यूपी के आधे से अधिक परिषदीय स्कूलों में नियमित प्रधानाचार्य नहीं, सीनियर शिक्षक संभाल रहे प्रभार

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Published : Dec 19, 2022, 5:43 PM IST

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यूपी के आधे से ज्यादा परिषदीय प्राइमरी अपर प्राइमरी विद्यालयों की जिम्मेदारी स्कूल के सीनियर शिक्षक इंचार्ज के रूप में संभाल रहे हैं. इसकी बड़ी वजह वर्ष 2015 के बाद से प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में नियुक्त शिक्षकों के प्रमोशन न होना है.

जानकारी देते प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह.

लखनऊः यूपी के आधे से ज्यादा परिषदीय प्राइमरी अपर प्राइमरी विद्यालयों की जिम्मेदारी स्कूल के सीनियर शिक्षक इंचार्ज के रूप में संभाल रहे हैं. इसकी बड़ी वजह है कि वर्ष 2015 के बाद से प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में नियुक्त शिक्षकों के प्रमोशन ही नहीं हुए. कई जिले तो ऐसे हैं, जहां 15-20 साल पहले प्रमोशन हुए थे उसके बाद अभी तक वह एक भी शिक्षक को प्रमोशन नहीं दिया गया है. जिसका नतीजा है कि प्रधानाध्यापकों के काफी पद खाली पड़े हुए हैं.


परिषदीय स्कूलों (council schools) में पहली भर्ती प्राइमरी के प्रधानाध्यापक रिलीव हों तो उनकी जगह शिक्षक पद पर होती है. उसके बाद दो स्तर पर प्रमोशन होते हैं. प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह (Vinay Kumar Singh, Provincial President of Primary Teacher Trained Graduate Association) ने बताया कि बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में सहायक अध्यापक अध्यापक की भर्ती होती है और प्राइमरी स्कूल में तैनाती मिलती है. पहला प्रमोशन प्राइमरी स्कूल के प्रधानाध्यापक या अपर प्राइमरी स्कूल में अध्यापक के पद पर होता है. इसके बाद प्राइमरी स्कूल के प्रधानाध्यापक और अपर प्राइमरी स्कूल के अध्यापक का प्रमोशन अपर प्राइमरी के प्रधानाध्यापक पद पर होता है. प्रधानाचार्य कुल कितने पद खाली होने की बड़ी वजह रिटायर के बाद वरिष्ठ शिक्षकों का प्रमोशन नहीं होना है. शिक्षकों के पदों पर नई भर्तियां और शिक्षा मित्रों के समायोजन से नए शिक्षकों से नहीं हुआ है, इस कारण प्रमोशन में प्रक्रिया रुकी हुई है.

वरिष्ठता को लेकर के सैकड़ों स्कूलों में चल रहा है विवाद : प्रदेश में लगभग 82000 प्राइमरी और 46,000 अपरप्राइमरी स्कूल हैं. इनमें से आधे में प्रधानाध्यापक नहीं हैं. जो सोनियर शिक्षक होता है, उसे इंचार्ज बना दिया जाता है. विनय सिंह ने बताया कि लखनऊ में ही प्राइमरी में प्रमोशन वर्ष 2013 और अपर प्राइमरी में वर्ष 2015 के बाद से नहीं हुए. इसी तरह उन्नाव में प्राइमरी और अपर प्राइमरी में 2015 में आखिरी बार प्रमोशन हुए थे. प्रमोशन वर्ष 2015 के बाद से तो कहीं नहीं हुए. इसकी वजह ये बताई जा रही है कि वरिष्ठता विवाद में कुछ शिक्षक कोर्ट गए थे. तब से शिक्षा विभाग उस विवाद का निपटारा के लिए कोई ठोस नीति नहीं बना पाया है.

कई तरह दिक्कतें स्कूलों में पेश आती हैं : इस बारे में प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों का कहना हैं कि प्रधानाध्यापक बनने से मनोबल बढ़ता है और वह आत्मविश्वास के साथ विद्यालय के सम्बंध में निर्णय ले सकता है. इंचार्ज उस तरह विद्यालय को नहीं चला सकता. इससे विद्यालयों में शिक्षकों का प्रमोशन (promotion of teachers) समय पर कराए जाएं. प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह कहते है कि मामला कोर्ट में है तो विभाग को पैरवी करनी चाहिए. प्रमोशन न होने से उसका प्रभाव विद्यालयों में शिक्षा और अन्य कामकाज पर भी पड़ता है. इस पर जल्द निर्णय लिया जाना चाहिए. निदेशक बेसिक शिक्षा शुभा सिंह (Director Basic Education Shubha Singh) का कहना है कि प्रमोशन की नई पॉलिसी (new promotion policy) तैयार की गई है. शासन से मंजूरी मिलने का इंतजार है. मंजूरी मिलते ही जल्द प्रमोशन शुरू कर दिए जाएंगे.

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