यूपी की कांवड़ यात्रा के अनोखे रंग: मेरठ में कांवड़िया ने दिया बच्चे को जन्म, दादा को कांवड़ में बैठाकर निकले दो पोते
मेरठ में महिला कांवड़िया ने बेटे को जन्म दिया. अलीगढ़ में दो भाई 95 साल के दादा को कांवड़ में बिठाकर यात्रा कर रहे हैं.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : August 7, 2026 at 5:27 PM IST
|Updated : August 7, 2026 at 8:40 PM IST
मेरठ/अलीगढ़/मुरादाबाद/अयोध्या/मुजफ्फरनगर: पवित्र सावन मास में कांवड़ यात्रा के दौरान आस्था और सेवा का एक अद्भुत संगम देखने को मिला है. हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य गाजियाबाद लौट रही एक महिला कांवड़िया को मेरठ में अचानक प्रसव पीड़ा हुई. शिविर आयोजकों और स्वास्थ्य विभाग की तत्परता से महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पांचली पहुंचाया गया, जहां उसने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया. नवजात के जन्म लेते ही अस्पताल परिसर 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंज उठा.
मां कांवड़ सेवा शिविर से एंबुलेंस से पहुंची अस्पताल: गाजियाबाद के कृष्णा नगर निवासी सोनू अपनी पत्नी मनीषा और चार वर्षीय बेटे विनय के साथ 31 जुलाई को हरिद्वार से गंगाजल लेकर चले थे. परिवार लगातार चार वर्षों से कांवड़ यात्रा कर रहा है. यात्रा के दौरान मेरठ-बागपत बाईपास स्थित 'मां कांवड़ सेवा शिविर' में विश्राम के दौरान मनीषा को हल्की प्रसव पीड़ा महसूस हुई. शिविर में मौजूद चिकित्सा टीम ने प्राथमिक उपचार देकर विश्राम की सलाह दी और दर्द बढ़ने पर 108 एंबुलेंस से सीएचसी भेजा गया.
सुरक्षित प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ: भर्ती कराने के करीब आधे घंटे के भीतर मनीषा ने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया. डॉ. विशाल अग्रवाल प्रभारी, सीएचसी पांचली ने बताया कि महिला को प्रसव पीड़ा की स्थिति में एंबुलेंस द्वारा लाया गया था, जहां मेडिकल टीम ने सुरक्षित प्रसव कराया. महिला के पति सोनू ने बताया कि भगवान भोलेनाथ से दूसरे बेटे के लिए मन्नत मांग रखी थी और आशुतोष ने जलाभिषेक से पहले ही उनकी मनोकामना पूरी कर दी. शिशु के जन्म के बाद सोनू और उनके परिजनों को बधाई देने वालों का तांता लग गया.
अलीगढ़ में दिखे 'कलयुग के श्रवण कुमार': अलीगढ़ में सावन के पवित्र महीने में भक्ति, सेवा और पारिवारिक संस्कार का ऐसा अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं. बुलंदशहर के रामघाट से दो सगे भाई कृष्ण कुमार और भूदेव अपने 95 वर्षीय दादाजी हरीशचंद्र को कांवड़ में बैठाकर वृंदावन के लिए पैदल यात्रा पर निकले हैं. कांवड़ के एक ओर चार कलशों में गंगाजल रखा गया है, जबकि दूसरी ओर उनके दादाजी विराजमान हैं. इस अनोखी कांवड़ यात्रा का अलीगढ़ पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने जोरदार स्वागत किया.
दादाजी की इच्छा पूरी करी रहे पोते: गुरुवार रात जब दोनों भाई अपनी कांवड़ लेकर अलीगढ़ के दुबे के पड़ाव पहुंचे तो वहां मौजूद श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. अछनेरा निवासी कृष्ण कुमार ने बताया कि उन्होंने इस यात्रा की जानकारी पहले अपने परिवार के किसी सदस्य को नहीं दी थी. उन्होंने चुपचाप दादाजी को साथ लेकर रामघाट से गंगा स्नान कराया और फिर उन्हें कांवड़ में सम्मानपूर्वक बैठाकर रवाना हो गए. उनका उद्देश्य भगवान शिव का जलाभिषेक करने के साथ अपने बुजुर्ग दादाजी की सेवा करना था.
