भारत के लिए सस्टेनेबिलिटी कोई मॉडर्न बातचीत का एजेंडा नहीं, बल्कि सभ्यता का सिद्धांत है: मंत्री भूपेंद्र यादव
मंत्री ने यह बयान एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) के वर्ल्ड सस्टेनेबल डेवलपमेंट समिट में अपने भाषण में दिया.

Published : February 26, 2026 at 8:10 AM IST
नई दिल्ली: केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बुधवार को कहा कि भारत के लिए सस्टेनेबिलिटी कोई मॉडर्न बातचीत का एजेंडा नहीं है, यह एक सभ्यतागत नैतिकता है.
मंत्री ने यह बात यहां एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) के वर्ल्ड सस्टेनेबल डेवलपमेंट समिट में अपने भाषण में कही. इस मौके पर उन्होंने कहा, 'भारत के लिए सस्टेनेबिलिटी कोई मॉडर्न बातचीत का एजेंडा नहीं है, यह एक सभ्यतागत नैतिकता है. इसलिए हम बदलाव की बात करते हैं, हम डेवलपमेंट को छोड़ने की बात नहीं करते.' यह बताते हुए कि परिवर्तन का तात्पर्य संरचनात्मक बदलाव है, उन्होंने कहा कि भारत में परिवर्तन का अर्थ गहन चेतना है.
यादव ने कहा, 'हम (भारत) सामाजिक न्याय और अंतर-पीढ़ीगत समानता के साथ पारिस्थितिक सीमाओं के भीतर विकास को फिर से परिभाषित करने की बात करते हैं. विजन यथार्थवाद में लंगर डाला जाना चाहिए और महत्वाकांक्षा से संचालित होना चाहिए. भारत का विजन 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता हासिल करना, उत्सर्जन तीव्रता प्रतिशत में कमी लाना, 2070 तक नेट जीरो हासिल करना, राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को आगे बढ़ाना और जलवायु लचीला बुनियादी ढांचे का निर्माण करना स्पष्ट है.'
मंत्री ने आगे कहा, 'लेकिन बदलाव के लिए ग्लोबल विजन की भी जरूरत है. इसके लिए दुनिया भर में रिन्यूएबल एनर्जी को तीन गुना करना है. क्लाइमेट एम्बिशन और क्लाइमेट फाइनेंस को एक साथ आगे बढ़ना होगा. जब फाइनेंशियल सिस्टम ट्रांसपेरेंट, प्रेडिक्टेबल और इनक्लूसिव होते हैं, तो बदलाव वादे से काम में बदल जाता है.'
समिट के बारे में बात करते हुए मंत्री ने कहा, 'मैं वर्ल्ड सस्टेनेबल समिट में हूँ, मैं खुद टेरी (TERI) के काम में काफी हद तक शामिल हूँ. वर्ल्ड सस्टेनेबल डेवलपमेंट समिट का उद्घाटन करने का मौका मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात है. पाँच दशकों से ज्यादा समय में टेरी ने खुद को क्लीन एनर्जी और सस्टेनेबल एग्रीकल्चर से लेकर वॉटर सिक्योरिटी, लैंड रिसोर्स मैनेजमेंट, एयर पॉल्यूशन और लो एमिशन ट्रांसपोर्ट सिस्टम जैसे क्षेत्र में सबूतों पर आधारित और साइंस पर आधारित इंटरवेंशन डेवलप करने वाले लीडर के तौर पर स्थापित किया है.'
उन्होंने कहा, 'इससे भी ज्यादा जरूरी बात यह है कि पिछले 25 सालों में वर्ल्ड सस्टेनेबल डेवलपमेंट समिट ग्लोबल साउथ का एक अनोखा फोरम बन गया है, जो सरकारों, इंडस्ट्री, शैक्षिक जगत, सिविल सोसाइटी और कम्युनिटी को एक साथ लाता है, ताकि सस्टेनेबिलिटी के साइंस को पॉलिसी, पार्टनरशिप और प्रैक्टिकल एक्शन में बदला जा सके. यह कोई आम उपलब्धि नहीं है. टेरी सच में क्लाइमेट एक्शन के फील्ड में एक तरह का पार्टनर रहा है.'
मंत्री ने आगे कहा, 'आज सिर्फ विरासत का जश्न नहीं है, यह इंसानियत और धरती के लिए एक अहम पल है. इस समिट की मुख्य थीम है बदलाव, नजरिया, आवाजें और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए वैल्यूज एक स्ट्रेटेजिक जरूरत है.'
इस मौके पर यादव ने 'हिम-कनेक्ट' का भी उद्घाटन किया. यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जिसका मकसद इंडियन हिमालयन रीजन (IHR) में काम करने वाले रिसर्चर्स को स्टार्ट-अप्स, इन्वेस्टर्स और पॉलिसीमेकर्स से जोड़ना है. इसे तीन दिन के टेरी (TERI) के वर्ल्ड सस्टेनेबल डेवलपमेंट समिट के हिस्से के तौर पर ऑर्गनाइज किया जा रहा है. यह 26 और 27 फरवरी को विजिटर्स के लिए खुला रहेगा. आईएचआर के नाजुक इकोसिस्टम के लिए डेवलप की गई 24 से ज्यादा टेक्नोलॉजी, प्रोटोटाइप, पेटेंट और पायलट प्रोजेक्ट्स को शोकेस किया जा रहा है.

