सरोवर नगरी में तिब्बति नव वर्ष लोसर का पूजा-अर्चना के साथ समापन, ये है परंपरा

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Published : Feb 15, 2021, 10:22 AM IST

Nainital

तिब्बती समुदाय के नव वर्ष के रूप में मनाए जाने वाले तीन दिवसीय लोसर का बीते दिन समापन हो गया. तीसरे दिन बौद्ध समुदाय के लोगों ने मठ यानी मंदिर में एकत्रित होकर पूजा-अर्चना की और एक दूसरे को नए साल की शुभकामनाएं दी.

नैनीताल: सरोवर नगरी नैनीताल में तिब्बती समुदाय के नव वर्ष के रूप में मनाए जाने वाले तीन दिवसीय लोसर का रविवार को समापन हो गया है. इस दौरान तिब्बती समुदाय के लोगों ने मठ में पूजा अर्चना की और विश्व शांति और धर्मगुरु दलाई लामा की दीर्घायु की कामना की. लोसर के मौके पर तिब्बती समुदाय की महिलाओं और पुरुषों ने पारंपरिक परिधान में मंगल गीत गाए.

लोसर का पूजा-अर्चना के साथ समापन

तिब्बती समुदाय में लोसर का पर्व 3 दिनों तक चलता है. जिसमें पहले दिन घरों में स्थित मंदिरों में पूजा-अर्चना की जाती है. वहीं दूसरे दिन एक-दूसरे के घरों में जाकर नए साल की बधाई और पूजा-अर्चना का कार्यक्रम किया जाता है. जबकि तीसरे दिन बौद्ध समुदाय के सभी लोग मठ यानी मंदिर में एकत्रित होकर पूजा-अर्चना करते हैं और एक दूसरे को नए साल की शुभकामनाएं देते हैं.

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इस दौरान बौद्ध समुदाय के लोगों के द्वारा इस दिन मठों, प्रतिष्ठानों समेत विभिन्न स्थानों पर मंत्र लिखें रंग-बिरंगे झंडे लगाए जाते हैं. जो 5 रंग के होते हैं जिसमें हरा जो हरियाली,लाल अग्नि, सफेद शांति और नीला जल और पीला रंग जमीन को दर्शाता है. माना जाता है कि हवा के बहाव में जितनी बार झंडे लहराएंगे उतनी ही ज्यादा विश्व में सुख-शांति और समृद्धि का संदेश फैलेगा. तिब्बती समुदाय के यशी थोकते ने बताया कि इस वर्ष तिब्बती समुदाय के लोग तिब्बती कैलेंडर के अनुसार 2148वां नव वर्ष मना रहे हैं और इसका प्रतीक बैल है. जबकि नए साल का तत्व लोहा हैं.

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इस दौरान तिब्बती समुदाय की महिला रिमझिम ने बताया नए साल को मनाने के लिए बौद्ध समुदाय के लोग पारंपरिक वस्त्र (छुआ) पहनकर मठ पहुंचते हैं और पूजा अर्चना करते हैं. इस दौरान सभी लोग अपने बच्चों को अपने लोक पर्व और संस्कृति के बारे में बताते हैं. ताकि आने वाले समय में उनके बच्चे अपनी संस्कृति को जीवित रख सकें.

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