बुलंदशहर से वृंदावन जा रहे दादा-पोते: श्रद्धालुओं का कहना है कि आज के समय में जब बुजुर्गों की उपेक्षा की खबरें सामने आती हैं, ऐसे में दोनों पोतों ने समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है. लोगों ने उन्हें 'कलयुग का श्रवण कुमार' बताते हुए उनके इस प्रयास की मुक्तकंठ से सराहना की. वहीं मेरठ में कांवड़ यात्रा में विभिन्न रंग रूप देखने को मिल रहे हैं. ग्रेटर नोएडा के तीन युवक 14 फीट के त्रिशूल को लेकर कांवड़ यात्रा में शामिल हैं, जो विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
पालने में दूधमुंहे बच्चे को लेकर चल रहा दंपती: वहीं इलाहाबाद की हिना अपने पति के साथ पुत्र रत्न की प्राप्ति होने पर भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए 5 महीने के बच्चे को पालने में लेकर यात्रा कर रही हैं. हिना बताती हैं कि हरिद्वार से 25 जुलाई को यात्रा की शुरुआत की थी और रास्ते में सुरक्षा के अच्छे इंतजाम हैं. पति-पत्नी दोनों ने भोलेनाथ से एक संतान मांगी थी और मनोकामना पूरी होने पर अब वे अपना वचन निभा रहे हैं. महज 6 माह के बच्चे को लेकर यात्रा में शामिल राजकुमार का कहना है कि वे ईश्वर के प्रति बेहद कृतज्ञ हैं.

55 किलो का त्रिशूल लेकर पहुंचे राजेश: 14 फीट का त्रिशूल लेकर चल रहे अमित बताते हैं कि इसका वजन 55 किलो है और इसे मध्यप्रदेश में ऑर्डर देकर तैयार कराया गया था. केदारनाथ यात्रा के दौरान उन्होंने ऐसा त्रिशूल देखा था, जिसे वे अब अपने गांव के मंदिर में स्थापित करवाएंगे. वहीं मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले दिल्ली के राजेश खड़ी कांवड़ लेकर यात्रा कर रहे हैं. तिरंगे रंग में सजी कांवड़ लेकर बढ़ रहे राजेश कहते हैं कि तीसरी बार पैदल कांवड़ लाते हुए उन्हें असीम शांति का अनुभव हो रहा है.
मुरादाबाद में बुजुर्ग माता-पिता को कांवड़ में बिठाकर निकला बेटा: मुरादाबाद में एक बेटे ने 90 साल के पिता और 85 साल की मां को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार तक की 180 किलोमीटर की पैदल यात्रा कराई. इस सेवा भाव का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. मुरादाबाद में कावड़ यात्रा के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने सभी के दिल को मोह लिया. जनपद मुरादाबाद के सोनकपुर थाना क्षेत्र के मुड़िया जैन के रहने वाले एक व्यक्ति ने अपने बूढ़े माता-पिता को कावड़ यात्रा कराने का संकल्प किया और दोनों को कावड़ में बिठाकर पवित्र यात्रा पर निकल पड़े. 45 वर्षीय राकेश अपने बेटे रितेश और लकी के साथ अपने माता-पिता को कावड़ में बिठाकर जल लेने के लिए हरिद्वार गए. दिल को छू लेने वाला यह नज़ारा उत्तर प्रदेश के जनपद मुरादाबाद का है.
180 किलोमीटर का सफर तय कर पूरी की यात्रा: यहां के सोनकपुर थाना क्षेत्र के मुड़िया जैन के रहने वाले राकेश अपने परिवार के साथ अपने माता-पिता को कावड़ यात्रा पर लेकर गए. इस दौरान उन्होंने लगभग 180 किलोमीटर का सफर तय किया. इस सफर में राकेश और उनके बेटों ने अपने वृद्ध माता-पिता को कावड़ में बैठाया और अपने कंधों पर रखकर उनको पवित्र कांवड़ यात्रा कराई. इस नज़ारे को देखने के लिए लोगों की लगातार भीड़ लगी रही.

