इनवेस्टर्स समिट से चमकेगा पहाड़!, आएंगी कंपनियां या सिर्फ होंगे करार ?

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Published : Apr 14, 2023, 1:41 PM IST

Updated : Apr 14, 2023, 10:59 PM IST

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उत्तराखंड में निवेश को लेकर एक बार फिर इन्वेस्टर्स समिट 2023 आयोजित कराने की कवायद शुरू हो गई है. साल 2018 में तत्कालीन त्रिवेंद्र सरकार में इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन हुआ था, जिसमें 673 निवेश प्रस्तावों पर एमओयू किया गया था, लेकिन यह समिट परवान नहीं चढ़ पाई. अभी तक मात्र 35 हजार करोड़ का ही निवेश हो पाया. लिहाजा, विपक्ष भी इस बहाने सरकार को घेरने का प्रयास कर रहा है. जानिए साल 2018 में कराए गए इन्वेस्टर समिट की क्या स्थिति है?

उत्तराखंड में निवेश को लेकर फिर आयोजित होगा इन्वेस्टर्स समिट

देहरादूनः उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान करोड़ों रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं तो वहीं अब उत्तराखंड सरकार भी इसी साल अक्टूबर-नवंबर में इन्वेस्टर्स समिट कराने जा रही है. इससे पहले साल 2018 में तत्कालीन त्रिवेंद्र सरकार में इन्वेस्टर्स समिट कराया गया था. उसमें हजारों करोड़ रुपए के प्रस्ताव मिले थे, लेकिन धरातल पर कुछ होता दिखाई नहीं दिया. वहीं, प्रदेश में एक बार फिर से होने जा रहे इन्वेस्टर्स समिट को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. क्योंकि, इन्वेस्टर्स समिट के दौरान करोड़ों रुपए का खर्च आता है.

उत्तराखंड की धामी सरकार विकास को गति देने और युवाओं को रोजगार देने के लिए इसी साल अक्टूबर-नवंबर महीने में इन्वेस्टर्स समिट करने जा रही है. जिसकी तैयारी के लिए सीएम धामी ने सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है. उत्तराखंड में निवेश को लेकर देश दुनिया के उद्योगपतियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने निवेशक सम्मेलन कराने का निर्णय लिया है. इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है. इन्वेस्टर्स समिट के जरिए सरकार, रोजगार और राजस्व बढ़ाने पर फोकस कर रही है. साथ ही पर्यटन, आईटी, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, बागवानी, एरोमा, इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिक व्हीकल में निवेश को प्रोत्साहित करने पर जोर है.

इन्वेस्टर्स समिट 2018 में 673 निवेश प्रस्ताव पर बनी थी सहमतिः दरअसल, राज्य गठन के बाद साल 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पहली बार इन्वेस्टर्स समिट को एक बड़े स्तर पर आयोजित किया था. उस दौरान इन्वेस्टर्स समिट में कृषि एवं बागवानी, बायोटेक्नोलॉजी, पर्यटन, आईटी, ऊर्जा, हेल्थ केयर, अर्बन इन्फ्राट्रक्चर, आयुष वैलनेस सेक्टर और विनिर्माण उद्योग को शामिल किया गया. उत्तराखंड में इन सेक्टरों में निवेश की काफी संभावना है.

लिहाजा, इसको लेकर राज्य सरकार ने इन्वेस्टर्स समिट में इन क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया और उम्मीद थी कि इस इन्वेस्टर्स समिट के दौरान करीब 80 हजार करोड़ रुपए तक के निवेश पर एमओयू (MoU) साइन हो जाएगा, लेकिन खास बात ये रही कि इन्वेस्टर्स समिट के दौरान करीब 1.25 लाख करोड़ के 673 निवेश प्रस्ताव पर सहमति बनी थी.

इन्वेस्टर्स समिट में सरकार के करोड़ों रुपए हुए थे खर्चः साल 2018 में देहरादून में हुए इन्वेस्टर्स समिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. समिट में कई देशों के राजदूत, कई देशों के बड़े उद्योगपतियों के साथ ही उद्योग जगत से जुड़े तमाम वर्ग के व्यापारी भी शामिल हुए थे. इतना ही नहीं 7 अक्टूबर 2018 को हुए इन्वेस्टर्स समिट में सरकार के करोड़ों रुपए खर्च हुए थे.

