इस बैंक में नहीं चलते रुपये डॉलर, बस चलता है 'राम नाम'
कुंभ में बिना किसी एटीएम या चेक बुक वाला एक ऐसा अनोखा ‘राम नाम बैंक’ सेवाएं दे रहा है, जहां केवल ‘भगवान राम’ की मुद्रा चलती है और ब्याज के रूप में आत्मिक शांति मिलती है. यह ऐसा बैंक है जिसमें आत्मिक शांति की तलाश कर रहे लोग करीब एक सदी से पुस्तिकाओं में भगवान राम का नाम लिखकर जमा करा रहे हैं.
प्रयागराज: देश दुनिया के तमाम बैंको के बारे में आपको जानकरी होगी, जिसमें देश के तमाम बैंकों से लेकर स्विस बैंक तक का नाम शामिल होगा. लेकिन संगम नगरी में एक ऐसा बैंक चल रहा है, जहां पर न कोई ताला है न चाबी. यही नहीं इस बैंक में जमा की गई आपकी पूंजी को कोई चुरा भी नहीं सकता है. अपने आप में ये अनोखा बैंक है राम नाम बैंक, जहां पर खाता धारक कमाई हुई राम नाम की पूंजी जमा करते हैं. इसके साथ ही इस बैंक का सारा काम निशुल्क होता है. कैसे चलता है ये राम नाम बैंक, देखिए ईटीवी भारत की इस खास रिपोर्ट...
राम नाम बैंक एक ऐसा बैंक है, जहां न तो किसी तरह का कैश दिखता है न सुरक्षा का ज्यादा तामझाम है. बैंक की सबसे खास बात ये है की बैंक में खाता खुलवाने के लिए भी कोई पैसा नहीं लग रहा है. सबसे खास बात ये है कि इस बैंक में जो पूंजी जमा की जा रही है वो है राम नाम की अनमोल पूंजी. यहां जमा की गयी इस अनमोल पूंजी का लाभ इस लोक में मिलने के साथ ही परलोक में भी मिलेगा, जिस वजह से इस बैंक के खाताधारकों की संख्या निरंतर बढ़ रही है. जानकरी के मुताबिक अस्सी साल से ज्यादा के इस सफर में अब तक 20 लाख लोगों से अधिक लोगों ने इस बैंक जुड़कर राम नाम लिखने का कार्य कर पुण्य अर्जित किया है. सबसे ज्यादा लोग कुम्भ और अर्ध कुम्भ मेले के दौरान इस बैंक से जुड़े हैं. इस बैंक के खाताधारक देश ही विदेशों तक मे भी फैले हुए हैं. बहुत से लोग डाक और कुरियर के जरिये भी राम नाम बैंक में राम नाम पुस्तिका जमा करने के लिए भेजते हैं, जबकि बहुत से लोग तो राम नाम लिखी पुस्तिकाओं को मंदिर में भगवान की चरणों मे भी अर्पण कर देते हैं.
संगम के नजदीक है राम नाम बैंक का शिविर
इन दिनों प्रयागराज में चल रहे माघ मेला में संगम अक्षयवट मार्ग के पर संगम के पास राम नाम बैंक का शिविर लगा हुआ है.जहां पर राम नाम लिखकर जमा करने के लिए राम नाम बैंक में खाता खुलवाया जाता है. इस बैंक में खाता खुलवाने या राम नाम पुस्तिका जमा करने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता है.इस खाते में जमा की गयी राम नाम की पूंजी से लौकिक सुख के साथ ही अलौकिक सुखों की भी प्राप्ति होती है.जिस वजह से राम नाम पुस्तिका में लिखे हुए राम नाम की पूंजी को इस बैंक में जमा किया जाता है. राम नाम बैंक में न सिर्फ राम नाम लिखी पुस्तकें जमा की जाती हैं.बल्कि इसके साथ ही राम नाम लिखने के लिए नयी पुस्तकें लेकर भी जाते हैं.जिसमे वो आस्था के साथ लाल स्याही वाली कलम से राम का नाम लिखते हैं.जब राम नाम लिखने वाली ये पुस्तकें भर जाती हैं तो उनको इकट्ठा करके लाकर इस बैंक में जमा कर दिया जाता है.
