झांसी रेल मंडल में लालपुर–चौरा रूट पर ऑटोमेटिक सिग्नलिंग शुरू; रफ्तार के साथ बढ़ेगी ट्रेनों की संख्या
21 सितंबर से 23.61 किलोमीटर रेलखंड पर अत्याधुनिक ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली लागू कर दी गई है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : September 22, 2026 at 8:05 AM IST
प्रयागराज : भारतीय रेल के झांसी मंडल ने ट्रेनों की रफ्तार, सुरक्षा और उनकी संख्या बढ़ाने की दिशा में अहम तकनीकी उपलब्धि हासिल की है. लालपुर से लेकर चौरा तक के 23.61 किलोमीटर लंबे व्यस्त रेलखंड पर अत्याधुनिक ‘ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली’ को सफलतापूर्वक शुरू कर दिया गया है. 21 सितंबर 2026 से प्रभावी हुई इस नई व्यवस्था के बाद अब इस रूट पर ट्रेनों को एक-दूसरे के पीछे सुरक्षित दूरी बनाकर चलाना आसान हो जाएगा. जिससे रेल यातायात पहले से कहीं अधिक सुगम और सुरक्षित बनेगा.

प्रोजेक्ट यूनिट कानपुर द्वारा तैयार की गई इस परियोजना के तहत पूरे 23.61 किलोमीटर के हिस्से को तीन छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा गया है. लालपुर से मलासा (5.40 किमी), मलासा से पुखरायां (9.80 किमी) और पुखरायां से चौरा (8.41 किमी)। आम तौर पर पुरानी व्यवस्था में जब तक एक ट्रेन पूरा लंबा स्टेशन ब्लॉक पार नहीं कर लेती थी, तब तक दूसरी ट्रेन को हरी झंडी नहीं मिलती थी. अब ऑटोमैटिक सिस्टम की मदद से पूरे ट्रैक को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिया गया है.

तकनीक से मानवीय गलतियों की गुंजाइश खत्म : पूरे रूट पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और डिजिटल एक्सल काउंटर (MSDAC आधारित ड्यूल डिटेक्शन) तकनीक लगाई गई है. आसान शब्दों में कहें तो पटरी पर ट्रेन के पहियों की गिनती और ट्रैक के खाली होने की पुष्टि दोहरी स्वचालित प्रणाली से होगी. इससे कंट्रोल रूम को पल-पल की सटीक जानकारी मिलती रहेगी और किसी भी तरह की मानवीय चूक की संभावना न के बराबर रह जाएगी. साथ ही, ऑटोमैटिक फ्यूज चेंजओवर और नए डेटा लॉगर की वजह से सिग्नल में तकनीकी खराबी आने का खतरा भी कम होगा.

फाटकों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम : सड़क और रेल यातायात दोनों को सुरक्षित रखने के लिए इस रेलखंड में पड़ने वाले सभी 8 लेवल क्रॉसिंग (रेलवे फाटकों) को सीधे सिग्नलिंग सिस्टम से जोड़ यानी इंटरलॉक कर दिया गया है. इनमें से 6 फाटकों पर तो ट्रेन के आने की पूर्व सूचना और वार्निंग सिस्टम भी लगाया गया है. इसका मतलब यह है कि ट्रेन के नजदीक आते ही फाटक का सिस्टम खुद-ब-खुद अलर्ट मोड में आ जाएगा, जिससे दुर्घटनाओं पर पूरी तरह लगाम लगेगी. मंडल रेल प्रबंधक (DRM) अनिरुद्ध कुमार के दिशा-निर्देशन में सिग्नल, टेलीकॉम और ऑपरेटिंग विभाग द्वारा पूरा किया गया यह तकनीकी बदलाव आने वाले दिनों में और ज्यादा पैसेंजर व मालगाड़ियों को समय पर चलाने का मजबूत आधार बनेगा.

