UNGA: विदेश मंत्री जयशंकर ने 4F, वैश्विक चुनौतियों, बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया
न्यूयॉर्क में विदेश मंत्री जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा 2026 के 81वें सत्र को संबोधित किया.

By ANI
Published : September 22, 2026 at 7:47 AM IST
न्यूयॉर्क: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था अभी दबाव में है और उन्होंने बढ़ते जियोपॉलिटिकल कॉम्पिटिशन, टेंशन और टकराव के बीच बहुपक्षवाद को मजबूती से आगे बढ़ने की अपील की. साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्था को ज़्यादा सहभागी और पारदर्शी बनाने के लिए सुधार की जरूरत पर जोर दिया. साथ ही 4 एफ (F) यानी 'फ्यूल, खाना, फर्टिलाइजर और फाइनेंस चार कारकों पर प्रकाश डाला.
81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौके पर पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म समिट के उद्घाटन को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय बढ़ती प्रतिस्पर्धा और भू-राजनीतिक तनावों के साथ महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तन के दौर का सामना कर रहा है. हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब वैश्विक व्यवस्था दबाव में है.
जयशंकर ने कहा, 'कुछ दशकों से दुनिया में लगातार पुनर्संतुलन हो रही है, जिसकी लंबे समय से उम्मीद थी. हालांकि बहुत ज़्यादा कॉम्पिटिशन, जियोपॉलिटिकल टेंशन और असल झगड़ों ने इसे पूरी तरह से अलग रूप दे दिया है.' उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इन ट्रेंड्स पर रोक नहीं लगाई गई, तो ये अंतरराष्ट्रीय सहयोग के सिद्धांत को कमजोर कर सकते हैं और बहुपक्षवाद को मजबूत करने की अहमियत पर जोर दिया.
Addressed the inaugural ‘Partners for Multilateralism, International Law, Peace and Prosperity (P4M) Summit’ #UNGA81#UNHighLevelWeek pic.twitter.com/eCNJnRT8HS
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) September 21, 2026
उन्होंने कहा, 'अगर इसे रोका नहीं गया तो यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना पर ही सवाल खड़ा कर देगा. इसलिए यह बहुत जरूरी है कि इस समय बहुपक्षीय मजबूती से अपनी बात रखे.' विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने जो चुनौतियाँ हैं, वे राजनयिक बातों से कहीं ज़्यादा है और इनका सीधा असर वैश्विक शांति, सुरक्षा और विकास पर पड़ता है.
यहाँ दांव पर बहुत असली मुद्दे हैं, सिर्फ बातें और बातें नहीं. शांति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का भविष्य, क्लाइमेट एक्शन और क्लाइमेट जस्टिस का, नई टेक्नोलॉजी और डेवलपमेंट फाइनेंस का, आतंकवाद का मुकाबला करने और सप्लाई चेन को मजबूत करने का और आपदा से निपटने और महामारी के लिए तैयारी करने का भविष्य. यह सब सहयोग करने की इच्छा पर निर्भर करता है.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इंटरनेशनल सिस्टम की कई कामयाबियां मिलकर की गई कोशिशों की वजह से ही मुमकिन हुई है और उन्होंने मौजूदा फ़ायदों को बनाए रखने और आगे सुधार की दिशा में काम करने की अपील की. उन्होंने कहा, 'आइए हम यह मानें कि हमने अब तक जो कुछ भी हासिल किया है, वह सिर्फ मिलकर की गई कोशिशों से ही है. यहां सबक यह है कि बेहतर के लिए कोशिश करते हुए अच्छाई को सुरक्षित रखें.'
जयशंकर ने मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए बड़े समाधानों का इंतजार करने के बजाय, मौजूदा झगड़ों और दुनिया भर में हो रही दिक्कतों के लिए व्यावहारिक और लक्षित जवाब देने की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा, 'यह मकसद कई कोशिशों और पहलों को मिलाकर पूरा किया जा सकता है.
जहां तक मौजूदा झगड़ों की बात है, तो खास पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा सकता है, जबकि हम बड़ी शांति के लिए कोशिश कर रहे हैं.' उन्होंने फ्यूल, खाना, उर्वरक और फाइनेंस से जुड़ी चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता.
जयशंकर ने कहा, 'फ्यूल, खाना, फर्टिलाइजर और फाइनेंस के चार एफ (F) संकट' को ऐसे ही नहीं छोड़ा जा सकता.' उन्होंने उभरती टेक्नोलॉजी और नई क्षमताओं के साथ-साथ ग्लोबल सप्लाई चेन में कमजोरियों को कम करने के उपायों पर प्रतिक्रिया देने के लिए इंटरनेशनल फ्रेमवर्क की जरूरत पर भी जोर दिया.
जयशंकर ने कहा, 'बहुपक्षवाद तभी सबसे अच्छा काम करेगा जब अंतरराष्ट्रीय कानून और नियमों का पूरी तरह से पालन किया जाएगा.' इंस्टीट्यूशनल सुधार की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि बहुपक्षवाद के लिए ज़्यादा वकालत करने के साथ-साथ मजबूती से लागू करने की भी जरूरत होगी. जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय संस्थान में ज़्यादा भागीदारी वाली बातचीत और पारदर्शी फैसले लेने की मांग करते हुए कहा कि यूएन सिस्टम में भरोसा वापस लाने के लिए ऐसे बदलाव जरूरी हैं.