राम से बड़ा है राम नाम की महिमा
राम नाम बैंक की व्यवस्था देखने वाले ज्योतिषी आशुतोष वार्ष्णेय का कहना है की धार्मिक पुस्तकों में भी इस बात का वर्णन मिलता है कि राम से बड़ा है राम नाम की महिमा. राम नाम की महिमा का वर्णन अलग अलग धार्मिक ग्रंथों में बहुत ही विस्तार से किया गया है. भगवान शिव भी राम नाम का ही जप करते हैं. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सनातन धर्म में राम नाम की महिमा का कितना पुण्य मिलता है, जिसमें बताया गया है कि किस तरह से पैदा होने के बाद से मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति तक राम नाम से मिलती है.
उनका कहना है कि कलयुग में राम का नाम सभी का हर तरह से कल्याण करने वाला है. राम नाम की महिमा अपरंपार है और राम नाम से सभी बिगड़े हुए काम बनने के साथ ही मुक्ति भी मिलती है. यही वजह है कि उन्होंने राम नाम बैंक से लोगों को जोड़ने के साथ ही लोगों को प्रेरित करने का कार्य भी किया है, जिससे कि ज्यादा से ज्यादा लोग राम नाम का धन कमाएं और अपने जीवन को सफल बनायें. क्योंकि आज के दौर में कोई भी व्यक्ति राम नाम की जमा की हुई पूंजी से अपना और अपने परिवार का कल्याण कर सकता है, जिस वजह उन्होंने राम नाम बैंक चलाने रहने का बीड़ा उठाया है. वहीं कई लोग मनोकामना पूरी होने पर माघ मेला के शिविर में आकर हवन करते हैं तो कुछ लोग राम नाम पुस्तिका छपवाने में भी सहयोग करते हैं.
राम नाम की महिमा से प्रभावित होकर बनी बैंक की सेवादार
उपमा अग्रवाल नाम की महिला के घर परिवार में कई तरह की दिक्कतें थी उसके बाद उन्हें राम नाम बैंक के बारे में जानकारी मिली. जिसके बाद वो राम नाम बैंक गईं और वहां अपना खाता खुलवाया. खाता खुलने के साथ ही वो राम नाम लिखने में जुट गईं, जिसके बाद जल्दी ही उनके घर परिवार में सुख शांति के साथ ही उन्नति हुई, जिसके बाद से वह निरंतर राम नाम बैंक में राम नाम लिखकर जमा करने लगीं. इसके साथ ही उन्होंने अपने आसपास के तमाम लोगों को भी राम नाम की महिमा बताई और राम नाम बैंक से जोड़ने का कार्य किया. यही नहीं अब वो अपने इलाके से उन लोगों की राम नाम लिखी हुई पुस्तिका को लाकर बैंक में जमा भी करती हैं.
उनका कहना है कि बहुत से ऐसे लोग हैं जो राम नाम लिख तो लेते हैं, लेकिन उसे बैंक में लाकर जमा नहीं कर पाते. ऐसे लोगों की मदद करने के लिए वह निरंतर उनकी राम नाम लिखी पुस्तकों को लाकर बैंक में जमा करके का काम करती हैं. उनका कहना है कि इस काम को करने से उनके मन को शांति मिलती है. साथ ही राम नाम की कृपा से घर परिवार में सुख शांति बनी रहती है,जिस वजह से वो लगातार राम नाम बैंक से लोगों को जोड़ने का काम कर रही हैं और राम नाम की महिमा का बखान भी करती हैं. जिससे कि ज्यादा से ज्यादा लोग राम नाम की पूंजी कमाकर अपना कल्याण कर सकें.
