दशहरे पर क्यों करते हैं शमी पूजन, जानें इसका महत्व और लाभ
शास्त्रों में नवरात्र के बाद विजय दशमी को शस्त्र पूजा करने का विधान बताया गया है. मान्यता है कि शस्त्र का पूजन करने से भगवान प्रसन्न होते हैं. वहीं इसी दिन शमी के पौधे के पूजन का भी विधान है. इसी लेकर ईटीवी भारत ने पंडित उमाशंकर से बातचीत कर शस्त्र पूजा का महत्व जाना.
लखनऊ: इन दिनों पूरे देश में नवरात्र की धूम मची है. सभी भक्त लोग मां की आराधना में जुटे हैं. वहीं सोमवार को नवरात्र का अंतिम दिन है. इसके बाद दशहरा मनाया जाता है. वहीं शास्त्रों में इसी दिन शमी के पौधे और शमी के वृक्ष की पूजा का भी विधान बताया गया है. इसी को लेकर ईटीवी भारत ने पंडित उमाशंकर मिश्र ने खास बातचीत की और जाना कि दशहरे के दिन शस्त्रों की कैसे पूजा की जाए.
पढ़ें: आरएसएस ने शुरू की राम मंदिर निर्माण की तैयारी, 1992 वाले राम रथ पर निकलेगी शोभा यात्रा!
नवरात्र के 9 दिन होते हैं महत्वपूर्ण
पंडित उमाशंकर मिश्र ने ईटीवी भारत से बात करते हुए बताया कि पूरा देश नौ दिनों तक मां के 9 रूपों की आराधना करता है, उसके बाद दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त की थी.
दशहरा पर होता है शस्त्र पूजन
पंडित उमाशंकर मिश्र ने बताया कि इस दिन सभी लोग शस्त्र पूजन भी करते हैं. शास्त्रों में ऐसा उल्लेख है कि इस दिन शस्त्र का पूजन करने से भगवान प्रसन्न होते हैं. पंडित उमाशंकर ने जानकारी दी कि भगवान श्रीकृष्ण और हनुमान जी भी अपने साथ शस्त्र रखते हैं.
दशहरे के दिन शमी की पूजा का है विधान
पंडित उमाशंकर मिश्र ने ईटीवी भारत से बात करते हुए कहा कि दशहरे के दिन सभी लोगों को शमी के पौधे की जरूर पूजा करनी चाहिए. शमी शक्ति का परिचायक है. वहीं भगवान श्रीराम ने भी दशहरे के दिन शमी के पौधे की पूजा की थी.
पूजा करने से होते हैं कई फायदे
दशहरे के दिन शमी के पूजन से धन धान्य में वृद्धि होती है. आज के दिन शमी की पत्तियों को अपने पर्स या धन की जगह पर रखने से बरकत आती है.
शुभ मुहूर्त में करें शस्त्रों की पूजा
पंडित उमाशंकर मिश्र ने बताया कि दशहरे वाले दिन पूजा का समय बहुत महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि सूर्य निकलने से लेकर दोपहर 1 बजकर 35 मिनट तक शुभ मुहर्त है. इस समय में पूजा करने से मनचाही मनोकामना पूरी होती है.
लखनऊ। इन दिनों पूरे देश में नवरात्रि की धूम मची है। सभी भक्त लोग मां की आराधना में जुटे हैं। आज नवरात्रि का अंतिम दिन है। इसके बाद दशहरा मनाया जाता है।
इसी क्रम में ईटीवी भारत संवाददाता ने पंडित उमाशंकर मिश्र से खास बातचीत की। उन्होंने दशहरा की पूजा कैसे करें इसको विस्तार से बताया।
Body:नवरात्रि के 9 दिन होते हैं महत्वपूर्ण
पंडित उमाशंकर मिश्र ने ईटीवी भारत से बात करते हुए बताया कि पूरा देश नौ दिनों तक मां के 9 रूपों की आराधना करता है। उसके बाद दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त की थी।
दशहरा पर होता है शस्त्र पूजन
उन्होंने बताया कि इस दिन सभी लोग शस्त्र पूजन भी करते हैं। शास्त्रों में ऐसा उल्लेख है कि इस दिन शस्त्र का पूजन करने से भगवान प्रसन्न होते हैं। पंडित उमाशंकर ने जानकारी दी कि भगवान श्रीकृष्ण और हनुमान जी भी अपने साथ शस्त्र रखते हैं।
शमी की पूजा का भी विधान
पंडित उमाशंकर मिश्र ने ईटीवी भारत से बात करते हुए कहा कि दशहरे के दिन सभी लोगों को शमी के पौधे की जरूर पूजा करनी चाहिए। शमी शक्ति का परिचायक है। भगवान श्रीराम ने भी आज के दिन शमी के पौधे की पूजा की थी।
पूजा करने से होते हैं कई फायदे
उन्होंने बताया कि दशहरे के दिन शमी के पूजन से धन धान्य में वृद्धि होती है। आज के दिन शमी की पत्तियों को अपने पर्स या धन की जगह पर रखने से बरकत आती है।
शुभ मुहूर्त में करें पूजा
पंडित उमाशंकर मिश्र ने बताया कि दशहरे वाले दिन पूजा का समय बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सूर्य निकलने से लेकर दोपहर 1 बजकर 35 मिनट तक शुभ मुहर्त है। इस समय में पूजा करने से मनचाही मनोकामना पूरी होगी।
Conclusion:नवरात्रि के दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्त की थी। ऐसी मान्यता है कि जो जातक आज के दिन शमी के पौधे की पूजा करता है उसे शत्रु पराजित नहीं कर पाएंगे।
अनुराग मिश्र
8318122246


