सेना के दिग्गज गंगोत्री मिशन के तहत प्लास्टिक उन्मूलन 'कार सेवा' कार्यक्रम शुरू करेंगे
आईआईटी रोपड़- डीटीयू के सहयोग से सेना के दिग्गज प्लास्टिक कचरे के निपटान का समाधान तलाश रहे हैं. ईटीवी भारत के गौतम देबरॉय की रिपोर्ट...

Published : June 3, 2025 at 8:42 AM IST
नई दिल्ली: एक नेक कार्य के तहत भारतीय सेना के पूर्व सैनिक 5 से 7 जून तक उत्तराखंड में गंगोत्री से हरसिल तक बड़े पैमाने पर प्लास्टिक उन्मूलन कार सेवा कार्यक्रम चलाने के लिए तैयार हैं.
भारत की सशस्त्र सेनाएं देश की सीमाओं पर पहरा दे रही हैं. वहीं अतुल्य गंगा के पूर्व सैनिक पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से मातृभूमि की सेवा जारी रखे हुए हैं. रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि इस साल की कार सेवा गंगोत्री से उत्तराखंड के हरसिल तक पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र में प्लास्टिक कचरे को खत्म करने के लिए पांच दिवसीय मिशन है.
रक्षा प्रवक्ता ने ईटीवी भारत को बताया, 'यह मिशन 2025 के विश्व पर्यावरण दिवस की थीम 'वैश्विक प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करना' के अनुरूप है. इसका मिशन वृक्षारोपण, प्रदूषण को लेकर सजगता सहित माइक्रोप्लास्टिक की उपस्थिति को कम करने और नदी को स्वच्छ बनाने के लिए जन जागरूकता बढ़ाना है.'
अतुल्य गंगा ट्रस्ट (AGT) के तहत सेना के दिग्गज 2019 से गंगा नदी के सतत कायाकल्प के लिए समर्पित हैं. इस अभियान को सोमवार को लखनऊ में मध्य कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने हरी झंडी दिखाई. इस पहल को उत्तराखंड राज्य प्रशासन, सीमा सड़क संगठन और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान द्वारा समर्थन दिया जा रहा है.
अतुल्य गंगा स्वयंसेवक 3 जून को उत्तरकाशी में एकत्रित होंगे. 7 जून तक दैनिक आधार पर वे गंगोत्री और हरसिल के बीच सड़क के किनारे और पहाड़ी ढलानों पर बिखरे प्लास्टिक कचरे को एकत्रित करेंगे. रक्षा प्रवक्ता ने कहा, 'एकत्रित कचरे को आगे के निपटान के लिए शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) को सौंप दिया जाएगा.'
सेना के दिग्गजों की पहल का उद्देश्य नागरिकों और सरकारी तंत्र के बीच एक मानसिकता विकसित करना है ताकि प्रकृति की रक्षा के लिए स्थायी प्रथाओं को बढ़ावा देने की तत्काल आवश्यकता को पहचाना जा सके. अतुल्य गंगा ट्रस्ट का मिशन पवित्र नदी में निर्मलता (शुद्धता) और अविरलता (मुक्त प्रवाह) को बहाल करने में निहित है.
साथ ही नागरिकों और नीति निर्माताओं के बीच पर्यावरणीय जिम्मेदारी की संस्कृति को बढ़ावा देना है. आईआईटी रोपड़ और दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) के सहयोग से एजीटी औद्योगिक वैक्यूम क्लीनर का उपयोग करके प्लास्टिक कचरा संग्रह और पोर्टेबल इनसीनरेटर के माध्यम से स्थानीय निपटान के लिए यांत्रिक समाधान तलाश रहा है.
रक्षा प्रवक्ता ने कहा, 'एक बार व्यवहार्य मॉडल स्थापित हो जाने के बाद कार्यान्वयन शुरू हो जाएगा.' इसी तरह उत्तराखंड में नागरिक प्रशासन ने भी विश्व पर्यावरण दिवस के संबंध में कई गतिविधियां शुरू की हैं. अल्मोड़ा के जिला मजिस्ट्रेट आलोक कुमार पांडे ने कहा, 'हम भी कई गतिविधियां कर रहे हैं. हमने पर्यावरण को साफ रखने के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए सफाई कार्यक्रम, साइकिल रैलियां आदि शुरू की हैं. हम वृक्षारोपण गतिविधियां भी अपना रहे हैं.