पूजा पाठ कराने वाले पुरोहित भी राम नाम की पूंजी बैंक में करते हैं जमा
दूसरे लोगों को कष्ट से मुक्ति दिलाने और उनकी मनोकामनाओं को पूरी कराने के लिए पूजा पाठ व दूसरे धार्मिक आयोजन कराने वाले पुरोहित का भी राम नाम बैंक में खाता है. पुरोहित भी राम नाम लिखकर इस बैंक में जमा कर राम नाम की पूंजी कमा रहे हैं. राजकुमार तिवारी नाम के पुरोहित का कहना है कि वह दूसरे लोगों का पूजा पाठ कराकर उनकी मनोकामनाएं पूरी करवाते हैं. लेकिन अपने कल्याण व सुख शांति के लिए और जाने अनजाने हुए पाप से मुक्ति के लिए वो निरंतर राम नाम लिखने का कार्य करते हैं. राम नाम पुस्तिका पर भगवान श्री राम का नाम लिखकर राम नाम की पूंजी जमा कर रहे हैं.जिससे कि उनके ऊपर किसी तरह की कोई मुसीबत ना आए और राम की कृपा से उनका सारा काम बनता रहे. राम की कृपा से घर परिवार में सुख शांति आए. इसलिए वह भी निरंतर राम नाम लिखने का काम करते हैं और सालों से राम नाम लिखकर इस बैंक में जमा कर पुण्य अर्जित कर रहे हैं.
राम नाम बैंक के संचालन में सहयोग करती हैं ज्योतिषी गुंजन
राम नाम बैंक की व्यवस्था देखने वाली महिला ज्योतिषी गुंजन का कहना है कि राम नाम की ऐसी महिमा है, जिससे कि लोगों के सभी तरह के बिगड़े हुए काम बनते हैं. आदमी बड़ी से बड़ी मुसीबत से सिर्फ राम नाम के सहारे से छुटकारा पा सकता है. सच्चे मन से मनोकामना मांग कर राम नाम लिखने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यही वजह है कि राम नाम बैंक से जुड़ने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है. राम नाम बैंक की तरफ से दी जाने वाली राम नाम पुस्तिका के अलावा अलग- अलग कॉपियों में भी लोग राम नाम लिख कर लाते हैं और उसे बैंक में जमा करते हैं. इस दौरान बैंक में राम नाम पुस्तिका जमा करने वालों का लेखा जोखा वह रखती हैं.
उनके मुताबिक लोग अपनी मनोकामना को पूरी करने उद्देश्य से राम नाम लिखने का प्रण भी लेते हैं और निरंतर कॉपियों में लिखकर उसे लाकर बैंक में जमा करते हैं. इस दौरान लोगों की मनोकामना पूरी होने के बाद भी जो एक बार राम नाम लिखने का बीड़ा उठाता है फिर निरंतर वह राम नाम लिखकर बैंक में लाकर जमा करता रहता है. राम नाम लिखने और बैंक में लाकर जमा करने का किसी तरह का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है और न ही कोई समय सीमा तय की गई है. लोग अपने कार्यों से बचे हुए समय में या पूजा पाठ के दौरान ही कॉपियों में राम नाम लिखने का कार्य करते हैं और जब उनकी कॉपियां भर जाती है तो उसे लाकर बैंक में जमा कर देते हैं.
कॉपी के साथ ही डिजिटल तरीक़े से भी लिखा जा रहा है राम नाम
एक तरफ जहां राम नाम पुस्तिका में राम का नाम लिखने की परंपरा चली आ रही है. वहीं बदलते वक्त के साथ अब डिजिटल माध्यम से भी राम नाम लिखने का कार्य शुरू हो गया है. राम नाम बैंक की तरफ से www.ramnambank.in वेबसाइट भी बनाया गया है, जिसके जरिए लोग डिजिटल तरीके से राम नाम लिखकर उसे बैंक में जमा कर रहे हैं. डिजिटल तरीके से राम नाम लिखने के बाद उसे ऑनलाइन ही जमा कर दिया जाता है. वहीं कोरोना काल के दौरान कई महीनों तक राम नाम बैंक से राम नाम पुस्तिका जमा करने और देने का काम बेहद धीमा हो गया था, जिस वजह से उस दौरान डिजिटल तरीके से राम नाम लिखने को प्रोत्साहन दिया गया और हजारों लोग राम नाम डिजिटल तरीके से लिख कर जमा करने लगे. अब राम नाम पुस्तिका में लिखने के साथ ही डिजिटल तरीके से भी राम नाम लिखकर बैंक में जमा किया जा रहा है. डिजिटल रामनाम लिखने वालों की संख्या में तेजी वृद्धि हो रही है, जिससे बैंक के संचालक भी काफी खुश व उत्साहित हैं.
