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शेखपुरा: दूसरे की गाड़ी साहब की सवारी, नियम को ताक पर रख सरकार से वसूल रहे किराया

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Published : Jun 13, 2021, 9:47 PM IST

अधिकारी जिन ठेकेदारों के वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं उन्हें तो प्रति वाहन तय रेट के अनुसार सरकार की ट्रेजरी से किराया मिल रहा है, लेकिन कमर्शियल की जगह प्राइवेट वाहन इस्तेमाल होने से सरकार को टैक्स के रूप में होने वाली आमदनी से हाथ धोना पड़ रहा है.

शेखपुरा
नियम को ताक पर रख घूम रहे अधिकारी

शेखपुरा:जिले में आए दिन पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारी वाहनों की जांच करते नजर आते हैं. आम आदमी अगर हेलमेट न पहने या गाड़ी का पेपर दुरुस्त न हो तो उसे भारी जुर्माना देना पड़ता है. वहीं, कई अधिकारी नियमों को ताक पर रख फर्टाटे से गुजरते हैं, लेकिन पुलिस या परिवहन विभाग के किसी अधिकारी को उन्हें रोकने की हिम्मत नहीं होती. जिला मुख्यालय से लेकर ब्लॉक तक में तैनात अधिकारी धरल्ले से प्राइवेट गाड़ियों की सवारी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें रोकने वाला कोई नहीं.

कमर्शियल की जगह प्राइवेट गाड़ियों का कर रहे इस्तेमाल
अधिकारियों को सरकार द्वारा वाहन की सुविधा दी जाती है. अधिकारियों की सवारी के लिए वाहन विभिन्न ठेकेदार उपलब्ध कराते हैं. नियम के अनुसार अधिकारियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली गाड़ियां कमर्शियल (पीली नंबर प्लेट वाली) होनी चाहिए. यानि कि परिवहन विभाग में गाड़ी का रजिस्ट्रेशन कमर्शियल वाहन के रूप में होना चाहिए, लेकिन ठेकेदार अधिकारियों को प्राइवेट वाहन के रूप में रजिस्टर्ड हुए वाहन उपलब्ध करा रहे हैं. अधिकारी भी नियम को ताक पर रख इन वाहनों का धरल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं. एक आम आदमी अगर अपने निजी वाहन का इस्तेमाल व्यवसायिक कार्य में करे तो उसे 5-10 हजार रुपये जुर्माना और जेल की सजा तक हो सकती है, लेकिन इन अधिकारियों को टोकने की हिम्मत कौन करेगा.

सरकारी खजाने को लग रहा चूना
अधिकारी जिन ठेकेदारों के वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं उन्हें तो प्रति वाहन तय रेट के अनुसार सरकार की ट्रेजरी से किराया मिल रहा है, लेकिन कमर्शियल की जगह प्राइवेट वाहन इस्तेमाल होने से सरकार को टैक्स के रूप में होने वाली आमदनी से हाथ धोना पड़ रहा है. ठेकेदार पैसा तो कमा रहे हैं, लेकिन टैक्स नहीं दे रहे.

नए निजी कार पर टैक्स रेट

गाड़ी की कीमत टैक्स रेट
1 लाख वाहन की कीमत का 8%
1-8 लाख वाहन की कीमत का 9%
8-15 लाख वाहन की कीमत का 10%
15 लाख से अधिक वाहन की कीमत का 12%

कमर्शियल कार पर टैक्स रेट

समय टैक्स
5 साल 9 हजार
10 साल 11 हजार
15 साल 15 हजार

यह है नियम

वाहन कमर्शियल या निजी उपयोग के लिए खरीदा जा रहा है. यह तय करने के बाद रजिस्ट्रेशन कराना होता है. वाहन के निजी उपयोग के लिए प्राइवेट रजिस्ट्रेशन कराना होता है. इसके लिए वन टाइम टैक्स (one time tax) जमा होता है. वाहन चाहे छोटा ही क्यों न हो, यदि उसका व्यवसायिक उपयोग (commercial use) हो रहा है, तो परिवहन विभाग से कमर्शियल रजिस्ट्रेशन होता है. इसके लिए हर तिमाही में टैक्स जमा करना होता है. यह गाड़ी की वैल्यू और सीटों की संख्या पर निर्भर करता है.

ये है प्रावधान

मोटर व्हीकल एक्ट ( MVI Act)-1986 के अनुसार प्राइवेट रजिस्ट्रेशन वाले वाहन के कमर्शियल उपयोग पर प्रतिबंध है. ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है. एमवीआई एक्ट की धारा 192 के अनुसार पहली बार गलती पाए जाने पर 5000 रुपये जुर्माना या तीन माह का कारावास और दूसरी बार गलती पाए जाने पर 10 हजार रुपए का जुर्माना या एक साल तक की सजा हो सकती है. वाहन को भी जब्त करने का प्रावधान है.

अधिकारी ही नियमों का नहीं कर रहे पालन
जिले में आम लोगों से नियम का पालन कराने वाले अधिकारी खुद नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं. वर्षों से जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा निजी पंजीयन वाली गाड़ियों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इन्हें कमर्शियल वाहन इस्तेमाल करने के लिए कई बार निर्देश दिया गया, लेकिन इसका असर नहीं हुआ.

कई विभाग के अधिकारी ट्रासफर या रिटायर्ड हो गए, लेकिन अब भी निजी पंजीयन वाले वाहन चल रहे हैं. इसमें डीडीसी (DDC) का JH02L 2157, वरीय उप समाहर्ता (senior deputy collector) का BR52P0868, एसडीसी (SDC) का BR52P0989, डीपीजीआरओ (DPGRO) का JH02AA2477 और चेवाड़ा प्रखंड के बीडीओ (BDO) का BR01EJ4241 सहित अन्य अधिकारी प्राइवेट पंजीयन के वाहन पर सवारी कर रहे हैं. फिलहाल संबंधित अफसरों से संपर्क साधने की कोशिश की गई लेकिन उनकी तरफ से कोई बयान नहीं आया है.

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