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हरियाणा की जज ने पेश की मिसाल, त्रियुगीनारायण में किया सादगी से दहेज रहित विवाह

हरियाणा न्यायिक सेवा में कार्यरत जज प्रियंका वर्मा ने फरीदाबाद निवासी प्रशांत के साथ वैदिक परंपराओं के साथ सात फेरे लिए.

JUDGE WEDDING AT TRIYUGINARAYAN
त्रियुगीनारायण में जज और वकील का विवाह (Photo Courtesy: Priyanka's Family)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : April 24, 2026 at 8:12 AM IST

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Updated : April 24, 2026 at 8:44 AM IST

3 Min Read
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रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड में स्थित भगवान शिव-पार्वती के विवाह स्थल त्रियुगीनारायण से शानदार खबर है. रुद्रप्रयाग जनपद स्थित पौराणिक एवं आस्था के केंद्र त्रियुगीनारायण मंदिर में एक ऐसा विवाह संपन्न हुआ, जिसने समाज को नई दिशा देने का कार्य किया है. हरियाणा न्यायिक सेवा में कार्यरत जज प्रियंका वर्मा ने फरीदाबाद निवासी प्रशांत के साथ 19 अप्रैल 2026 को पूर्णत: सादगी, वैदिक परंपराओं और बिना दहेज के सात फेरे लेकर वैवाहिक जीवन में प्रवेश कर एक आदर्श प्रस्तुत किया.

त्रियुगीनारायण में अनोखा विवाह: यह विवाह इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि जिस पवित्र धाम में यह संपन्न हुआ, वहीं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था. इसी आस्था और आध्यात्मिक जुड़ाव के कारण प्रियंका वर्मा ने अपने विवाह के लिए इस स्थान का चयन किया.

JUDGE WEDDING AT TRIYUGINARAYAN
विवाह के बाद फोटो सेशन (Photo Courtesy: Priyanka's Family)

सादगी और सीमित मेहमानों में हुआ आयोजन: विवाह समारोह में कुल 38 लोग ही शामिल हुए. इनमें वधू पक्ष से 13 और वर पक्ष से 25 सदस्य उपस्थित रहे. आयोजन में किसी भी प्रकार की भव्य सजावट, डीजे, आतिशबाजी या अनावश्यक खर्च से पूरी तरह परहेज किया गया. पूरे समारोह में केवल पारंपरिक विधि-विधान और पारिवारिक गरिमा को प्राथमिकता दी गई.

न्यायिक सेवा और विधि क्षेत्र से जुड़े हैं दूल्हा-दुल्हन: प्रियंका वर्मा हरियाणा न्यायिक सेवा में जज के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में वो फरीदाबाद में सेवाएं दे रही हैं. वहीं उनके जीवन साथी प्रशांत विधि व्यवसाय से जुड़े हुए हैं. दोनों ही शिक्षित और जागरूक परिवारों से संबंध रखते हैं, जिन्होंने सामाजिक मूल्यों को प्राथमिकता देते हुए इस विवाह को आदर्श बनाया.

परिवार की विचारधारा बनी प्रेरणा: प्रियंका वर्मा के पिता डॉ. अशोक कुमार वर्मा हरियाणा पुलिस में उप-निरीक्षक हैं. उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया जा चुका है. वे राष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेता, डायमंड रक्तदाता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय समाजसेवी भी हैं. प्रियंका की माता सुषमा वर्मा कुरुक्षेत्र में विशेष पुलिस अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं.

JUDGE WEDDING AT TRIYUGINARAYAN
त्रियुगीनारायण मंदिर में विवाह करतीं जज प्रियंका वर्मा और वकील प्रशांत (Photo Courtesy: Priyanka's Family)

डॉ. वर्मा लंबे समय से दहेज प्रथा के प्रबल विरोधी रहे हैं. समाज में इस कुरीति के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाते रहे हैं. उनका स्पष्ट मानना है कि दहेज जैसी प्रथाएं न केवल सामाजिक असमानता को बढ़ावा देती हैं, बल्कि बेटियों के सम्मान को भी ठेस पहुंचाती हैं. उन्होंने अपने परिवार में भी इन्हीं सिद्धांतों को अपनाते हुए अपनी बेटी का विवाह पूरी तरह दहेज-मुक्त और सादगीपूर्ण तरीके से संपन्न कराया.

समाज के लिए बना प्रेरणादायक उदाहरण: यह विवाह केवल एक पारिवारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि समाज के लिए एक मजबूत संदेश बनकर उभरा है. इस पहल ने यह साबित कर दिया कि विवाह जैसे पवित्र बंधन में दिखावा, फिजूलखर्ची और दहेज का कोई स्थान नहीं होना चाहिए. आज के दौर में जहां शादियों में अत्यधिक खर्च और आडंबर आम हो गया है, वहीं यह विवाह एक सकारात्मक सोच और सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. यदि समाज के अन्य परिवार भी इस प्रकार की पहल अपनाएं, तो दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों को जड़ से समाप्त किया जा सकता है.

इस सादगीपूर्ण विवाह ने यह संदेश दिया है कि संस्कार, समझदारी और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ किए गए कार्य न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन सकते हैं.


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Last Updated : April 24, 2026 at 8:44 AM IST