EPFO सैलरी लिमिट बढ़ने से कर्मचारियों को क्या होगा फायदा? वेतन और पेंशन को लेकर दूर करें सारा कंफ्यूजन!
मोदी सरकार ने EPFO सैलरी लिमिट में बड़ा बदलाव किया. देशभर में 51 लाख कर्मचारी ईपीएफओ के दायरे आएंगे.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : September 21, 2026 at 9:18 PM IST
शिमला: केंद्र सरकार ने ईपीएफओ (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. जिसके तहत EPFO कवरेज की सैलरी लिमिट बढ़ाई गई है. ऐसे में देशभर के साथ हिमाचल प्रदेश के भी लाखों कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा. इसको लेकर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ), पंजाब एवं हिमाचल प्रदेश क्षेत्र ने आज ईपीएफओ कार्यालय, चंडीगढ़ में प्रेस वार्ता का आयोजन किया.
इस दौरान राजीव बिष्ट, अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त, (प्रभारी, पंजाब एवं हिमाचल प्रदेश क्षेत्र) ने कहा कि ईपीएफओ की वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दी गई है, जो 17 सितंबर 2026 से प्रभावी है. इस कदम से अधिक पात्र कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आएंगे और भविष्य निधि, पेंशन और बीमा सहित ईपीएफओ के लाभों तक उनकी पहुंच बढ़ेगी.
पंजाब और हिमाचल में 5.87 लाख कर्मचारी होंगे लाभान्वित
राजीव बिष्ट ने कहा, "पंजाब एवं हिमाचल प्रदेश क्षेत्र में 37,805 (29141 पंजाब में व 8664 हिमाचल प्रदेश में) अंशदायी प्रतिष्ठानों में कुल 15,95,991 अंशदायी सदस्य हैं, जिनमें से 5,87,322 सदस्य वर्तमान में ₹15,000 प्रति माह के वेतन पर अंशदान कर रहे हैं. वेतन सीमा में वृद्धि से इन 5,87,322 सदस्यों के लाभान्वित होने की उम्मीद है".
राजीव बिष्ट ने नियोक्ताओं से आग्रह किया कि वे पात्र कर्मचारियों का समय पर पंजीकरण और नामांकन सुनिश्चित करें और उन्हें उनके अधिकारों और हकों के प्रति जागरूक करें. उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का लाभ इच्छित लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए सटीक जानकारी अत्यंत आवश्यक है और इसके लिए जागरूकता फैलाने की जरुरत है.
वहीं, मोदी सरकार द्वारा EPFO सैलरी लिमिट में बदलाव करने से देश के लाखों EPFO धारकों के मन में हर महीने आने वाली सैलरी और पेंशन अंशदान को लेकर तरह-तरह सवाल आ रहे हैं. जिसका सही और सटीक जानकारी नहीं मिलने से उनमें कंफ्यूजन की स्थिति पैदा हो गई है. ऐसे में ईटीवी भारत आपके हर सवालों का यहां जवाब देने की कोशिश करेगा.
क्या है EPFO?
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन एक सरकारी संगठन है, जो भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन काम करता है. यह विश्व के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा संगठनों में से एक है, यह मुख्यत: भारत में नौकरीपेशा करने वालों के वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करता है.
EPFO का मुख्य काम
EPFO निजी और सार्वजनिक क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की भविष्य निधि, पेंशन और जीवन बीमा योजनाओं का प्रबंधन करती. जब आप किसी कंपनी, फर्म या संगठित ऑर्गेनाइजेशन में काम करते हैं तो आपकी सैलरी का कुछ हिस्सा EPFO अकाउंट में जमा होता है. वहीं, जिनता हिस्सा आपकी सैलरी से कटता है, उतनी ही रकम आपके कंपनी या नियोक्ता को भी देना होता है. जो हर महीने आपके EPF अकाउंट में जाता है, जिसमें एक हिस्सा EPF (Employee Provident Fund) और एक हिस्सा EPS (Employee Pension Scheme) में जाता है. यह पैसा आपको रिटायरमेंट पर एकमुश्त मिलती है. साथ ही आपको हर महीने एक निश्चित पेंशन का लाभ मिलता है.
लिमिट बढ़ने से कैसे बढ़ेगा EPFO का दायरा?
मोदी सरकार ने 17 सितंबर को EPFO की सैलरी लिमिट 15000 हजार से बढ़ाकर 25000 कर दी है. जिससे देशभर में 51 लाख कर्मचारियों के इसके दायरे में आने की उम्मीद है. दरअसल, पहले सैलरी लिमिट ₹15000 थी, नियमों के अनुसार अगर किसी कंपनी में कर्मचारी की (बैसिक+DA) ₹15000 से ज्यादा है तो उसका पीएफ काटना अनिवार्य नहीं था. जिसकी वजह से देशभर में लाखों कर्मचारी इसके दायरे में नहीं आते थे. वहीं, अब ₹25000 की लिमिट करने से कंपनियों और फर्मों को 25000 तक के सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को पीएफ काटना होगा.
अब हाथ में कितनी आएगी सैलरी?
पहले ₹15000 हर महीने पाने वाले कर्मचारी की सैलरी का 12 प्रतिशत EPF अकाउंट में जमा होता था. उदाहरण के लिए 15000 हजार का 12 प्रतिशत यानी (15000x12/100=1800) ₹1800 आपकी सैलरी से कटता था और ₹1800 नियोक्ता कंपनी को भी आपके पीएफ अकाउंट में जमा करना होता था. जिसमें से हर महीने आपके पेंशन खाते (EPS) ₹1250 जमा होती थी. वहीं, अब नये नियम के अनुसार ₹25000 सैलरी लिमिट होने से आपकी सैलरी पहले से खाते में कम आएगी. लेकिन इसका भविष्य में आपको बड़ा फायदा होगा.
उदाहरण से समझिए 25000 का 12 प्रतिशत यानी ₹3000 हर महीने आपके पीएफ अकाउंट में जाएगा. यानी हर माह कटने वाला 1800 का अंशदान बढ़कर 3000 हजार हो जाएगा. जिससे आपको हर महीने करीब 1200 कम सैलरी अकाउंट में क्रेडिट होगा. लेकिन इसी के साथ नियोक्ता कंपनी को भी आपके EP खाते में 3000 हजार हर महीने जमा करने होगी. साथ ही आपका पेंशन अंशदान 1250 से बढ़कर 2083 हो जाएगा. वहीं, PF अकाउंट में पहले से अधिक राशि जमा होने से उसपर मिलने वाला ब्याज की राशि भी काफी बढ़ जाएगी. जो कर्मचारियों को भविष्य की जरुरत पूरा करने में उपयोगी साबित होगा.
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