एशिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर जटोली में महाशिवरात्रि की धूम, अद्भुत है मान्यता
इस मंदिर के निर्माण में लगभग 39 वर्ष लगे. मान्यता है कि पौराणिक काल में भगवान शिव यहां ठहरे थे.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 14, 2026 at 4:53 PM IST
सोलन: हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों में स्थित एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर, जटोली महादेव अपनी भव्यता और आस्था के लिए जाना जाता है. 111 फीट ऊंचा गुंबद और 11 फीट के स्वर्ण कलश के साथ करीब 122 फीट ऊंचा यह मंदिर दक्षिण-द्रविड़ शैली में बना है. कल इसी मंदिर में महाशिवरात्रि की धूम देखने को मिलेगी.
मंदिर प्रबंधन कमेटी के जनरल सेक्रेटरी डॉ. उपेंद्र कौल ने बताया कि 15 फरवरी को सुबह 5 बजे भगवान शिव का रुद्राभिषेक और विशेष श्रृंगार किया जाएगा. इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर खोल दिया जाएगा. भक्त जलकुंड में जलाभिषेक कर सकेंगे. रात्रि में भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे, जो 16 फरवरी सुबह 5 बजे तक चलेंगे.
16 फरवरी को विशाल भंडारा
प्रबंधन कमेटी के अनुसार, 16 फरवरी को मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा. हजारों श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद और भोजन की विशेष व्यवस्था की गई है. कमेटी के सभी सदस्य श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मौके पर मौजूद रहेंगे. कमेटी सदस्य राजेश कुमार ठाकुर ने बताया कि महाशिवरात्रि की रात भजन-कीर्तन के साथ झांकियां निकाली जाएंगी. गायक प्रेम मेहरा प्रस्तुति देंगे. इसके बाद मां काली और अघोरी बाबा की झांकी निकलेगी. टी-सीरीज फेम पंकज राज और इंडियन आइडल फेम मोहित चोपड़ा भी अपनी प्रस्तुति देंगे. साथ ही स्थानीय कलाकारों को भी मंच दिया जाएगा.

श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम
इस बार मंदिर तक आने वाली सड़क को चौड़ा कर खोल दिया गया है, जिससे जाम की समस्या कम होगी. शूलिनी ऑटो यूनियन श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क ऑटो सेवा देगी. सोलन शहर बम-बम भोले के जयकारों से गूंज रहा है और बाहरी राज्यों से भी भक्त पहुंच रहे हैं.

39 साल में बना भव्य मंदिर
सोलन से करीब सात किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर के निर्माण में लगभग 39 वर्ष लगे. साहित्यकार मदन हिमाचली के अनुसार मंदिर की गुंबद 111 फीट ऊंची है और ऊपर 11 फीट का स्वर्ण कलश स्थापित है. यह मंदिर जनता के दान से बना है. मान्यता है कि पौराणिक काल में भगवान शिव यहां ठहरे थे. 1974 में स्वामी कृष्णानंद परमहंस जी महाराज ने इसकी आधारशिला रखी. 1983 में उनके समाधि लेने के बाद निर्माण कार्य कमेटी ने संभाला. मंदिर परिसर में उनकी गुफा भी है और यहां स्फटिक शिवलिंग स्थापित है.

चमत्कारी जल और लोक मान्यता
स्थानीय मान्यता के अनुसार स्वामी कृष्णानंद परमहंस ने तपस्या कर यहां जलधारा प्रकट की थी. कुछ लोग मंदिर के पत्थरों को थपथपाने पर डमरू जैसी ध्वनि आने की बात भी कहते हैं, हालांकि इसे लोककथा माना जाता है. जटोली के साथ लुटरू महादेव, शिव तांडव गुफा मंदिर और शिव ढांक मंदिर में भी महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा होगी. भक्त बेलपत्र, भांग और दूध चढ़ाकर भगवान शिव की आराधना कर रहे हैं.

ऐसे पहुंचे जटोली मंदिर
सोलन से राजगढ़ रोड होते हुए जटोली मंदिर पहुंचा जा सकता है. सड़क से करीब 100 सीढ़ियां चढ़कर मंदिर पहुंचा जाता है. मंदिर में दाईं ओर भगवान शिव की मूर्ति स्थापित है. इसके 200 मीटर की दूरी पर शिवलिंग है. यहां के लिए बस सुविधा उपलब्ध है. इसके अलावा टैक्सी और ऑटो से भी यहां पहुंचा जा सकता है.
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