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खुद अपने इलाज को तरस रहा है बठाहड़ का स्वास्थ्य उपकेंद्र, महीनों से लटक रहा ताला

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Published : Mar 3, 2022, 3:36 PM IST

हिमाचल के आखिरी छोर तक विकास और स्वास्थ्य सुविधाएं (health facilities in kullu) पहुंचाने का प्रदेश सरकार का दावा खोखला नजर आ रहा है. पर्यटन नगरी कुल्लू की तीर्थन घाटी (tirthan valley of kullu) में दुर्गम ग्राम पंचायतों के करीब 7 हजार लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए बठाहड़ में स्वास्थ्य उपकेंद्र खोला गया था, लेकिन यहां उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही है. ऐसे में यहां के लोगों को 90 किमी दूर कुल्लू का रुख करना पड़ रहा है.

health facilities in kullu
बठाहड़ का स्वास्थ्य उपकेंद्र

कुल्लू: जिले के उपमंडल बंजार की तीर्थन घाटी (tirthan valley of kullu) के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करवाना महज दिखावा बन कर रह गया है. सरकार द्वारा लाखों रुपए खर्च करके तीन ग्राम पंचायतों मशियार, शिल्ली और तुंग की हजारों आबादी के लिए बठाहड़ में करीब चार दशक पहले एकमात्र स्वास्थ्य उपकेंद्र खोला गया था, लेकिन वर्तमान में जमीनी हकीकत यह है कि इस पर भी महीनों से ताला लटका रहता है. जिसके कारण इन दुर्गम ग्राम पंचायतों के करीब 7 हजार लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

दूरदराज क्षेत्र के इन लोगों अपनी छोटी-मोटी बीमारी और प्राथमिक उपचार तक के लिए बंजार या करीब 90 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय कुल्लू (health facilities in kullu) पहुंचना पड़ रहा है. यहां के कई गरीब और असहाय लोग अपने उपचार के लिए मेडिकल स्टोर, देसी वैद्य और झोलाछाप डॉक्टर्स की शरण में जाने को मजबूर हैं. इस क्षेत्र के अधिकांश गांव अभी तक सड़क सुविधा से भी महरूम है जिस कारण आपातकाल स्थिति में लोगों को चिकित्सा सुविधा मिलना असंभव सा हो जाता है.

इलाज न मिलने से दम तोड़ देते हैं मरीज- सर्दियों के दौरान लोगों को और भी अधिक परेशानी होती है, जो बर्फबारी के मौसम में समय पर इलाज न मिलने के कारण गंभीर बीमारी वाले मरीज कई बार अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ जाते हैं. किसी गंभीर बिमारी की हालात में लोगों को कहीं शहर में जा कर निजी अस्पतालों में भारी भरकम राशि खर्च करके अपना इलाज करवाना पड़ रहा है.

स्वास्थ्य उपकेंद्र भवन की हालत खस्ता- यहां के ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी चिकित्सा तंत्र दम तोड़ रहा है. पिछले करीब चार दशक पूर्व में बना एकमात्र स्वास्थ्य उपकेंद्र बठाहड़ इस समय खस्ताहाल अवस्था में है. सरकार द्वारा लाखों रुपए खर्च करके यहां के लोगों को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य उपकेंद्र खोला गया था जो वर्तमान में यह भवन अपनी बदहाली का दंश झेल रहा है. स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते यह भवन जर्जर हालत में पहुंच चुका है. इस भवन के प्रांगण की दीवार एक ओर से ढह चुकी है और इसके चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है. पानी की निकासी के लिए बनाई गई नालियां गंदगी से भरी पड़ी है और यहां जमा हुआ पानी इस भवन की नींव को नुकसान पहुंचा रहा है.

इलाज के लिए तय करना पड़ता है कई किमी का सफर-स्थानीय लोगों हरी राम, परस राम का कहना है कि अगर दूर दराज के गांव में कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है तो उसे कई किलोमीटर दूर बंजार या कुल्लू के किसी निजी या सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए ले जाना पड़ता है. लोगों का कहना है कि अगर सरकार द्वारा यहां के लोगों के लिए लाखों रुपए खर्च करके स्वास्थ्य उपकेंद्र खोला है तो विभाग की जिम्मेवारी बनती है कि इसके लिए स्टॉफ की भी स्थाई तौर पर नियुक्ति करें. यहां पर ना तो कोई कोई स्टाफ नर्स और न ही कोई मेल या फीमेल हेल्थ वर्कर और ना ही फार्मासिस्ट है. स्टाफ की कमी के कारण इस स्वास्थ्य उपकेंद्र में महीनों से ताला लटका पड़ा है और यह वर्ष भर अधिकांश समय बंद ही रहता है. लोगों का कहना है कि आशा वर्कर द्वारा इस भवन को कभी कभार पोलियो ड्रॉप्स और टीकाकरण के लिए खोल दिया जाता है.


जल्द तैनात किए जाएंगे स्वास्थ्य कर्मी- तुंग वार्ड की समिती सदस्य कमला देवी, ग्राम पंचायत मशीयार की प्रधान शांता देवी, ग्राम पंचायत शिलही के उपप्रधान मोहर सिंह, पूर्व उपप्रधान ठेवा राम, वार्ड सदस्य गोयला देवी, वर्तमान में हजारों की आबादी को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने वाला एकमात्र उपकेंद्र बठाहड़ बिना किसी स्टाफ के चल रहा है जो कि चिंता का विषय है, यदि विभाग द्वारा दो सप्ताह के भीतर स्वास्थ्य उपकेंद्र के पदों को ना भरा और ताले ना खोले तो लोग उग्र धरना प्रदर्शन करने से भी गुरेज नहीं करेंगे. वहीं, बंजार के विधायक सुरेन्द्र शौरी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ इस बारे बात की जाएगी. यहां लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सके इस बारे यहां पर स्वास्थ्य कर्मियों की जल्द तैनाती की जाएगी.

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