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मोदी, बनारस और मुसलमान; बुनकरों की बस्ती से रिपोर्ट में पढ़िए- मुस्लिम वोटर्स ने क्यों खारिज किया पीएम का विकास मॉडल? - PM Modi Tough Battle

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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : May 30, 2024, 12:02 PM IST

Updated : Jun 1, 2024, 11:24 AM IST

साल 2014 में जब आम चुनाव हुए तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़े मार्जिन से जीत दर्ज की थी. इसके बाद वे लगातार दो बार यानी 10 साल तक बनारस के सांसद रहे हैं. इस बार तीसरी बार वे चुनाव लड़ने जा रहे हैं. एक जून को बनारस में मतदान होना है. इससे पहले ईटीवी भारत ने पीलीकोठी मुस्लिम इलाके के लोगों से सांसद के काम के बारे में जानने की कोशिश की. साथ ही बुनकरों के मौजूदा हालात पर भी बात की है. इस दौरान लोगों का कहना है कि वे सरकार बदलने के मूड में हैं. महंगाई और कई नियमों ने व्यापार और व्यापारी की कमर तोड़ दी है.

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वाराणसी लोकसभा सीट पर पीएम मोदी की लड़ाई. (फोटो क्रेडिट; Etv Bharat)

वाराणसी लोकसभा सीट पर बुनकर और मुस्लिम मतदाता का इस बार क्या रुझान है, संवाददाता प्रतिमा तिवारी ने परखा. (वीडियो क्रेडिट; Etv Bharat)

वाराणसी: 'लश्कर भी तुम्हारा है, सरदार भी तुम्हारा है, तुम झूठ को सच लिख दो, अखबार तुम्हारा है.' बनारस के बुनकर आज कुछ यही लाइनें बोल रहे हैं. बनारस का विकास और तमाम योजनाएं चलाए जाने के दावे सरकार और यहां के सासंद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जरूर करते हैं. मगर बनारस में मुस्लिम का गढ़ कहे जाने वाले पीलीकोठी मुस्लिम इलाके के लोग इस बात को मानने से इनकार कर रहे हैं.

इनके पास कई वजहें भी हैं. बुनकर पलायन कर रहे हैं, बिजली के दाम बढ़े हैं और फिर महंगाई चरम पर पहुंच गई है. इनका कहना है कि यह विकास का दावा सिर्फ एक दिखावा है. काशी का बुनकर भुखमरी के कगार पर है.

बुनकर पलायन को मजबूर: पीलीकोठी में रहने वाले लोगों का कहना है कि बुनकर बहुत परेशान हैं. अधिकतर बुनकर पलायन कर गए हैं. मुलायम सिंह यादव की जब सरकार थी तो उन्होंने बुनकरों को बिजली के बिल में रियायत देने का काम किया था. बुनकर उनसे खुश था. बिजली का रेट पहले 62 रुपए था, आज ये लोग 400 पार कर दिए हैं. 860 रुपये बिल हो गया है. आज बुनकर भुखमरी के कगार पर है. भाजपा की सरकार बस मंदिर-मस्जिद, हिन्दुस्तान-पाकिस्तान और मुसलमान का नाम लेने का काम करती है.

बनारस के सांसद पीएम मोदी को दिया जीरो नंबर: लोगों का कहना है कि पीएम मोदी मंगलसूत्र की बात करते हैं. वे खुद अपनी पत्नी के मंगलसूत्र की इज्जत नहीं रख सके. वे दूसरों की बात करते हैं. बनारस का बुनकर सूरत, महाराष्ट्र, हरियाणा कहां-कहां चला जा रहा है. देश की हालत आज किसी से नहीं छिपी है. कारोबार की स्थिति दयनीय और चौपट हो चुकी है. सब कुछ उसी पर निर्भर करता है.

दवा, सिलेंडर और राशन बहुत महंगा हो गया है. इस बार मिजाज में हम लोगों के यही है. 500 रुपये जब सिलेंडर था तब मनमोहन सिंह की सरकार थी. तब ये लोग बहुत ढिंढोरा पीट रहे थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीबों के बारे में सोच ही नहीं रहे हैं. बनारस के विकास के नाम पर हम सांसद के तौर पर पीएम मोदी को जीरो नंबर देंगे.

रोजगार के नाम पर युवाओं को मिल रहीं लाठियां: युवाओं के रोजगार की बात पर यहां के युवाओं का कहना है कि वैकेंसी निकल रही है, कैंसिल हो जा रही हैं. युवाओं को रोड पर मारा जा रहा है. स्टार्ट-अप के नाम पर पकौड़ा तलने की बात करते हैं. सरकार सिर्फ धर्म, जातिवाद और परिवारवाद की बात करती है. बनारस में सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी का है.

यहां पर अधिकतर मुस्लिम वर्ग के युवा बुनकरी का काम करते हैं. आज हमारा काम बंद है और इसकी वजह से बुनकर पलायन कर चुके हैं. हर परिवार से दूसरा-तीसरा व्यक्ति बाहर है. महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है. दवाई और पढ़ाई जीवन के लिए बहुत जरूरी है. दोनों ही चीजें महंगी हो गई हैं. बनारस की गलियों के हालात खराब हैं. बनारस के लोग इस बार सरकार बदलने के मूड में हैं.

