ICSSR के सहयोग से CSJMU में जुटी विद्वानों की टोली, शोध के नए आयामों पर हुई चर्चा
कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) और समकालीनता पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : April 21, 2026 at 9:25 PM IST
कानपुर: कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) में कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक की प्रेरणा से भाषा संकाय द्वारा एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक आयोजन संपन्न हुआ. भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), नई दिल्ली के सहयोग से 'भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीनता की भूमिका' विषय पर केंद्रित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन 21 अप्रैल 2026 को किया गया.
इस गौरवशाली कार्यक्रम का संयोजन भाषा संकाय के निदेशक डॉ. सर्वेश मणि त्रिपाठी तथा सह-निदेशक डॉ. अंकित त्रिवेदी द्वारा किया गया. संगोष्ठी में देशभर से आए प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई.

भारतीय ज्ञान तंत्र के आधुनिक संदर्भ बताए गये: कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ कुलसचिव राकेश कुमार मिश्र, उप-कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ. इसके पश्चात विश्वविद्यालय की परंपरा के अनुसार अतिथियों का विधिवत स्वागत एवं सम्मान किया गया. संगोष्ठी के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए संयोजक डॉ. सर्वेश मणि त्रिपाठी ने अपने स्वागत भाषण के साथ वैचारिक चर्चा को गति प्रदान की.

उद्घाटन सत्र के दौरान उप-कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने अपने संबोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा की आधुनिक संदर्भों में उपयोगिता को अत्यंत प्रासंगिक और आवश्यक बताया.

शिक्षाविदों का महामंथन: संगोष्ठी के मुख्य वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान तंत्र के विभिन्न अनछुए पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की. विशिष्ट अतिथि के रूप में नालंदा विश्वविद्यालय के प्रो. श्रवण के. शर्मा, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो. कृष्ण मोहन पांडेय तथा सागर विश्वविद्यालय के प्रो. एके अवस्थी ने अपने अनुभव साझा किए. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. अमिताव चक्रवर्ती ने पारंपरिक ज्ञान और समकालीन साहित्य के मध्य समन्वय की आवश्यकता पर विशेष बल दिया. प्रथम सत्र की वैचारिक यात्रा का समापन संयोजक डॉ. अंकित त्रिवेदी द्वारा प्रस्तुत किए गए औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ संपन्न हुआ.

प्रमाण पत्र वितरित किये गये: द्वितीय चरण में तकनीकी सत्र का प्रारंभ प्रो. बी.डी. पांडेय, प्रो. जबा कुसुम और प्रो. अंजीता सिंह के सम्मान के साथ हुआ. इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. बी.डी. पांडेय ने की, जिसमें विभिन्न शोधार्थियों द्वारा अपने मौलिक शोध-पत्रों का प्रस्तुतिकरण किया गया. आधुनिक संसाधनों का उपयोग करते हुए डॉ. पूजा अग्रवाल ने ऑनलाइन सत्र का भी कुशलतापूर्वक संचालन किया. इस ज्ञानवर्धक राष्ट्रीय संगोष्ठी का औपचारिक समापन डॉ. ऋचा शुक्ला के धन्यवाद ज्ञापन और प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण के साथ हुआ. पूरे आयोजन के दौरान विश्वविद्यालय के शिक्षकों और छात्र-छात्राओं में भारी उत्साह देखा गया और यह शोध के नए आयामों को प्रोत्साहित करने वाला सिद्ध हुआ.
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