'कमल का फूल, सवर्ण की भूल' फिर गूंजा, UGC मुद्दे पर भाजपा के खिलाफ मैदान में करनी सेना
पंचायत निकाय चुनाव के बीच श्री राजपूत करणी सेना ने भाजपा को चेतावनी दी है.
Published : August 27, 2026 at 4:43 PM IST
जयपुर : राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव के बीच श्री राजपूत करणी सेना ने भाजपा के लिए राजनीतिक मुश्किलें बढ़ाने वाला बड़ा ऐलान किया है. करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल मकराना ने साफ कहा है कि यदि UGC रोलबैक नहीं हुआ तो संगठन भाजपा के खिलाफ चुनावी प्रचार करेगा. निकाय चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों को हराने के लिए गांव-गांव और शहर-शहर अभियान चलाएगा. जयपुर में प्रेस वार्ता के जरिए महिपाल मकराना ने एक बार फिर अपना पुराना नारा 'कमल का फूल, सवर्ण की भूल' दोहराते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी एक चुनाव की नहीं, बल्कि सवर्ण समाज के अधिकारों की लड़ाई है. उन्होंने घोषणा की है कि करणी सेना गांव, शहर और कस्बों में घर-घर जाकर लोगों से संपर्क करेगी और UGC रोलबैक के मुद्दे पर भाजपा के खिलाफ जनमत तैयार करेगी.
समर्थन का फॉर्मूला भी साफ :मकराना ने कहा कि जो उम्मीदवार UGC रोलबैक की मांग का समर्थन करेगा, उसके पक्ष में सवर्ण समाज के कार्यकर्ता चुनाव प्रचार कर सकते हैं. उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे प्रत्याशियों को संगठन की ओर से तन-मन-धन से सहयोग दिया जाएगा. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समर्थन किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं होगा. करणी सेना ने कांग्रेस से भी UGC रोलबैक के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की है. मकराना ने कहा कि किसी भी दल या प्रत्याशी को समर्थन तभी दिया जाएगा, जब वह इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट पक्ष सामने रखे. समर्थन चाहने वाले प्रत्याशियों से लिखित शपथ पत्र लेने की बात भी कही गई है.
'कमल का फूल, सवर्ण की भूल' का नारा फिर : मकराना ने एक बार फिर 'कमल का फूल, सवर्ण की भूल' का नारा दोहराया. उन्होंने कहा कि UGC का मुद्दा केवल एक संगठन का विषय नहीं है, बल्कि इससे जुड़े सवालों को लेकर सवर्ण समाज में नाराजगी है. इसी नाराजगी को राजनीतिक और लोकतांत्रिक तरीके से जनता के बीच ले जाने की तैयारी है. उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा विधायकों से भी केंद्र सरकार के समक्ष इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की. मकराना ने कहा कि नगर निकाय चुनाव राजनीतिक संघर्ष की पहली सीढ़ी होंगे. UGC रोलबैक नहीं होता है तो भाजपा के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा. उन्होंने कहा कि बहुत जल्द दिल्ली जाकर UGC के फैसले को वापस लेने की मांग की जाएगी. मांग पूरी नहीं होने पर आगे की रणनीति सार्वजनिक की जाएगी.
राजनीतिक असर :राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव भाजपा के लिए सरकार बनने के बाद पहला बड़ा स्थानीय चुनाव हैं. ऐसे में करणी सेना की खुली चेतावनी भाजपा के लिए राजनीतिक चुनौती मानी जा रही है. भाजपा के लिए यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब प्रदेश में निकाय चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और पार्टी प्रत्याशियों के चयन में जुटी है. ऐसे में सवर्ण समाज से जुड़े संगठनों की नाराजगी को साधना भाजपा के लिए महत्वपूर्ण चुनौती हो सकती है. हालांकि, इसका चुनावी असर कितना होगा, यह क्षेत्रवार सामाजिक समीकरण और स्थानीय प्रत्याशियों की स्थिति पर निर्भर करेगा. फिलहाल, करणी सेना के इस ऐलान ने निकाय चुनाव की राजनीति में UGC रोलबैक को एक नए राजनीतिक मुद्दे के रूप में सामने ला दिया है. अब निगाहें भाजपा की प्रतिक्रिया और इस मुद्दे पर केंद्र तथा राज्य नेतृत्व के अगले कदम पर रहेंगी.