नोटबंदी और जीएसटी ने तोड़ दी व्यापार की कमर: यहां के लोगों का कहना है कि जब से सरकार ने नोटबंदी की और जीएसटी लागू किया तब से व्यापारियों की कमर तोड़ दी है. आज जीएसटी की वजह से सारा व्यापार बंद हो गया है और पूरा माल डंप हो गया है. बनारस का साड़ी कारोबार गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक है. सन् 1600 से व्यापार शुरू हुआ है.

इस व्यापार में तमाम जाति, धर्म और वर्ग के लोग शामिल हैं. इस समय हालात ये हैं कि बनारस का अधिकांश पावरलूम और हथकरघा बंद की स्थिति में है. ये लोग रिक्शा चला रहे हैं, आलूचाप बेच रहे हैं, सब्जी बेच रहे हैं. जिस तरह से इन्होंने टैक्सेशन किया है उस वजह से बनारसी प्रोडक्ट काफी महंगे पड़ रहे हैं. प्रोडक्ट बिक नहीं रहे हैं.

भुखमरी के कगार पर है बुनकर: पीलीकोठी के मुस्लिम समाज के लोगों का कहना है कि, प्रोडक्ट बनाने के लिए जो रॉ-मैटेरियल लगता है उनके दाम भी कम होने चाहिए. बनारस में जो भी विकास हुआ है, सब कुछ फेक है. सड़कों को चमका दिया है, लेकिन रोड-टैक्स ले लिया है.

हालात अच्छे नहीं हुए बल्कि और खराब हुए हैं. साल 2014 में बुनकरों का हाल बहुत ही अच्छा था. अब हालात बदतर हो गए हैं. बुनकर भुखमरी के कगार पर हैं. किसी भी तरह से व्यापार के लाभ नहीं पहुंचा है. उनका कहना है कि इससे पहले की सरकार में बिजली पर भी रियायत मिल जाती थी. आज बिजली का दाम भी बहुत अधिक बढ़ गया है. महंगाई के कारण प्रोडक्ट तैयार करना और बेंचना दोनों मुश्किल हो रहा है.

वाराणसी लोकसभा सीट का 2014 का परिणाम.
वाराणसी लोकसभा सीट का 2014 का परिणाम. (फोटो क्रेडिट; Etv Bharat)

2014 में रिकॉर्ड मतों से जीते थे पीएम मोदी: बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में रिकार्ड मतों से यहां पर जीत दर्ज करके इतिहास रचा था. 2014 में नरेंद्र मोदी ने यहां आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल को 371784 वोटो से हराया था, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय को उस वक्त महज 75614 वोट मिले थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 581022 वोट पाकर बड़ी जीत दर्ज की थी.

वाराणसी लोकसभा सीट का 2019 का परिणाम.
वाराणसी लोकसभा सीट का 2019 का परिणाम. (फोटो क्रेडिट; Etv Bharat)

2019 में पीएम मोदी के अलावा सबकी जमानत हो गई थी जब्त: वहीं, 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत का आंकड़ा बहुत ज्यादा था. प्रधानमंत्री ने 674664 वोट पाकर पहले नंबर पर रहते हुए बड़ी जीत हासिल की थी. जबकि, समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी शालिनी यादव दूसरे नंबर पर 195159 वोटों से पराजित हुई थीं. तीसरे नंबर पर कांग्रेस के अजय राय, चौथे नंबर पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के सुरेंद्र राजभर और पांचवें नंबर पर नोटा था. सबसे बड़ी बात यह है कि चुनाव में किसी की भी जमानत नहीं बच पाई थी.

बनारस में किस जाति के कितने वोटर.
बनारस में किस जाति के कितने वोटर. (फोटो क्रेडिट; Etv Bharat)

बनारस में क्या वोटों का गणित: वोटों के समीकरण की बात करें तो बनारस में 82% हिंदू वोटर हैं. जबकि, मुसलमान 16 फीसद आते हैं. इसके अलावा हिंदुओं में भी 12 फीसदी मतदाता अनुसूचित जाति और एक बड़ा हिस्सा पिछड़ी जाति से संबंध रखने वाला है. वाराणसी में कुल वोटरों की संख्या की बात करें तो 19,62,821 वोटर हैं. इनमें से 8,97,343 महिला वोटर हैं, 10,65,343 पुरुष वोटर हैं, जबकि 135 अन्य वोटर शामिल हैं.

पीएम मोदी ने 10 लाख से अधिक वोट पाने का रखा लक्ष्य: इस सीट की 65 फीसदी आबाद शहरी क्षेत्र और 35 फीसदी आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है. कुल आबादी का 10.01 फीसदी जनजाति और 0.7 फीसदी दलित वर्ग से हैं. पीएम मोदी और भाजपा ने इस बार यानी लोकसभा चुनाव 2024 में 10 लाख से अधिक वोट पाने का लक्ष्य रखा है.

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Last Updated : Jun 1, 2024, 11:24 AM IST
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