हिमाचल प्रदेश

himachal pradesh

ETV Bharat / state

सचिवालय के ऐतिहासिक भवन 'एलर्सली' के पास निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को भेजा नोटिस

राज्य सचिवालय के पास हो रहे निर्माण पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है. कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता देव्यानी शर्मा को एमिकस क्युरी नियुक्त किया.

हिमाचल सचिवालय
हिमाचल सचिवालय (ETV Bharat)

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : August 19, 2026 at 4:31 PM IST

शिमला:हिमाचल प्रदेश राज्य सचिवालय के शिमला स्थित ऐतिहासिक एलर्सली भवन के आसपास हुए निर्माण को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है. मामले पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सुनवाई की.

अदालत में राज्य सरकार रेवेन्यू और अर्बन डेवलपमेंट विभागों को नोटिस जारी किए हैं. प्रिंसिपल डिवीजन बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता देव्यानी शर्मा को एमिकस क्युरी (Amicus Curiae) नियुक्त किया है, जो अदालत को स्वतंत्र राय देने और सहायता करने का कार्य करेंगी. अदालत ने ये आदेश के कैप्टन अतुल शर्मा की ओर से मिली एक शिकायत के आधार पर दर्ज की जनहित याचिका पर दिए हैं. मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होगी.

सचिवालय शिमला के आसपास हो रहे निर्माण से जुड़ा है मामला

मामला हिमाचल प्रदेश राज्य सचिवालय शिमला के आसपास हो रहे निर्माण से जुड़ा है. मामले में राज्य सरकार को मुख्य सचिव, डायरेक्टर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, एक्सिन शहरी विकास शिमला और निदेशक रेवेन्यू ऑफिसर शिमला प्रतिवादी बनाया गया है. इसके अलावा नगर निगम के कमिश्नर और आर्किटेक्ट प्लानर को भी मामले में पार्टी बनाया गया है.

हाईकोर्ट ने लिया स्वत संज्ञान

कैप्टन अतुल शर्मा की ओर से मिली एक शिकायत के आधार पर हाईकोर्ट ने स्वत संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है. शिकायत में एलर्सली भवन के तत्काल आसपास निर्माण किए जाने का मुद्दा उठाया गया था. एलर्सली भवन वर्तमान में छोटा शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश सचिवालय के रूप में इस्तेमाल हो रहा है और यह क्षेत्र की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा है. अदालत को बताया गया कि नए बनाए गए कंक्रीट ढांचे ऐतिहासिक भवन की संरचना से भौतिक रूप से ओवरलैप कर रहे हैं और इस कारण यह ऐतिहासिक धरोहर ढांचा प्रभावित हो रहा है.

अदालत को बताया गया कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत निर्माण और एलर्सली भवन से सटे बदलावों से संबंधित जानकारी मांगी गई थी. संबंधित स्वीकृतियों और मंजूरियों की जानकारी उपलब्ध कराई गई, लेकिन इससे यह सामने आया कि अनिवार्य सेट-बैक नियमों का पालन नहीं किया गया. इसके अलावा याचिका में मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत से स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग की गई है. समिति में विरासत संरक्षण विशेषज्ञ, स्ट्रक्चरल इंजीनियर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे. समिति से व्यापक निरीक्षण कर समयबद्ध रिपोर्ट प्रस्तुत करने की मांग की गई है. याचिका में उन अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई है, जो अवैध अतिक्रमण की अनुमति देने, उसे सुगम बनाने, नजरअंदाज करने या रोकने में विफल रहने के लिए जिम्मेदार रहे हों.

ये भी पढ़ें: एसएमसी टीचर्स की एलडीआर भर्ती परीक्षा का मामला, न्यूनतम पासिंग मार्क्स घटाने से हाईकोर्ट का साफ इनकार