अयोध्या में विभिन्न जिलों से पहुंच रहे हजारों शिवभक्त: शुक्रवार को अयोध्या का आध्यात्मिक वातावरण शिवभक्ति और रामभक्ति के अद्भुत संगम से सराबोर नजर आया. सरयू तट से लेकर मंदिरों तक श्रद्धा और आस्था का अनुपम दृश्य देखने को मिला. अयोध्या में गोण्डा, बस्ती, अंबेडकरनगर, बाराबंकी, सुल्तानपुर, गोरखपुर, जौनपुर, आजमगढ़, लखनऊ, बलरामपुर समेत कई जिलों से हजारों की संख्या में कांवड़िए पहुंच रहे हैं. श्रावण माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के जलाभिषेक को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है.
विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक के लिए पदयात्रा शुरू: कांवड़ यात्रियों के जत्थे भगवान भोलेनाथ की आकर्षक झांकियों के साथ डीजे की धुन पर भजन-कीर्तन करते हुए नाचते-गाते अपनी यात्रा पर निकल रहे हैं. कांवड़िए सरयू का पवित्र जल लेकर बस्ती के प्रसिद्ध भदेश्वरनाथ मंदिर, गोण्डा के पृथ्वीनाथ महादेव, अंबेडकरनगर के शिव बाबा धाम तथा बाराबंकी के सुप्रसिद्ध लोधेश्वर महादेव मंदिर सहित विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक करेंगे. कांवड़ लेकर निकले शिव भक्त किशन कुमार ने बताया कि सरयू में स्नान कर बाबा नागेश्वर मंदिर में जल चढ़ाया है.

मुजफ्फरनगर में मस्जिद टेंट से ढकी गई: हनुमानगढ़ी, राम मंदिर में दर्शन करके अब कांवड़ उठा लिया है और सीधे पदयात्रा करते हुए चार दिन में बस्ती पहुंचेंगे. उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद में इस समय कांवड़ यात्रा अपने पूरे चरम पर है, जहां लाखों शिव भक्त मुजफ्फरनगर से होते हुए विभिन्न राज्यों के लिए प्रस्थान कर रहे हैं. जिसके चलते शिव भक्त कांवड़ियों की भीड़ को देखते हुए मीनाक्षी चौक के पास स्थित मोहल्ला अंसारियान की मस्जिद को स्थानीय लोगों द्वारा टेंट के पर्दे से ढकवा दिया गया है.
बच्चों की सुरक्षा और आपसी समन्वय का दिया संदेश: जानकारी के मुताबिक इस मस्जिद में बच्चों को पढ़ाया जाता है, इसलिए स्थानीय लोग अक्सर कांवड़ यात्रा के दौरान इसे पर्दे से ढक देते हैं ताकि कोई बच्चा भाग कर किसी कांवड़ से न टकरा जाए. स्थानीय निवासी शहजाद बताते हैं कि यह कदम बच्चों की सुरक्षा और यात्रा को सकुशल संपन्न कराने के लिए अपनी मर्जी से उठाया गया है, जिस पर प्रशासन का कोई दबाव नहीं है. मस्जिद के भीतर नियमित रूप से नमाज पढ़ी जा रही है और माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण है.
किसान यूनियन ने पुष्पवर्षा कर किया कांवड़ियों का स्वागत: मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की एक खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली. भारतीय किसान यूनियन लाल बहादुर शास्त्री के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने शिवभक्त कांवड़ियों का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया. इस दौरान फल, पानी की बोतलें और ठंडी फ्रूटी वितरित कर सेवा भाव का परिचय दिया गया. संगठन के नेताओं ने कहा कि मुजफ्फरनगर हमेशा मोहब्बत और भाईचारे की पहचान रहा है.

अहिल्याबाई चौक पर जल-फल वितरित कर की गई सेवा: उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर में शुक्रवार सुबह भारतीय किसान यूनियन लाल बहादुर शास्त्री द्वारा सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक एकता का संदेश देने के उद्देश्य से शिवभक्त कांवड़ियों का भव्य स्वागत किया गया. संगठन के जिला अध्यक्ष चौधरी शादाब के नेतृत्व में दर्जनों से ज्यादा पदाधिकारी और कार्यकर्ता अहिल्याबाई चौक पर एकत्रित हुए, जहां कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा की गई तथा फल, पानी की बोतलें और ठंडी फ्रूटी वितरित कर उनकी निस्वार्थ सेवा की गई.
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