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प्रेमानंद महाराज के गांव पहुंचते ही सुनाई देने लगती है राधा नाम की गूंज, बचपन के साथी बोले- आधी रात को छोड़ा था घर - Premanand Maharaj

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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : Apr 23, 2024, 12:31 PM IST

Updated : Apr 23, 2024, 12:54 PM IST

मथुरा के चर्चित संत प्रेमानंद महाराज का कानपुर से खास नाता रहा है. वह यहां के नर्वल थाने के अखरी गांल के रहने वाले हैं, जिस घर में उनका जन्म हुआ, जिस जगह पर वह कसरत करते थे, वह आज भी सुरक्षित हैं.

PREMANAND MAHARAJ
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Premanand Maharaj

कानपुर : अपने प्रवचनों से लोगों को दिलों में भक्ति का भाव जगाने वाले चर्चित संत प्रेमानंद जी महाराज कानपुर के रहने वाले हैं. नर्वल इलाके के अखरी गांव में वह पले-बढ़े हैं. यह गांव शहर से 40 किमी दूर है. रामादेवी चौराहे से आगे नर्वल मोड़ से होकर 3 किमी का दूरा पर नर्वल थाना आ जाता है. थाने के बाईं ओर से ही अखरी गांव की ओर से एक सड़क गई है. गांव में दाखिल होते ही राधे-राधे की गूंज सुनाई देती है. घरों के बाहर लोग प्रेमानंद जी महाराज की चर्चा करते दिखाई देते हैं. गांव में प्रवेश करने पर करीब 200 मीटर पर दूरी पर महाराज जी का घर है. यहां उनके बड़े भाई गणेश दीक्षित रहते हैं. दाईं ओर वाले घर को उनकी जन्मस्थली कहा जाता है. ईटीवी भारत की टीम से गांव के लोगों ने कई अहम जानकारियां साझा कीं.

पारिवारिक सदस्य भानु बोले- हमारे घर पर करते थे कसरत : प्रेमानंद महाराज को लेकर पारिवारिक सदस्य भानु प्रकाश ने बताया कि जब बचपन में महाराज जी यहां आते थे तो कसरत करते थे. घर के सामने बने मैदान में बैठते थे और लोगों से खूब बात करते थे. उनके अंदर भगवान को लेकर अद्भुत भक्तिभाव हमेशा रहता था. वह सभी से कहते थे कि अपने आराध्य का ध्यान जरूर करो. अखरी गांव के इस घर में भी चारों ओर राधा-राधा ही लिखा हुआ दिखता है. इसी तरह ही गांव के निवासी गौरव ने कहा कि स्वामी प्रेमानंद के प्रति लोगों की अद्भुत आस्था है. सभी उनके दर्शन को व्याकुल रहते हैं.

8वीं तक साथ पढ़े रजोल बोले- अचानक ही पहुंचे वृंदावन : स्वामी प्रेमानंद महाराज या अनिरुद्ध पांडे (गांव में लोग इसी नाम से जानते हैं) के साथ 8वीं तक की पढ़ाई करने वाले उनके बचपन के मित्र रजोल ने बताया कि स्कूल तक साथ आना-जाना हुआ. स्वामी जी के अंदर गांव से लगाव, गायों से लगाव खूब रहा. अपने चाचा के साथ वह हमेशा गंगा स्नान करने गए. साथ ही बातों-बातों में कहा करते थे हमें संन्यासी जीवन जीना है. इसके बाद एक दिन अचानक रात में 12 बजे वह अपने घर से चले गए.

पहले सरसौल स्थित लोधेश्वर मंदिर गए, वहां से सैमसी झील के पास बने मंदिर पहुंचे. वहां से बिठूर गए और बिठूर से दोबारा वापस सैमसी झील के निकट बने मंदिर आ गए. रजोल ने कहा हमने व परिजनों ने बात करने का प्रयास किया, मगर वह नहीं माने. वह 3-4 सालों तक गंगा किनारे वाराणसी में रहे. जब वहां उनकी तबीयत बिगड़ी तो रामादेवी स्थित अवस्थी नर्सिंग होम पहुंचे और फिर यहां से ही लगभग 20 साल पहले अचानक वह वृृंदावन चले गए.

नामचीन व प्रतिष्ठित लोग भी लेते हैं आशीर्वाद : पिछले कुछ समय से लोगों की आस्था स्वामी प्रेमानंद के प्रति बढ़ी है. वृंदावन में उनके दर्शन के लिए लोग बेताब रहते हैं. कुछ समय पहले ही भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली ने पत्नी अनुष्का शर्मा संग उनके आश्रम में जाकर आशीर्वाद लिया था. मथुरा सांसद हेमा मालिनी भी उनसे मिलने पहुंची थीं. कुछ माह पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत भी स्वामी प्रेमानंद से मिले थे. स्वामी प्रेमानंद की दोनों किडनी खराब हैं. आए दिन उनकी डायलिसिस होती रहती है.

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Last Updated : Apr 23, 2024, 12:54 PM IST
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