क्योंकि, समिट में निवेशकों को बुलाने के लिए सरकार ने देश के कई महानगरों में रोड शो के साथ ही विदेशी इन्वेस्टर्स को लुभाने के लिए कई देशों का दौरा भी किया था. साथ ही देहरादून के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम से बृहद स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था. लिहाजा, उस दौरान इन्वेस्टर्स समिट कराने में सरकार के करोड़ों रुपए खर्च हुए थे, लेकिन पिछले चार साल में मात्र 30 हजार करोड़ रुपए के निवेश ही धरातल पर उतर पाया.
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कोरोना संक्रमण की वजह से परवान नहीं चढ़ पाई समिटः उत्तराखंड में इसी साल अक्टूबर-नवंबर महीने में होने वाले इन्वेस्टर समिट के सवाल पर उद्योग मंत्री चंदन रामदास ने कहा कि एमएसएमई सेक्टर देश के युवाओं को रोजगार देने वाला सबसे बड़ा सेक्टर है. G20 के माध्यम से सरकार ने इसे आगे बढ़ाने का काम किया है. साल 2018 में जो इन्वेस्टर्स समिट हुआ था, उस दौरान 1 लाख 25 हजार करोड़ का एमओयू साइन हुआ था, लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के चलते यह परवान नहीं चढ़ पाई और मात्र 35 हजार करोड़ का ही निवेश हो पाया.

नई औद्योगिक नीति से प्रदेश में आएंगे उद्योगः उद्योग मंत्री चंदन रामदास का कहना है कि इस बार प्रयास है कि प्रदेश में फिर से इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से औद्योगिक इकाइयां लाई जाएं. इस बाबत सरकार ने प्रयास शुरू कर दिए हैं. प्रदेश में औद्योगिक इकाइयां लाने के लिए महाराष्ट्र, अहमदाबाद और बेंगलुरु में कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं. राज्य सरकार ने विशेष स्टार्टअप नीति लागू की है. नए औद्योगिक पैकेज भी लेकर आए हैं.

लिहाजा, इसके माध्यम से उत्तराखंड राज्य में उद्योग बढ़ाने पर सहयोग होगा. सरकार ने कई नीतियां और सब्सिडी भी शुरू की है. ऐसे में नई औद्योगिक नीति के जरिए प्रदेश के स्थानीय लोग जिनके पास 3 से 30 एकड़ तक की जमीन है, अगर वो 200 करोड़ रुपए इन्वेस्ट कर 500 बेरोजगारों को रोजगार देते हैं, तो इस नीति के जरिए उद्योग के कैपिटल को अगले 10 सालों में सरकार रिटर्न कर देगी.

ज्यादातर कंपनियों को जमीन उपलब्ध नहीं करा पाई सरकारः साल 2018 में हुए इन्वेस्टर समिट के दौरान जिन कंपनियों ने इन्वेस्ट के लिए एमओयू साइन किया था, वो धरातल पर नहीं उतर पाई हैं. इसके सवाल पर उद्योग मंत्री चंदन रामदास ने कहा कि कई कंपनियों को सरकार जमीन उपलब्ध नहीं करा पाई. लिहाजा, बहुत सारी कमियां सरकार से भी हुईं, लेकिन इसे देखते हुए सिंगल विंडो सिस्टम सरकार लेकर आई है. ताकि उद्यमियों को अनावश्यक चक्कर न काटना पड़े. इसके लिए सरकार सभी सुविधाएं देगी. ताकि व्यवसायी यहां आएं. साथ ही मंत्री ने कहा कि तमाम लोगों ने उत्तराखंड में इन्वेस्ट करने की इच्छा जाहिर की है. जिसके चलते इन्वेस्टर्स समिट आयोजित होने जा रहा है.

कम खर्च में ज्यादा निवेश की संभावनाओं को तलाशेगी सरकारः इतना ही नहीं साल 2018 में हुए इन्वेस्टर्स समिट से भी सबक लेते हुए राज्य सरकार इस बार कई अहम बदलाव कर सकती है. कुल मिलाकर कम खर्च में ज्यादा निवेश की संभावनाओं को सरकार आगामी इन्वेस्टर्स समिट में तलाशेगी. साथ ही आगामी इन्वेस्टर्स समिट में सरकार उन्हीं निवेशकों के साथ एमओयू साइन करेगी, जो राज्य में निवेश के लिए इच्छुक और समर्पित होंगे. उधर, इन्वेस्टर्स समिट के लिए नोडल अधिकारी बनाए जाने के बाद से ही प्रदेश में इन्वेस्टर्स समिट को लेकर सियासत भी शुरू हो गई है. जिसमें बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे पर आरोप लगाते नजर आ रहे हैं.

इन्वेस्टर्स समिट के जरिए एक बार फिर जनता के पैसे लुटाएगी सरकारः वहीं, इस साल अक्टूबर नवंबर में आयोजित होने जा रहे इन्वेस्टर्स समिट को लेकर कांग्रेस सवाल खड़े करती नजर आ रही है. कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी का कहना है कि साल 2018 में जो इन्वेस्टर्स समिट हुआ था, उसमें 80 से 100 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे. जो अभी तक सरकार को नहीं मिल पाया है, जबकि तत्कालीन त्रिवेंद्र सरकार ने इस बात का दावा किया था कि हजारों करोड़ का निवेश आएगा, लेकिन कुछ भी नहीं आया. ऐसे में धामी सरकार अब इन्वेस्टर्स समिट कराने जा रही है. लिहाजा, इस बार फिर सरकार जनता के कमाई का पैसा लुटाने की तैयारी कर रही है.

