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पहली पत्नी की मौत होने पर दूसरी वाइफ को फैमिली पेंशन का अधिकार नहीं, हाईकोर्ट का अहम फैसला

अदालत ने कहा, विवाह के आधार पर दूसरी पत्नी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद पेंशन पर कानूनी अधिकार का दावा नहीं कर सकती.

Himachal High Court on Second Wife Pension
दूसरी पत्नी पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का अहम फैसला (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : August 21, 2026 at 8:19 AM IST

3 Min Read
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शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारी की पहली पत्नी को मिल रही पारिवारिक पेंशन उसकी मृत्यु के बाद दूसरी पत्नी को नहीं दी जा सकती, यदि दूसरा विवाह पहली पत्नी के जीवित रहते किया गया था. न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने दमयंती देवी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि पहली पत्नी के जीवित रहते किया गया दूसरा विवाह कानून की नजर में वैध विवाह नहीं है. अदालत के इस फैसले के बाद याचिकाकर्ता की अपने नाम पर पारिवारिक पेंशन जारी करने और पिछला बकाया देने की मांग भी खारिज हो गई.

दूसरी पत्नी को पेंशन का अधिकार नहीं

अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि जब पहली शादी कानूनन अस्तित्व में थी, उस दौरान किया गया दूसरा विवाह वैध वैवाहिक संबंध स्थापित नहीं करता. ऐसे विवाह के आधार पर दूसरी पत्नी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन पर कानूनी अधिकार का दावा नहीं कर सकती. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पहली पत्नी के निधन के बाद भी उस व्यक्ति से किया गया दूसरा विवाह वैध नहीं हो जाता और न ही दूसरी पत्नी को केवल पहली पत्नी की मृत्यु के आधार पर पारिवारिक पेंशन का अधिकार प्राप्त होता है. इसलिए दमयंती देवी की ओर से पेंशन और बकाया राशि जारी करने की मांग को स्वीकार करने का कोई आधार नहीं था.

क्या है पूरा मामला?

मामले के अनुसार, दमयंती देवी के पति खूब राम शिक्षा विभाग में जूनियर बेसिक टीचर के पद पर कार्यरत थे और 1 जून 1996 को सेवानिवृत्त हुए थे. उनकी पहली पत्नी खिमी देवी थीं. पहली पत्नी से कोई संतान न होने के कारण खूब राम ने 5 दिसंबर 1970 को दमयंती देवी से दूसरा विवाह किया था. इसके बाद 13 अक्टूबर 2014 को खूब राम की मृत्यु हो गई. उनकी पहली कानूनी पत्नी खिमी देवी को नियमानुसार पारिवारिक पेंशन मिलती रही. 2 जुलाई 2023 को खिमी देवी की भी मृत्यु हो गई. इसके बाद दमयंती देवी ने खुद को जीवित विधवा बताते हुए पारिवारिक पेंशन अपने नाम जारी करने और पिछले बकाये का भुगतान करने की मांग की. मांग पूरी न होने पर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अदालत ने याचिका खारिज कर दी.

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