लगाए थे. अदालत ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी किए हैं. मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण के सचिव को वन विभाग के आला अधिकारियों और नगर निगम शिमला के कमिश्नर के साथ विवादित स्थल का संयुक्त निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं. निरीक्षण के बाद विस्तृत रिपोर्ट में यह बताना होगा कि निर्माण के लिए वैध मंजूरियां ली गई थीं या नहीं और जमीन की वास्तविक प्रकृति क्या है.
ग्रीन बेल्ट में अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त
अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि शिमला के एक प्रमुख व्यवसायी द्वारा कथित तौर पर पेड़ों की कटाई और वन भूमि पर अतिक्रमण कर बड़े पैमाने पर निर्माण किए जाने के मामले में वन विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता या मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता. अदालत के समक्ष पेश दस्तावेजों और गूगल मैप्स के तुलनात्मक रिकॉर्ड से यह सामने आया कि वर्ष 2015 से 2019 के बीच संबंधित क्षेत्र घनी हरियाली वाला था, जबकि वर्ष 2025 के गूगल मैप और हालिया तस्वीरों में वहां 5 से 6 मंजिला ऊंची दो बड़ी इमारतों के ढांचे दिखाई दे रहे हैं. कोर्ट ने यह भी गंभीरता से लिया कि निर्माण स्थल तक लोअर चक्कर-टूटू रोड से कथित तौर पर अवैध सड़क बनाई गई और इस दौरान पेड़ों की कटाई और जंगल में बड़े पैमाने पर मलबा डंप किया गया.
राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस
मामला चक्कर निवासी वाई.आर. डडवाल की ओर से अदालत को भेजे गए पत्र से सामने आया, जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया. याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत तस्वीरों और रिकॉर्ड में निर्माण स्थल तक सड़क बनाए जाने, पेड़ों की कटाई और मलबे की डंपिंग के आरोप सामने आए. अदालत के अनुसार मलबे का एक हिस्सा ऐतिहासिक कार्ट रोड तक भी पहुंच गया है. कोर्ट ने यह चिंता भी जताई कि सड़क के किनारे पेड़ों को असुरक्षित छोड़ दिया गया है और भविष्य में वे गिर सकते हैं. अब संयुक्त निरीक्षण में यह जांच होगी कि 5-6 मंजिला इमारतों और सड़क के निर्माण के लिए नगर निगम से आवश्यक मंजूरियां ली गई थीं या नहीं, जमीन वन भूमि है या नहीं और निर्माण वैध है या नहीं. यदि आवश्यक स्वीकृतियां नहीं मिलीं तो निर्माण कार्य तत्काल रोकने के आदेश जारी किए जाएंगे. मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर 2026 को होगी.
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