संगम तट पर लगा राम नाम बैंक लोगों को कर रहा है आकर्षित
संगम के नजदीक बनाए गए राम नाम बैंक के शिविर को उधर से गुजरने वाले लोग इस अनोखे बैंक को देखकर चकित हो जाते हैं. मेले में आने वाले श्रद्धालु सोचते हैं कि आखिर यह कैसा बैंक है. राम नाम बैंक के बारे में जानने को उत्सुक लोग शिविर के अंदर पहुंचते हैं तो बैंक के बारे में विस्तार से जानकारी लेते हैं. इस दौरान बहुत से लोग पहली बार शिविर में पहुंचने के साथ ही राम नाम बैंक से जुड़ जाते हैं. साथ ही राम नाम लिखकर इस अलौकिक पूंजी को कमाने में लीन हो जाते हैं. संगम जाने के दौरान अनुराग पांडेय ने जब राम नाम बैंक का शिवर देखा तो उसके बारे में जानने के लिए उनके अंदर उत्सुकता बढ़ी, जिसके बाद वो राम नाम बैंक के शिविर में गये, जहां से उन्हें राम नाम लिखने की प्रेरणा मिली और उन्होंने तय किया कि अब वह लगातार राम नाम लिखकर इस राम नाम की पूंजी कमाएंगे.
देश की आजादी के पहले से चल रहा है राम नाम लिखने का सिलसिला
प्रयागराज के व्यापारियों ने राम नाम लिखकर रखने की परंपरा की शुरुआत की थी, जिसमें ज्योतिषी आशुतोष वार्ष्णेय के बाबा ईश्वर चंद्र भी शामिल थे. लगभग आठ दशक पहले चौक के व्यापारियों ने अपनी कमाई का दसवां हिस्सा राम नाम लिखने पर खर्च करना शुरू किया. व्यापारियों ने उस वक्त मोरपंख और लाल स्याही के जरिये राम नाम लिखने की शुरुआत की थी. जो बदलते वक्त के साथ राम नाम बैंक बन गया. उस वक्त चौक के कुछ व्यापारियों ने लोगों को लिखने के लिए कागज कलम और दवात की व्यवस्था अपनी कमाई से करना शुरू किया था. बदलते वक्त के साथ राम नाम बैंक की तरफ से राम नाम पुस्तिका छपवाकर लोगों को दी जाने लगी. बैंक से जुड़े कई लोग आज भी अपनी कमाई का दसवां हिस्सा राम नाम बैंक के लिए ख़र्च करते हैं.
क्या होती हैं राम नाम लिखी कॉपियां
राम नाम बैंक में लिखी हुई पुस्तिकाओं को जमा किया जाता है और इसे संस्था से जुड़े लोग संभालकर रखते हैं. अब तक करोड़ो की संख्या में राम नाम लिखी कॉपियां राम नाम बैंक में जमा की जा चुकी है, जिसे संस्था से जुड़े लोग अलग-अलग स्थानों पर संजोकर रखते हैं, जबकि बहुत से लोग राम नाम बैंक में पहुंचकर इन कॉपियों के बंडलों को मांगकर ले जाते हैं, जिसमें से कुछ लोग मंदिर में रखकर पूजा पाठ करते है, जबकि कई लोग इन बंडलों की ग्रंथ के रूप में पूजा भी करते हैं. इसके अलावा कई लोग अपने घरों व अनुष्ठान के निर्माण के समय नींव में रखने के लिए भी राम नाम लिखी कॉपियों के बंडलों को ले जाते हैं.

