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ग्रीन सेस वसूलने में आ रही बड़ी अड़चन, चुनौती बने शरारती तत्व लगा रहे लाखों का चूना, जानिए कैसे?

उत्तराखंड में ग्रीन सेस से मिलने वाले राजस्व पर कुछ लोग बट्टा लगाने में लगे हुए हैं, जो चुनौती बन गया है. रिपोर्ट- रोहित सोनी.

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ग्रीन सेस वसूलने में आ रही बड़ी अड़चन (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : April 2, 2026 at 4:03 PM IST

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Updated : April 2, 2026 at 6:02 PM IST

5 Min Read
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देहरादून: उत्तराखंड में परिवहन विभाग अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस वसूल रहा है. ऐसे में विभाग को उम्मीद है कि आगामी चारधाम यात्रा के दौरान अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों से अच्छी खासी ग्रीन सेस की वसूली हो सकती है. क्योंकि हर साल चारधाम यात्रा के दौरान लाखों की संख्या में बाहरी राज्यों से वाहन उत्तराखंड में प्रवेश करते हैं. लेकिन कुछ शरारती तत्व विभाग की उम्मीदों पर बट्टा लगा रहे हैं. आइए जानते हैं कैसे?

दरअसल, हरिद्वार जिले में उत्तराखंड के प्रवेश द्वार नारसन बॉर्डर के साथ ही अन्य क्षेत्रों में लगे एएनपीआर (Automatic number plate recognition) की केबल को शरारती तत्व काट दे रहे हैं, जिसके चलते विभाग को अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस वसूलने में दिक्कतें हो रही हैं. परिवहन विभाग अब इसी का हल ढूंढने में लगा हुआ है.

सरकार के खाते में आ रहे रोजाना 20 लाख: उत्तराखंड परिवहन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो ग्रीन सेस से राज्य को रोजाना करीब 20 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हो रहा है. वहीं, अभी तक परिवहन विभाग को करीब 6 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है. उत्तराखंड में 15 मार्च से ग्रीन सेस की वसूली शुरू हुई थी.

शरारती तत्वों के कारण ग्रीन सेस वसूलने में आ रही अड़चन. (ETV Bharat)

चारधाम यात्रा से उम्मीद: परिवहन विभाग को उम्मीद है कि आगामी चारधाम यात्रा में प्रदेश को ग्रीन सेस से अच्छा खासा राजस्व प्राप्त हो सकता है, लेकिन समस्या ये है कि ग्रीन सेस कलेक्शन में शरारती तत्व बड़ी अड़चन डाल रहे हैं. हो ये रहा है कि शरारती तत्व एएनपीआर की केबल काट दे रहे हैं, जिस कारण ग्रीन सेस वसूलने में दिक्कते हो रही हैं.

शरारती तत्व से परेशान परिवहन विभाग: इस मामले पर ज्यादा जानकारी देते हुए अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह ने बताया कि धर्मपुर में दो बार एएनपीआर का केबल कटने का मामला सामने आया. इसके अलावा काशीपुर और नारसन बॉर्डर पर लगे कैमरों का भी केबल काट दिया गया. कैमरे का केबल काटने की वजह से वाहनों से ग्रीन सेस नहीं वसूला जा सका.

सर्वर में स्पेस की कमी: इस समस्या से निटपने के लिए विभाग ने सर्विलांस कैमरे भी लगाए, जहां शरारती तत्व की गतिविधियां रिकॉर्ड भी होती हैं, लेकिन वहां भी एक बड़ी समस्या है, वो ये है कि आईटीडीए (Information Technology Development Agency) के सर्वर में स्पेस की कमी है. ऐसे में सर्विलांस और बुलेट कैमरे से रिकॉर्ड होने वाले डेटा का बैकअप सिर्फ एक दिन का ही होता है, जिसके चलते केबल कटने की जानकारी नहीं मिलती है. साथ ही उसको वेरीफाई करते हैं तो ये जानकारी नहीं मिल पाती है कि वहां क्या हुआ होगा?

डाटा को एक महीने तक स्टोर करने का प्लान: हालांकि अब विभाग ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है, ताकि बॉर्डर्स क्षेत्रों में लगे सर्विलांस और बुलेट कैमरे का डाटा कम से कम एक महीने तक स्टोर किया जा सके. इससे विभाग को उस इलाके में चल रही गतिविधियों की पूरी जानकारी मिल पाएगी. साथ ही पता चल पाएगा कि केबल किसने काटा.

इसके अलावा अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह ने बताया कि बिजली कटने की समस्या भी ग्रीन सेस वसूलने में एक बड़ी बाधा बन रही है. क्योंकि बॉर्डर क्षेत्र में काफी अधिक बिजली की कटौती होती है. जबकि यूपीएस का बैकअप अधिक नहीं होता है.

ऐसे में विभाग कोशिश कर रहा है कि कुछ बॉर्डर क्षेत्र में जनरेटर लगा दिए जाएं. खासकर नारसन बॉर्डर पर, क्योंकि उत्तराखंड में करीब 40 से 50 प्रतिशत ट्रैफिक इसी रास्ते आता है. हालांकि इसमें एक बड़ी समस्या ये है कि इन सबको मेंटेन करने के लिए मैनपावर की भी जरूरत होगी, जिस पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि उनकी सुरक्षा भी बनी रहे.

कौन काट रहा केबल: अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह की मानना है कि ग्रीन सेस अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों से ही वसूला जा रहा है. होता ये है कि कैमरा वाहनों की नंबर प्लेट को कैप्चर करता है, जो नंबर प्लेट बाहरी राज्यों की होती है, उससे फास्टटैग के जरिए ग्रीन सेस वसूला जाता है. लेकिन विभाग को ऐसा लगता है कि कुछ लोगों के पास उत्तराखंड में भी बाहरी राज्यों में रजिस्टर्ड वाहन हैं, ऐसे में ग्रीन सेस से बचने के लिए वो ही लोग कैमरों की केबल काट रहे हैं. इसके अलावा कुछ शरारती तत्व भी हो सकते हैं जो बेवजह भी ऐसा काम कर सकते हैं. हालांकि, अभी तक चार मामले सामने आ चुके हैं, जिसका निदान जल्द ही किया जाएगा.

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Last Updated : April 2, 2026 at 6:02 PM IST