बाबा विश्वनाथ और पशुपतिनाथ का होने जा रहा मिलन...जानें क्या करने जा रहे भारत-नेपाल
भारत-नेपाल त्रिकोणीय सर्किट: पर्यटन को ध्यान में रखते हुए काशी पुराधिपति से रामनाथ और पशुपतिनाथ के मिलन की योजना पर काम शुरू हो रहा है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : February 4, 2026 at 10:01 AM IST
वाराणसी: भारत और नेपाल का आध्यात्मिक संबंध और भी प्रगाढ़ होने जा रहा है. बनारस में बढ़ते टूरिज्म को देखते हुए यहां के तर्ज पर नेपाल सरकार अपने पर्यटन को बढ़ावा देने जा रही है. नेपाल ने इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से की है. देश-विदेश के भक्तों और पर्यटकों की बढ़ती संख्या के चलते काशी इंटरनेशनल टूरिज्म डेस्टिनेशन बन गई है.
काशी यानी वाराणसी में बाबा के दरबार में हर दिन लाखों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं. यहां आने वाले लोग प्रयाग और अयोध्या भी जाते हैं. ऐसे में सनातन धर्मावलंबियों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार टूरिज्म सर्किट को बढ़ाने का काम कर रही है, यह सर्किट काशी पुराधिपति से रामनाथ, पशुपतिनाथ होकर गुजरेगा.
वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के बाद से यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आना होता है. इससे न केवल वाराणसी की पहचान बढ़ी है, बल्कि यहां की अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ हुई है.
उत्तर प्रदेश में बढ़ता टूरिज्म न सिर्फ देशभर में विख्यात है, बल्कि पड़ोसी देश में भी इसका असर देखने को मिल रहा है. यही कारण है कि नेपाल, काशी आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपने यहां भी बुलाना चाहता है, जिससे नेपाल भी धार्मिक पर्यटन में अच्छा ग्रोथ कर सके.
इसी क्रम में, भारत और नेपाल सरकार की ओर से एक नई शुरुआत की जा रही है, जिसके के तहत बाबा विश्वनाथ और पशुपतिनाथ के स्थलों का मिलन किया जाएगा.
धार्मिक पर्यटन का लाभ नहीं ले पा रहा नेपाल
नेपाल के कारोबारी ने बताया कि, पूरे देश में पर्यटन उद्योग पूरे देश में सस्टेनेबल उद्योग है. वाराणसी में धार्मिक पर्यटन बढ़ा है. श्री काशी विश्वनाथ धाम में प्रतिदिन 3 लाख पर्यटक व श्रद्धालु आते हैं. ऐसे ही अयोध्या में 5 लाख लोग आते हैं. हमारे यहां तो साल का 5 लाख का आंकड़ा है. हमारी ही शायद कोई कमजोरी होगी कि हम धार्मिक पर्यटन का लाभ नहीं ले पा रहे हैं. हमारी कनेक्टिविटी अच्छी है, धार्मिक क्षेत्र भी है, लोग बड़ी संख्या में धार्मिक पर्यटन के लिए जाते भी हैं. हम लोग कहां चूक कर रहे हैं, यह समझ नहीं पाए हैं. इसीलिए हम लोग उत्तर प्रदेश में आए हैं, यहां वाराणसी में आए हैं.
भारत कर रहा नेपाल की हर संभव मदद
उन्होंने कहा कि, "हम यह उम्मीद कर रहे हैं कि यहां पर भी नेपाल के लिए धार्मिक टूरिज्म के बारे में लोगों को बताया जाए. भारत सरकार इस क्षेत्र में मदद कर रही है. वहीं, राजस्थान सरकार ने अभी 75,000 लोगों को अपने खर्च पर भेजे हैं. ऐसे ही उत्तर प्रदेश सरकार ने लगभग 40 से 50 हजार लोगों को भेजा है. भारत की हमारे प्रति सहयोग की भावना है. इसके साथ ही, भारत के जो हिन्दू लोग हैं, उनकी रिश्तेदारी नेपाल में है. उनका आना-जाना भी रहता है. फिर भी जो हमारी इच्छा है, वह आंकड़ा अभी भी नहीं पहुंच सका है. हम उसी कोशिश में उत्तर प्रदेश में लोगों को जागरूक कर रहे हैं और चीजों को सीख भी रहे हैं."
पशुपतिनाथ नहीं आए तो आपकी स्प्रिचुअल जर्नी अधूरी
सुनील शर्मा, नेपाल टूरिज्म बोर्ड ने बताया, ‘नेपाल और भारत में स्प्रिचुअल सर्टिक पहले से ही है. लोगों को इसके बारे में जानकारी नहीं, जिसे लेकर हम उन्हें जागरूक कर रहे हैं. जब लोगों को इसके बारे में पता चल जाता है को दो देशों के बीच में टूर ऑपरेशन्स का काम करना होता है. इसलिए हम लोग भी अलग-अलग प्रोग्राम कन्क्लेव करते हैं.
उत्तर प्रदेश के बॉर्डर एरिया के अलग-अलग जगहों से लोगों को हम नेपाल में आमंत्रित करते हैं. इसके साथ ही, हम लोग सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक जागरूकता फैलाने का काम करते हैं. हम यह कहते हैं कि अगर आप पशुपतिनाथ नहीं आते हैं तो आपकी स्प्रिचुअल जर्नी अधूरी रह जाती है.
ये भी पढ़ें- काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने लॉन्च किया 'AI चैटबॉट'; मिलेगी हर जानकारी, जानिये कैसे करें इस्तेमाल?

