जानिए कैसा है माओवादियों का कमांड एंड कंट्रोल सेंटर रहा बूढ़ापहाड़, कई सालों तक विकास से रहा दूर - बूढ़ापहाड़ पर माओवादी

🎬 Watch Now: Feature Video

thumbnail
Budha Pahad Naxalites (undefined)

By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : January 10, 2024 at 4:15 PM IST

Choose ETV Bharat

पलामू: बूढ़ापहाड़ माओवादियों का कमांड एंड कंट्रोल सेंटर रहा है. यह छत्तीसगढ़ और झारखंड सीमा पर है. बूढ़ापहाड़ माओवादियों का यूनिफाइड कमांड रहा है. यहीं से माओवादी झारखंड बिहार छत्तीसगढ़ के इलाके में गतिविधि का संचालन करते थे. अभियान ऑक्टोपस के बाद माओवादी इलाके को छोड़ कर भाग गए है और कमजोर हो गए. लातेहार, गढ़वा और छत्तीसगढ़ के सीमा पर मौजूद बूढापहाड़ को माओवादियों ने जान बूझकर ठिकाना बनाया था. यह इलाका काफी दुर्गम और जंगल पहाड़ों की सृंखला है. 52 वर्ग किलोमीटर में फैले बूढापहाड़ पर जाने के लिए नदी और पहाड़ों को पार करना पड़ता है. ऐसे में यहां पर पुलिस और सुरक्षाबलों का पहुंचना भी मुश्किल था. यही वजह थी कि कई सालों तक बूढ़ापहाड़ नक्सलियों के लिए एक सुरक्षित पनाहगार रहा. लेकिन पुलिस और सुरक्षाबलों की कड़ी मेहनत के बाद इस इलाके में अब विकास की बयार बह रही है.

पलामू: बूढ़ापहाड़ माओवादियों का कमांड एंड कंट्रोल सेंटर रहा है. यह छत्तीसगढ़ और झारखंड सीमा पर है. बूढ़ापहाड़ माओवादियों का यूनिफाइड कमांड रहा है. यहीं से माओवादी झारखंड बिहार छत्तीसगढ़ के इलाके में गतिविधि का संचालन करते थे. अभियान ऑक्टोपस के बाद माओवादी इलाके को छोड़ कर भाग गए है और कमजोर हो गए. लातेहार, गढ़वा और छत्तीसगढ़ के सीमा पर मौजूद बूढापहाड़ को माओवादियों ने जान बूझकर ठिकाना बनाया था. यह इलाका काफी दुर्गम और जंगल पहाड़ों की सृंखला है. 52 वर्ग किलोमीटर में फैले बूढापहाड़ पर जाने के लिए नदी और पहाड़ों को पार करना पड़ता है. ऐसे में यहां पर पुलिस और सुरक्षाबलों का पहुंचना भी मुश्किल था. यही वजह थी कि कई सालों तक बूढ़ापहाड़ नक्सलियों के लिए एक सुरक्षित पनाहगार रहा. लेकिन पुलिस और सुरक्षाबलों की कड़ी मेहनत के बाद इस इलाके में अब विकास की बयार बह रही है.

ABOUT THE AUTHOR

Jharkhand has a strong team of reporters, stringers and contributors across the state. ETV Bharat Jharkhand brings you the most extraordinary narratives surfacing from the area. Its focus extends past the commonplace and predictable storylines, as it actively explores distinctive, exceptional, unbiased and unparalleled accounts. Numerous tales from Jharkhand also find mention in other news outlets, attesting to its significance and impact....view details