उद्योगों को बढ़ाने में कारगर साबित होगी इन्वेस्टर्स समिटः इस पूरे मामले पर बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता मधु भट्ट का कहना है कि इस साल अक्टूबर नवंबर महीने में जो इनवर्स्ट्स समिट होने जा रहा है, उससे प्रदेश को काफी फायदा मिलेगा. क्योंकि, प्रदेश में कई क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं. जिसको देखते हुए ही प्रदेश से पलायन रोकने और युवाओं को रोजगार देने के साथ ही उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए इन्वेस्टर्स समिट कराने जा रहे हैं.
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इन्वेस्टर्स समिट के बाद करीब 35 हजार करोड़ रुपए हुआ इन्वेस्टः साल 2018 में हुए इन्वेस्टर्स समिट के बाद से दिसंबर 2022 तक प्रदेश में करीब साढ़े 35 हजार करोड़ रुपए का इन्वेस्टमेंट किया गया है. जिसके तहत प्रदेश में साल 2019 से दिसंबर 2022 तक 6,638 इंडस्ट्री को परमिशन दी गयी. इनमें 6,638 एमएसएमई और 176 बड़े उद्योग शामिल हैं. इन इंडस्ट्री के जरिए 354,96.83 करोड़ रुपए इन्वेस्ट किया जाना है. जिसमें 18,791.34 करोड़ एमएसएमई और 16,705.49 करोड़ के बड़े उद्योग का शामिल हैं. इनसे करीब 1 लाख 26 हजार 936 लोगों को रोजगार मिलेगा.

इन्वेस्टर्स समिट के बाद प्रदेश में उद्योगों की स्थितिः वित्तीय वर्ष 2019-20 में 1,562 एमएसएमई को अनुमति दी गई. इनमें 4,350.05 करोड़ के इन्वेस्टमेंट के साथ ही 3,57,35 लोगों को रोजगार मिलेगा. इसी कड़ी में 56 बड़े उद्योगों को अनुमति दी गई, जिसमें 7,656.65 करोड़ के निवेश के साथ ही 8,448 लोगों को नौकरी मिलेगी.

वित्तीय वर्ष 2020-21 में 1,495 एमएसएमई को अनुमति दी गई. जिसमें 2,776 करोड़ के इन्वेस्टमेंट के साथ ही 26,412 लोगों को रोजगार मिलेगा. इसी कड़ी में 41 बड़े उद्योगों को अनुमति दी गई. जिसमें 1,888.46 करोड़ का निवेश के साथ ही 4,417 लोगों को नौकरी मिलेगी.

वित्तीय वर्ष 2021-22 में 1,791 एमएसएमई को अनुमति दी गई. जिसमें 4,740.56 करोड़ के इन्वेस्टमेंट के साथ ही 32,901 लोगों को रोजगार मिलेगा. इसी कड़ी में 63 बड़े उद्योगों को अनुमति दी गई. जिसमें 4,088.38 करोड़ का निवेश के साथ ही 13,911 लोगों को नौकरी मिलेगी.

वित्तीय वर्ष 2022-23 में दिसंबर 2022 तक 1614 एमएसएमई को अनुमति दी गई. जिसमें 6,924.73 करोड़ के इन्वेस्टमेंट के साथ ही 31,354 लोगों को रोजगार मिलेगा. इसी कड़ी में 16 बड़े उद्योगों को अनुमति दी गई. जिसमें 3,072.50 करोड़ का निवेश के साथ ही 3,369 लोगों को नौकरी देने का दावा है.

साल 2018 में 1.25 लाख करोड़ के प्रस्ताव पर बनी थी सहमतिः

  • साल 2018 में 673 निवेश प्रस्तावों पर एमओयू हुआ था.
  • बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में 125 करोड़ रुपए के प्रस्ताव पर एमओयू हुआ.
  • आईटी के क्षेत्र में 4,628 करोड़ रुपए के प्रस्ताव पर एमओयू साइन हुए.
  • कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में 96.5 करोड़ रुपए के प्रस्ताव पर एमओयू किया गया.
  • ऊर्जा के क्षेत्र में 40,707.24 करोड़ रुपए के प्रस्ताव पर एमओयू हुआ.
  • आयुष वेलनेस के क्षेत्र में 1,751.55 करोड़ रुपए के प्रस्ताव पर एमओयू किया गया.
  • विनिर्माण उद्योग के क्षेत्र में 17,191 करोड़ रुपए के प्रस्ताव पर एमओयू हुआ.
  • अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में 14,286.69 करोड़ रुपए के प्रस्ताव पर एमओयू पर साइन किए गए.
  • पर्यटन के क्षेत्र में 15,362.72 करोड़ रुपए के प्रस्ताव पर एमओयू हुआ.
  • हेल्थ केयर के क्षेत्र में 16,890 करोड़ रुपए के प्रस्ताव पर एमओयू पर सहमति बनी.
Last Updated :Apr 14, 2023, 10:59 PM IST
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