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तीन दोस्तों ने उत्तराखंड के पहाड़ों में खड़ी की एस्ट्रोपाठशाला, तैयार कर रहे भविष्य के साइंटिस्ट, जानिये कैसे

नैनीताल के तीन युवा एस्ट्रोवर्स स्टार्टअप के जरिए स्कूलों बच्चों को दे रहे अंतरिक्ष विज्ञान की शिक्षा.

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पहाड़ की एस्ट्रोपाठशाला! (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : May 17, 2025 at 8:15 PM IST

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Updated : May 17, 2025 at 9:10 PM IST

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(भावनाथ पंडित) हल्द्वानी: उत्तराखंड की शांत वादियों के बीच तीन दोस्तों की अटूट मेहनत से एक अनोखी पहल ने जन्म लिया. नाम है एस्ट्रोवर्स- एक स्वदेशी स्टार्टअप जो न सिर्फ बच्चों को अंतरिक्ष विज्ञान की शिक्षा दे रहा है. बल्कि क्षेत्रीय विकास और युवाओं को नई दिशा भी दे रहा है. एस्ट्रोवर्स, कभी तीन बचपन के दोस्तों अजय रावत, राहुल पांथरी और शुभम कुमार की एक छोटी सी ख्वाबों भरी शुरुआत थी. लेकिन आज उनका स्टार्टअप उत्तराखंड के बच्चों को अंतरिक्ष की दिशा में ले जाने का काम करने के साथ दूसरों को रोजगार से भी जोड़ रहा है.

अजय रावत- रेलवे इंजीनियर से अंतरिक्ष क्रांति के सूत्रधार: एस्ट्रोवर्स के सीओ फाउंडर एंड सीईओ अजय रावत की कहानी युवाओं को सपने देखने की हिम्मत देती है. रेलवे मंत्रालय में एक सुरक्षित और सम्मानजनक नौकरी छोड़कर, अजय ने अनिश्चितता और संघर्ष की राह चुनी. केवल इस विश्वास पर कि कुछ असाधारण रचा जा सकता है. उनका तकनीकी अनुभव एस्ट्रोवर्स की रीढ़ बना. टेलीस्कोप बनाना, मोबाइल ऑब्जर्वेटरी तैयार करना और इंटरैक्टिव मॉडल्स डिजाइन करना, एस्ट्रोवर्स को असरदार तरीके से विस्तार देने में उनकी मुख्य भूमिका रही है. आज अजय की कहानी ग्रामीण भारत के उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो परंपरा और जुनून के बीच जूझते हैं.

तीन दोस्तों ने खड़ी की एस्ट्रोपाठशाला (Video-ETV Bharat)

शुभम कुमार- अंतरिक्ष शिक्षा में क्रांति की मशाल: सीओ फाउंडर एंड सीओओ एस्ट्रो पाठशाला- एन एजुकेशनल विंग ऑफ एस्ट्रोवर्स, शुभम कुमार को देश के प्रतिष्ठित अंतरिक्ष शिक्षा संस्थान में काम करने का अनुभव था, जिसने इस स्टार्टअप को मजबूत शैक्षणिक आधार दिया. अंतरिक्ष से जुड़ी पेचीदा अवधारणाओं को बड़े ही सरल और रचनात्मक तरीकों से पेश करने में उनका कोई मुकाबला नहीं है. इसके अलावा उन्हें हाइड्रो रॉकेट, टेलीस्कोप, कॉमेट और सैटेलाइट मेकिंग में भी महारथ हासिल है. उनकी इसी खूबी के चलते एस्ट्रो पाठशाला को क्षेत्र के स्कूलों में शानदार कामयाबी मिल पाई है. पिछले तीन वर्षों में उन्होंने 10 से अधिक उच्च स्तरीय शिक्षकों की टीम तैयार की है जो अब कई विद्यालयों में अलग अलग आयु वर्ग के छात्रों को अंतरिक्ष और उससे जुड़ी भविष्य की संभावनाओं के लिए तैयार कर रहे हैं. शुभम भारत में शिक्षा को आसान और प्रैक्टिकल तरीकों से प्रसारित करने के पक्षधर हैं. उनके अनुसार रचनात्मक दृष्टिकोण के बिना शिक्षा को असरदार नहीं बनाया जा सकता है.

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उत्तराखंड के तीन युवा बच्चों को कर रहे अंतरिक्ष शिक्षा के प्रति जागरूक. (PHOTO-ETV Bharat)

राहुल पांथरी-सफल आर्किटेक्ट ने चुनी सितारों की राह: सीओ फाउंडर एंड सीओओ एस्ट्रोस्टॉप एस्ट्रो- टूरिज्म विंग ऑफ एस्ट्रोवर्स, राहुल पांथरी ने जीवन को परंपरागत सामाजिक मानदंडों के अनुसार जीने के बजाय स्वयं अपनी राह बनाने में यकीन किया. राहुल पेशे से आर्किटेक्ट रह चुके हैं. अपने स्वयं के गावों को पलायन की भेंट चढ़ता देख वह इसी भूमि में अवसरों की तलाश करने लगे. जहां स्थानीय लोगों को न सिर्फ अच्छी शिक्षा बल्कि रोजगार के भी अच्छे अवसर प्राप्त हों. अंतरिक्ष में बचपन से रुचि होने के कारण, वह सही मार्गदर्शन और अवसरों की उपलब्धता को बेहतर तरीके से समझते हैं. इसके लिए वे जन साधारण में एस्ट्रोनॉमी के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पुरजोर वकालत करते हैं.

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बच्चों को रॉकेट, टेलीस्कॉप, कोडिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी विषयों पर प्रैक्टिकल एजुकेशन (PHOTO-ETV Bharat)

एस्ट्रोवर्स का काम: जहां अधिकतर स्टार्टअप मेट्रो शहरों की ओर रुख करते हैं. वहीं एस्ट्रोवर्स ने पहाड़ों को ही अपना घर चुना. साफ आसमान और प्रकृति की गोद में यह टीम एस्ट्रो इवेंट्स आयोजित करती है और स्थानीय युवाओं को रोजगार देती है. अब तक 35 से अधिक लोगों को स्थायी रोजगार मिल चुका है. यहां के युवाओं को एस्ट्रोनॉमी एजुकेटर, इवेंट मैनेजर और कंटेंट क्रिएटर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है. अजय रावत ने बताया कि एस्ट्रोवर्स स्कूलों में स्पेस एजुकेशन को प्रमोट करता है. स्कूलों साइंस लैब डिजाइन करता है. जहां एस्ट्रोवर्स के ट्रेंड टीचर्स स्कूल में बच्चों को रॉकेट डिजाइनिंग, सेटैलाइन मैकिंग जैसे कई अन्य विषयों पर पाठ्यक्रम तैयार करते हैं. ये पाठ्यक्रम इसरो से वेरिफाइड भी है. हमारा उद्देश्य भारत में अंतरिक्ष की जागरूकता बढ़ा पाएं और आने वाली पीढ़ी को भविष्य के लिए तैयार कर पाएं.

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भारत में वर्कशॉप के जरिए अभी तक 35 हजार से अधिक बच्चों को दे चुके हैं शिक्षा (PHOTO-ETV Bharat)

भविष्य में एस्ट्रोवर्स पूरे देश में एस्ट्रोस्टॉप्स और स्कूल प्रोग्राम का विस्तार करना चाहता है उनका सपना है कि भारत का हर बच्चा एक दिन खुले आसमान की ओर देखे और न केवल तारों को गिने,बल्कि उन्हें समझ भी सके.

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Last Updated : May 17, 2025 at 9:10 PM IST