राम मंदिर आंदोलन, 14 साल की पल्लवी और 12 साल के अमित को भी पुलिस ने पकड़ा था, जा रहे थे अयोध्या

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By ETV Bharat Uttar Pradesh Desk

Published : Jan 14, 2024, 8:35 AM IST

राम मंदिर आंदोलन के दौरान मेरठ के परिवार ने भी की थी कार सेवा.

अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बनकर तैयार है. जल्द प्राण प्रतिष्ठा भी होने जा रही है. राम मंदिर कार सेवकों और राम भक्तों के आंदोलन (Ram Mandir Movement) का नतीजा है. अलीगढ़ का भी एक परिवार आंदोलन का हिस्सा बना था.

राम मंदिर आंदोलन के दौरान मेरठ के परिवार ने भी की थी कार सेवा.

अलीगढ़ : अयोध्या धाम में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही, उसी तरह राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कार सेवकों की तमाम कहानियां भी सामने आने लगीं हैं. राम मंदिर आंदोलन के दौरान अलीगढ़ के एक ही परिवार के तीन लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था. यह परिवार कार सेवा के लिए अयोध्या जा रहा था. यह कहानी है पूर्व विधायक स्व. केके नवमान के परिवार की. उस दौरान उनके पुत्र सत्य प्रकाश नवमान, उनकी 14 साल की पोती पल्लवी और 12 साल के पोते अमित को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. 14 साल की पल्लवी को 2 दिन तक हिरासत में रहना पड़ा था.

ट्रेन में बैठते ही प्लेटफार्म पर पहुंचे पुलिसकर्मी : ईटीवी भारत से खास बातचीत में पूर्व विधायक स्व. केके नवमान के बेटे व कार सेवक सत्य प्रकाश ने बताया कि उस दौरान राम मंदिर आंदोलन चल रहा था. राम भक्तों में काफी उत्साह था. पुलिस की तमाम सख्ती के बावजूद कार सेवक अयोध्या पहुंच रहे थे. वह भी वैशाली एक्सप्रेस में 14 साल की बेटी पल्लवी और 12 साल के बेटे अमित के साथ अयोध्या के लिए सवार हुए. ट्रेन चलने के बाद फिर रुक गई. मुझे लगा कि कोई खतरा है. इतनी देर में प्लेटफार्म पर चारों तरफ से पुलिसकर्मी दौड़कर आ रहे थे, उन्होंने मुझे गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार करके मुझे बाहर शीशे वाले गेट से बाहर ले जा रहे थे. उस दौरान के नवागत एसपी सिटी बीके अग्रवाल ने मथुरा में भी साधुओं पर बड़ा अत्याचार किया था. लाठी चार्ज किया था.

एसपी सिटी को पकड़कर पीटा : सत्य प्रकाश बताते हैं कि कार सेवा से रोके जाने पर वह क्रोधित हो गए. उन्होंने एसपी सिटी का गला पकड़ लिया. मैंने उन्हें कई घूंसे मारे लेकिन फिर पुलिसकर्मियों का झुंड आ गया. वे लगातार मुझ पर लाठियां बरसाते रहे. मेरा सिर फट गया. मुझे गिरफ्तार करके मैनपुरी ले गए. बेटी पल्लवी व बेटा अमित नवमान को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था. दोनों को पहले बन्ना देवी थाने ले गए थे. फिर वहां से गाड़ी में रात को मुझे मैनपुरी भेज दिया. बेटे को छोड़ दिया था, लेकिन बेटी को दो दिन तक हिरासत में रखा. मैं मैनपुरी जेल में करीब ढाई महीने बंद रहा. इसके बाद लखनऊ जेल में भी रहा.

सार्थक हो गया पूर्वजों का दिया बलिदान : अमित नवमान अब लगभग 40 वर्ष के हो चुके हैं. अमित कुमार ने बताया कि यह लगभग 90 के आसपास की बात है. मेरी आयु कम थी. याददाश्त भी थोड़ी कम थी .हमारी आर्थिक स्थिति भी बहुत खराब हो चुकी थी. मुलायम सिंह की सरकार थी. हिंदुओं को जेल में रख देना चाहते थे वह लोग. अब राम मंदिर को देखकर काफी सुकून मिलता है. 22 को प्राण प्रतिष्ठा भी होनी है. ऐसा लगता है कि हमारे पूर्वजों ने मंदिर के लिए जो बलिदान दिए थे, वे सार्थक हो रहे हैं. इससे बढ़कर खुशी कोई और हो ही नहीं सकती है. पीएम मोदी और सीएम योगी के नेतृत्व में राम भक्तों का सपना साकार हो रहा है.

पल्लवी नवमान ने बताया कि मैं कार सेवा के पिता और भाई के साथ जा रही थी. पुलिस पिता को पकड़कर ले जा रही थी. पीछे-पीछे हम और मेरा भाई भी जाने लगे. फिर आगे जाकर गेट नंबर एक पर पुलिस कर्मी पापा की पिटाई करने लगे. इतने डंडे बरसाए कि उनके सिर से खून की धार निकलने लगी. आंदोलन के दौरान दादा केके नवमान पहले से ही जेल में थे. राम मंदिर आंदोलन के दौरान हर राम भक्त को पुलिस की यातना झेलने पड़ी. मेरा परिवार भी उनमें से एक था.

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