दिल्ली

delhi

ETV Bharat / state

दिल्ली सरकार का बजट 'अलर्ट': 9 महीने में 50 फीसद फंड नहीं हो सका खर्च

मुख्य सचिव ने बैठक में बजट खर्च की सुस्त रफ्तार पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है. वहीं बजट की तैयारी भी शुरू हो गई है.

दिल्ली सरकार खर्च की सुस्त रफ्तार पर सख्त
दिल्ली सरकार खर्च की सुस्त रफ्तार पर सख्त (ETV Bharat)

By ETV Bharat Delhi Team

Published : February 9, 2026 at 2:53 PM IST

नई दिल्ली: दिल्ली की सत्ता में 27 साल बाद वापसी के बाद बीजेपी सरकार अपने कार्यकाल का एक साल पूरा करने जा रही है. इसके साथ ही विधानसभा में रेखा सरकार दूसरी बार दिल्ली का बजट पेश करने की तैयारी में जुटी हुई है. वहीं, गत वर्ष दिल्ली सरकार के खजाने में आवंटित बजट का एक बड़ा हिस्सा अभी भी बिना खर्च हुए पड़ा है. वित्तीय वर्ष 2025-26 की समाप्ति की ओर बढ़ते कदमों के बीच सरकार ने अब अपने विभागों पर सख्ती बढ़ा दी है. हाल ही में मुख्य सचिव राजीव वर्मा की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में बजट खर्च की सुस्त रफ्तार पर गहरा असंतोष व्यक्त किया गया. मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी विभाग संशोधित बजट अनुमान (रिवाइज्ड एस्टीमेट) के तहत आवंटित राशि का 100 प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करें. अगर कोई विभाग तय लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रहता है, तो संबंधित विभाग प्रमुख के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.

9 महीने बीते, खर्च आधा भी नहीं:बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है. वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने राजस्व और पूंजीगत व्यय के मद में कुल 59,300 करोड़ रुपये आवंटित किए थे. चौंकाने वाली बात यह है कि पहली तीन तिमाहियों (अप्रैल से दिसंबर 2025) के बीत जाने के बाद भी कुल पूंजीगत बजट का महज 42.57 प्रतिशत पैसा ही खर्च हो सका है. यानी नौ महीनों में सरकार अपने बजट का आधा हिस्सा भी जमीन पर नहीं उतार पाई है.

दिल्ली जल बोर्ड के प्रदर्शन पर संकट के बादल: सबसे खराब स्थिति दिल्ली जल बोर्ड की नजर आ रही है. सरकार ने जल बोर्ड को करीब 9,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट दिया था, लेकिन बोर्ड 10 महीनों में इसका 60 प्रतिशत भी खर्च करने में नाकाम रहा है. आलम यह है कि संशोधित बजट में इसकी राशि घटाकर 50-55 प्रतिशत तक सीमित की जा सकती है और बाकी पैसा जल बोर्ड को सरेंडर करना पड़ेगा. जल बोर्ड के सूत्रों के अनुसार, कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं फाइलों में ही दबी रह गईं हैं. हरियाणा से दिल्ली तक बिछने वाली पाइपलाइन (200 करोड़) का काम शुरू तक नहीं हुआ. मुनक नहर की मरम्मत के लिए आवंटित 50 करोड़ रुपये जस के तस पड़े हैं. पुरानी सीवर लाइनों और वॉटर सप्लाई लाइनों को बदलने के लिए तय 500 करोड़ का काम भी कछुआ गति से चल रहा है. आशंका जताई जा रही है कि इस खराब प्रदर्शन का खामियाजा जल बोर्ड को अगले बजट में भुगतना पड़ सकता है, जहां उसके आवंटन में भारी कटौती की संभावना है.

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (ETV Bharat)

पीडब्ल्यूडी के बजट में हो सकता है इजाफा:दूसरी ओर, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के लिए आने वाला साल खुशियां ला सकता है. हालांकि इस साल पीडब्ल्यूडी का बजट पिछले साल की तुलना में कम (3843 करोड़ रुपये) था, लेकिन भविष्य की बड़ी परियोजनाओं को देखते हुए इसमें बढ़ोतरी की तैयारी है. अधिकारियों के मुताबिक, बारापूला फेज-3 जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़कर 1635 करोड़ हो गई है, जिसे आगामी बजट में शामिल किया जाएगा. पीडब्ल्यूडी की आगामी बड़ी योजनाएं में शामिल दिल्ली के मोदी मिल और सावित्री सिनेमा फ्लाईओवर 371 करोड़ रुपये, महरौली बदरपुर रोड ड्रेनेज सिस्टम 387 करोड़ रुपये, द्वारका सेक्टर-10 मिनी सचिवालय 212 करोड़ रुपये, फुट ओवरब्रिज 60 स्थानों पर प्रस्तावित है.

दुरुपयोग रोकने के लिए साप्ताहिक निगरानी:मुख्य सचिव ने सभी विभाग प्रमुखों को हिदायत दी है कि आखिरी वक्त में बजट खर्च करने की जल्दबाजी में पैसे का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए. योजनाओं की गुणवत्ता के साथ समझौता किए बिना उन्हें समय पर पूरा करना होगा. इसके लिए अब हर विभाग में बजट खर्च की साप्ताहिक निगरानी की जाएगी. विशेष रूप से स्वास्थ्य, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण और परिवहन विभागों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने को कहा गया है.

आगामी बजट की तैयारी शुरू:इस समीक्षा बैठक के साथ ही दिल्ली सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के बजट निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जिनके पास वित्त विभाग की जिम्मेदारी है उनके आदेश पर मुख्य सचिव राजीव वर्मा ने निर्देश दिए हैं कि अगले साल के बजट का आधार वास्तविक खर्च की क्षमता को बनाया जाए. जिन विभागों ने इस साल बेहतर प्रदर्शन नहीं किया है, उन्हें नए बजट में कड़ी शर्तों का सामना करना पड़ सकता है. सरकार की इस सख्ती का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली की जनता के लिए आवंटित धन का अधिकतम लाभ विकास कार्यों के रूप में धरातल पर दिखे, न कि वह केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित रह जाए.

रेखा सरकार की तिमाही दर खर्च के आंकड़ें

तिमाही खर्च का प्रतिशत स्थिति का विश्लेषण

1. पहली तिमाही (अप्रैल-जून) - 14.51% - योजनाओं की शुरुआती प्लानिंग के कारण गति धीमी रही.

2. दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) - 27.45% - मानसून के चलते निर्माण कार्यों में रुकावट आई.

3. तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर)- 42.57%- रफ्तार बढ़ी, लेकिन 50% के लक्ष्य से पीछे.

4. चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) - लक्ष्य 100% - मुख्य सचिव का अल्टीमेटम.

यह भी पढ़ें-

दिल्ली फायर सर्विस की वार्षिक रिपोर्ट: आग की तपिश हुई कम, लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन्स का बढ़ा दबाव

DTC कर्मचारियों को बड़ी सौगात, CM गुप्ता ने वेतन और पेंशन के लिए मंजूर किए 1,200 करोड़ रुपये