ETV Bharat / state

अशोकनगर के इस मंदिर में है दिखती है केदारनाथ की झलक, सीता रसोई से जुड़ा है रोचक किस्सा

अशोकनगर में स्थित है भगवान भोलेनाथ का सीतामढ़ी मंदिर. वन गमन के दौरान सीता ने यहां बनाया था भोजन.केदारनाथ मंदिर से मिलता है इसका स्वरूप.

ASHOKNAGAR SITAMARHI TEMPLES
अशोकनगर के इस मंदिर में है दिखती है केदारनाथ की झलक (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : July 20, 2025 at 4:14 PM IST

5 Min Read
Choose ETV Bharat

अशोकनगर: यहां कई प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर स्थित हैं. कई मंदिर तो हजारों वर्ष पुराने हैं. उन्हीं में से एक भगवान भोलेनाथ का मंदिर है, जिसका नाम सीतामढ़ी मंदिर है. इसका संबंध त्रेता युग से बताया जाता है. यह शिव मंदिर वीरान जंगलों के बीच में स्थित है और इसी वजह से कई लोग अभी तक इसकी पहुंच से दूर हैं.

इस मंदिर की डिजाइन और इसमें स्थापित शिवलिंग केदारनाथ मंदिर से मिलता-जुलता है. किवदंती के अनुसार, वन गमन के दौरान माता सीता यहां ठहरी थी और यहां खाना भी बनाया था. आज भी यहां सीता रसोई मौजूद है.

अशोकनगर में स्थित है भगवान भोलेनाथ का सीतामढ़ी मंदिर (ETV Bharat)

वन गमन के दौरान सीता ने बिताया था समय

अशोकनगर जिला मुख्यालय से करीब 32 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत थूबोन से दक्षिण की ओर जंगल में एक सुरम्य जगह है. यहां पर करीब 1 दर्जन मंदिर स्थित हैं. इन सभी मंदिरों के समूह को सीतामढ़ी मंदिर समूह कहा जाता है. हालांकि भगवान शिव के मंदिर को छोड़कर बाकी मंदिर खंडित हो चुके हैं.

Ashoknagar Sitamarhi Temples Group
माता सीता ने स्थापित किया था शिवलिंग (ETV Bharat)

शिव मंदिर में एक विशाल शिवलिंग स्थापित है. स्थानीय लोगों की माने तो त्रेता युग में वन गमन के दौरान माता सीता ने यहां कुछ समय बिताया था. इसी कारण इस स्थान का नाम सीतामढ़ी पड़ा. पास ही करीला धाम नामक स्थान से भी सीता जी का संबंध जोड़ा जाता है.

Ashoknagar Sitamarhi Shiva Temple
केदारनाथ मंदिर के स्वरूप में हैं महादेव (ETV Bharat)

माता सीता ने स्थापित किया था शिवलिंग

ग्रामीण दुर्ग सिंह यादव बताते हैं कि "जब माता सीता करीला धाम स्थित वाल्मीकि आश्रम की ओर जा रही थीं, तब उन्होंने इसी जंगल में रुककर भोजन बनाया था. भय लगने पर उन्होंने भगवान शिव का स्मरण किया. भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए और कहा कि वे अपना प्रतीक यहीं छोड़ रहे हैं, ताकि माता सीता को डर न लगे.

Ashoknagar Sitamarhi Temples Group
आक्रांताओं ने मंदिर पर किया था हमला (ETV Bharat)

माना जाता है कि यह शिवलिंग माता सीता ने स्वयं स्थापित किया था." जहां सीता माता रुकी थीं, वो स्थान मंदिर के सामने ही मौजूद है. पास में नंदी की मूर्ति भी स्थापित है. मंदिर की दीवारों पर भगवान शंकर, गणेश और उनके गणों की चित्रकारी भी बनी हुई है.

केदारनाथ के स्वरूप में हैं महादेव

पूर्व सरपंच पुत्र शिवप्रताप किरार ने बताया कि "मंदिर की बनावट और शिवलिंग का आकार केदारनाथ मंदिर से मिलता-जुलता है. केदारनाथ धाम में शिवलिंग का आकार थोड़ा बड़ा है और यहां पर शिवलिंग का आकार थोड़ा छोटा है, लेकिन देखने में दोनों ही शिवलिंग एक जैसे नजर आते हैं. महाशिवरात्रि और सावन में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है. आसपास के गांवों के लोग यहां पूजन-अभिषेक करने आते हैं. महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा होती है और भारी संख्या में महादेव के भक्त पहुंचते हैं."

Ashoknagar ancient shiva temple
अद्भुत है मंदिर की नक्काशी (ETV Bharat)

सुल्तानों के आक्रमण से क्षतिग्रस्त हुए मंदिर

इतिहासकार हेमंत दुबे बताते हैं कि "यह मंदिर लगभग 1 हजार साल पुराना है. यहां 10वीं शताब्दी के एक दर्जन से अधिक मंदिर हैं. यह स्थान कभी शैव साधुओं का तपस्थल हुआ करता था. वैष्णव और शैव परंपरा के तीर्थ स्थल भी रहा है. मालवा से चंदेरी की ओर जाने वाले सुल्तान इसी रास्ते से गुजरते थे.

इस दौरान उन्होंने कई बार इन मंदिरों पर आक्रमण भी किया, जिससे मंदिर क्षतिग्रस्त हो गए. आज भी उन खंडित मंदिरों के अवशेष उसी अवस्था में पड़े हैं." उन्होंने बताया कि "एक लोकमान्यता है कि है जब राम, सीता और लक्ष्मण वनवास जा रहे थे, तो वो यहां से होकर गुजरे थे, तो संभवत: इस स्थान का नाम सीतामढ़ी इसी घटना की वजह से पड़ा होगा."

Ashoknagar Sitamarhi Temples Group
नंदी की प्रतिमा (ETV Bharat)

इस मंदिर में कोई नहीं रुकता रात

स्थानीय निवासी परसादी लाल अपने पूर्वजों के सुनी हुई एक लोककथा के अनुसार बताते हैं कि "एक बार एक बाबा अपनी पत्नी के साथ यहां रात में रुकने के लिए आए थे. ग्रामीणों ने उन्हें बहुत मना किया, लेकिन वो अपनी बात पर अड़े रहे और ग्रामीणों की बात नहीं मानी. उस रात बाबा के जोर-जोर से चीखने-चिल्लाने की आवाजें आई. उन्होंने गांव वालों से बताया कि किसी अदृश्य व्यक्ति ने उन पर हमला कर दिया था. इसके बाद से आज तक यहां कोई व्यक्ति रात में नहीं रुकता है. रात होते ही लोग यहां से चले जाते हैं."

मंदिर की कई प्राचीन मूर्तियां चोरी

देखरेख के अभाव में यह प्राचीन मंदिर समूह जर्जर हो चुका है. ग्रामीणों का कहना है कि "पुरातत्व विभाग ध्यान नहीं दे रहा. ऐसा ही रहा तो आने वाले कुछ सालों में यह प्राचीन मंदिर पूरी तरह से नष्ट हो जाएगा. यहां की कई प्राचीन मूर्तियां चोरी हो चुकी हैं. कुछ मूर्तियों को चंदेरी के संग्रहालय में सुरक्षित रखवाया गया है. मंदिर के रखरखाव के लिए पुरातत्व विभाग और प्रशासन किसी तरह का ध्यान नहीं दे रहा, जिसके कारण यह धरोहर धीरे-धीरे नष्ट होती जा रही है."